ईद का चाँद और हमारे हालात

Chand-raat-aur-hum

*शव्वाल रमजान के बाद अाने वाला महिना है।
– इसकी पहली रात वह हाेती है, जिसमें ईद का चाँद दिखाई देता है । इसका पहला दिन ईदुल्फित्र हाेता है। शव्वाल कि पहली रात जिसे अााम तौर पर चाँद रात कहाँ जाता है।
– यह रात रमजान के खतम हाेते ही शुरु हाेती है, अौर इस रात में जाे कुछ किया जाता है उसे देख कर पता चलता है कि जाे शयातीन रमजान में बाँध दिए गए थे, वह अपनी रिहाई का जश्न मना रहे हैं घर, गलियाँ, कूचे, अौर खास तौर से बाजार उनकी काररवाइयाें से भरे नजर अाते हैं। हर तरफ गाने बाजे कि अावाजें उठते हैं, बे परदगी की नुमाईश शुरु हाेती है।

– बेगैरत बाप, भाइ, बेटे, शौहर अपने घर की अौरताें काे मेंहदी लगवाने अौर चूडियाँ पहनाने ले जाते हैं अौर बडे इत्मिनान से उनके हाथाें काे गैर महरम मर्दाें के हाथाें में खेलते हुए देखते हैं।
“इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजेऊन”

– हाेना ताे यह चाहिए कि चाँद देख कर अल्लाह का शुक्र अदा किया जाए, कि अल्लाह ने हमारी जिन्दगी में एक अौर रमजान गुजारने की माेहलत दी, अौर एक अौर ईद मयस्सर की,
– मगर अल्लाह कि नाफरमानी की जाती है। गैरशरायी चीजों की नक्काली की जाती है। जैसे अातिशबाजि, पटाखे, नाच गाने कि महफिलें। सुभानाल्लाह !
क्या हमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का यह फरमान याद नहीं
“जिसने जिस कौम की नक्काली की वह उसी कौम मे से है।” – (सुनन अबु दाऊद:२०२४)

*अल्लाह रब्बुल इज्ज़त का फरमान है ;
“फिजूल खर्ची करने वाले शैतान के भाई हैं, अौर शैतान अपने रब का बडा ही नाशुकरा है।” – (सूरह बनी इसराईल:२७)

– हमारे कुछ मुस्लिम भाई ताे ईद कि शापिंग ऐसे करते हैं मानाे यह काेई फर्ज, सुन्नत या वाजिब हाे, अौर गरीब मुसलमानाें काे भूल जाते हैं। अौर अाखिर वक्त में फितरा अदा करके जान छुडाते हैं जैसे काेेई एहसान किया हाे।

*मेरे अजीजो –
– अाईए हम अपने अामाल का मुहासिबा करें!!!
– अौर देखें कि रमजान में हमने क्या किया है?
– अौर हमें इसकी बरकताें मे से क्या मिला है?
– क्या रमजान में हमने सिर्फ भूख प्यास ही काटी है?
– क्या रमजान में हमने अपने नफ्स काे अल्लाह अौर
– उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की इताअत की तरबीयत ली है?
– क्या रमजान में किए गए वह काम जिन्हें हम इबादत समझ कर करते रहे हैं अल्लाह ने कबूल कर लिए हैं?

*अाईए अाज से अौर अभी से अपने रब की तरफ पलटें जिस तरह रमजान के पूरे महीने तक अल्लाह की इताअत अौर फरमाबरदारी की है उसी तरह पुरी जिन्दगी हमेशा हमेशा उसकी फरमाबरदारी करें। और जाे नाफरमानियाँ कर चुके हैं उससे तौबा कर लें।

*अल्लाह तअाला हमारी गलतियाँ, काेताहियाँ, अौर गुनाह माफ फरमाए।
– हमारे नेक अामाल कबूल फरमाए ।
– हमें किताबो सुन्नत का मुत्तबेय बनाये ।
– खात्मा हमारा ईमान पर हो |
*वा आखिरू दावाना अल्हम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन!
अामीन या रब्बल अालमीन !!!

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s