
Karbala ke 56 shaheed Hazrat Habib ibn Mazaheer



कर्बला के 57वें शहीद हज़रते अबू समामा उमरु बिन अब्दुल्लाह सेदादी
आप का पूरा नाम उमरु इब्ने अब्दुल्लाह इब्ने कैब इने शरजील इब्ने शिराजील इब्ने उमर इब्ने हाशिद इब्ने जशम इब्ने हैरदन इब्ने औफ बिन हमदान साअएदी अल-सैदावी था और कन्नियत अबू समामा थी।
आप ताबई थी। आपका शुमार हज़रत अली के असहाब में था। आपने हज़रत अली के साथ तमाम जंगों में शिरकत की थी। आप बड़े शहसवार और शियों में बड़ी अज़मतों शौकत के मालिक थे। अमीरूल मोमिनीन के बाद इमाम हुसैन की ख़िदमत में रहे।
हज़रत मुस्लिम इब्ने अकील जब कूफ़े तशरीफ लाये तो आपने उनकी पूरी इमदाद की। उनके लिये असलहे ख़रीदे और दारुलअमारः पर हमले में बनी तमीम हमदान की क्यादत की हज़रते मुस्लिम की शहादत के बाद आप चंद रोज़ रू-पोश हो गये फिर इमाम हुसैन की ख़िदमत में हाज़िर हो गये।
करबला के बाद इब्ने सअद ल० ने कसीर इब्ने अब्दुल्लाह ने शअबी के जरिये से इमाम हुसैन अलै० के पास एक पैग़ाम भेजा कासिद चाहता था कि हथियार लगाऐ इमाम हुसैन से मिले मगर अबू समामा ने उस को कामयाब न होने दिया और वह बगैर पैग़ाम पहुँचाये वापस चला गया।
नमाज़े ज़ोहर के लिये आप ने ऐन हंगामा-ए-कारज़ार में इमाम हुसैन अलै० से दरख्वास्त की कि नमाज़े जमाअत होनी चाहिये। चुनान्चे इमामे मज़लूम ने नमाज़ पढ़ाई फिर जंग के मौके पर आपने कमाले म दिलेरी से शमशीर ज़नी की बिल-आख़िर आप के चचा ज़ाद भाई कैस ल० इब्ने अब्दुल्लाह अल-साअएदी ने आप को शहीद कर दिया।

कर्बला के 58वें शहीद हज़रते अनीस इब्ने मअकल असहबी
आप आले रसूल के जाँनिसारों और ख़ास दोस्तदारों में थे। यौमे आशूरा आप ने इज़्ने जिहाद हासिल किया और मैदान में आकर निहायत दिलेरी और बहादुरी से लड़े और आप ने दस दुश्मनों को कत्ल करने के बाद शहादत पाई।

कर्बला के 59वें शहीद हज़रते जाबिर इब्ने अरवः अल-गफ़्फ़ारी
आप सहाबी-ए-रसूल थे। आपने सरवरे कायनात की मौजूदगी में जंगे बद्र-ओ-हुनैन वगैरह में शिरकत की थी आप निहायत कबीर-उल-सिन और ज़ईफ थे। करबला में यौमे आशूरा जब नबर्दआज़माई के लिये निकले तो आपने अम्मामे से कमर और एक कपड़े से अपनी पलकों को उठा कर बाँध लिया था। इज़्ने जिहाद के बाद ज़बरदस्त जंग की और साठ आदमियों को कत्ल कर खुद शहीद हो गये।

कर्बला के 60वें शहीद हज़रते सालिम मौला आमिर अल-अबदी
आप अपने मालिक आमिर इब्ने मुस्लिम अबदी के हमराह मक्का-ए-मोअज़्ज़मा में हाज़िरे ख़िदमते इमाम हुसैन अलै० हुऐ आपके मालिक जनाब आमिर अमीरूल मोमिनीन के शियो में थे और बसरा के रहने वाले थे।
मक्का से इमाम हुसैन अलै० के हमराह रहे और करबला में अपने मालिक की मईअत में शहीद हुये।