
कर्बला के 51वें शहीद हज़रते मालिक इब्ने अनस-अल-मलकी
इब्ने नमा का बयान है कि मालिक इब्ने अनस का नाम अनस इब्ने हरस इब्ने काहिल इब्ने उमर इब्ने सअब इब्ने असद इब्ने हज़ीमा असदी-अल-काहिली था। आप हुजूर सरवरे कायनात के सहाबी थे और रावी हदीस दोनो फिरको के ओलमा ने रवायत की है आप का कहना है कि मैने ऑ हज़रत को ये कहते हुये सुना है कि मेरा बच्चा हुसैन करबला में शहीद किया जायेगा जो उस वक़्त हाज़िर हो उसे मद्द करनी ज़रूरी है। ओलमा असकलानी और इब्ने जज़री ने असाबा और असदलगाबः में लिखा है। इब्ने जज़री का कहना है कि अनस का शुमार कूफी असहाब में था। यानी कूफ़े के बाशिन्दे थे। आप कूफ़े से रात को निकल कर करबला पहुँचे और रोज़े आशूरा इमामे हुसैन अलै० पर निसार हो गये आप निहायत कबीरूल सिन थे। इमामे हुसैन अलै० से इजाज़त लेकर मैदाने जंग में आये और रजज़ पढ़ते हुऐ शहीद हो गये।

