बिलाल की आजादी

हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु तआला अन्हु एक हब्शी गुलाम थ। यह मुसलमान हुए तो इनके मालिक उमय्या ने जो बड़ा दुशमने रसूल काफिर था। हज़रत बिलाल को बड़ी सख्त तकलीफें देना शुरू की। सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को पता चला तो आपने बहुत बड़ी कीमत का सोना देकर हज़रत बिलाल को आजाद कराया। सिद्दीके अकबर का यह ईसार अल्लाह को बड़ा पसंद आया। कुरआन में इरशाद फ़रमाया कि वह (सिद्दीक) महज़ अल्लाह की रजा के लिए माल खर्च करता है और अनकरीब वह राजी होगा। (कुरआन करीम पारा ३०, रूकू १८, रूहुल ब्यान जिल्द ४, सफा ६६१)

सबक़ : सिद्दीके अकबर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने अपना माल व ज़र सब कुछ इस्लाम पर कुर्बान कर डाला। खुद अल्लाह तआला ने भी कुरआन में सिद्दीके अकबर की तारीफ फ़रमाई। फरमाया है कि हम इसे राजी करेंगे। फिर जो सिद्दीक पर राजी नहीं तो खुदा उस पर राजी नहीं।

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