कर्बला के 24वें शहीद हज़रते हज्जाज इने बद्र अल-तमीमी अल-सईदी
जनाब हज्जाज बसरा के रहने वाले क़बीला-ए-बनी साद से थे। आप रईसे बसरा मसूद इब्ने उमर का खत लेकर इमान हुसैन अ० की ख़िदमत में हाज़िर हुऐ थे और फिर वापिस नही गये।
मोअर्ररखीन का ब्यान है कि इमाम हुसैन अलै० ने मसूद इब्ने उमर को ख़त इरसाल किया था जिस में दावते नुसरत भी थी। मसूद ने ख़त पाते ही बनी तमीम बनी हन्ज़ला इब्ने साद इब्ने आमिर को जमा करके एक ख़त के ज़रिये से कहा कि माविया के मरने के बाद से जुल्म व जौर के किले की दिवारे हिल गई है। अब ज़रूरत है कि इन्साफ और इमान की बुनियादें मज़बूत हो। मेरे अज़ीज़ो ! अगर माविया का जादू चल गया और यज़ीद की हुकूमत मुस्तक हो गई तो इस्लाम बिल्कुल ख़त्म हो जायेगा। सुनो ! ‘इमाम हुसैन फर्ज़न्दे रसूल हमें बुला रहे हैं और उनकी इमदाद हमारा फ्रीज़ा है।
आप की तवील तक़रीर के जवाब में सब ने हिमायत का दावा किया इसके बाद आपने हज्जाज सअदी के ज़रिये से इमाम हुसैन अ० की ख़िदमत में वायदा का खत भेजा हज्जाज जो पहले ही से हाज़िरे ख़िदमत होने को तय्यार था इमाम हुसैन के पास पहुँच कर वापिस न गये और यौमे आशूर हमला-ऐ-अव्वल में अपने को फर्ज़न्दे रसूल पर अपने को कुर्बान कर दिया।


