मुश्किल सवालात

मुश्किल सवालात

से तौरेत के एक आलिम ने जिसका नाम मुज़र था। एक मर्तबा हज़रत अली पूछा कि मेरे चंद सवालों के जवाब दीजिये । हज़रत अली ने फ्रमायाः पूछो, क्या पूछते हो? उसने पूछा

बताइये वह कौन-सा मर्द है जिसका न बाप है न मां? वह कौन-सी औरत है जिसका न बाप है न मां? वह कौन सा मर्द है जिसकी मां तो है लेकिन बाप नहीं? वह कौन सा पत्थर है जिसने जानवर पैदा किया ? वह कौन सी औरत है जिसने एक ही दिन में तीन घड़ियों में बच्चा जन दिया। वह कौन से दोस्त हैं जो आपस में कभी दुशमन न बनेंगे? वह कौन से दुशमन हैं जो आपस में कभी दोस्त न बनेंगे?

हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने फ़रमाया: जिसका न बाप है न मां हव्वा रजियल्लाहु तआला अन्हा हैं। वह मर्द जिसकी मां है लेकिन बाप नहीं हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम हैं। वह पत्थर जिसने जानवर पैदा किया वह पत्थर है जिससे हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम की ऊंटनी पैदा हुई। वह औरत जिसने एक ही दिन में तीन घड़ियों में बच्चा जना हज़रत मरयम हैं जिनको एक घड़ी में हमल ठहरा, दूसरी घड़ी में दर्द जेह (बच्चा पैदा होने के वक़्त दर्द) पैदा हुई। तीसरी घड़ी में ईसा अलैहिस्सलाम पैदा हो गये। वह दोस्त जो कभी आपस में दुश्मन न बनेंगे जिरम और रूह है। वह दो दुशमन जो कभी आपस में दोस्त न बनेंगे मौत और हयात है। तो मुज़र ने सुनकर कहा वाकई ऐ अली! तुमने सही जुवाब दिये। वाकई तुम बाबे मदीनतुल इल्म हो। (जामिउल मुजिज़ात सफा २३) पास दो यह

सबक: मदीनतुल इल्म के बाब के इल्म से पता चलता है कि मदीनतुल में इल्म सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम में कोई ऐसी शय नहीं जो न हो।

लड़के की मां

लड़के की मां

हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के ज़माने में दो औरतों ने बच्चे जने। रात अंधेरी थी। एक के यहां लड़का पैदा हुआ और एक के यहां लड़की। दोनों में झगड़ा इस बात का पैदा हुआ कि हर एक कहती है कि मैंने लड़का जना है। आख़िरकार दोनों हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के पास लायी गयीं। हर एक उनमें से यह कहती थी कि लड़के की मां मैं हूं। हज़रत अली ने फ्रमाया कि तुम दोनों थोड़ा थोड़ा दूध छातियों से निकालकर दो बर्तनों में रखो। चुनांचे ऐसा ही किया गया। आपने दोनों दूधों को तौला तो एक वज़नी उतरा । फ्रमायाः जिसका दूध भारी है, लड़का उसी का है। यह फैसला सुनकर लोगों ने पूछा कि आपने यह मसअला कहां से निकाला । फ्रमायाः खुदा ने मर्द को हर चीज़ में फजीलत दी है। हत्ता कि गिज़ा में भी। बस मैंने इसी हक़ीक़त के पेशे नज़र सोचा था कि लड़के की मां का दूध वजनी होगा। ( नुज़हतुल मजालिस जिल्द २, सफा ३५५)

सबक : इस किस्म के मसअले को हल करना इल्मे दीन ही की बदौलत हो सकता है। कुरआन पाक का सही इल्म रखने वाला कुरआन पाक से. हर मुश्किल का हल पा लेता है।