Aftab e Ashraf 13

मीरा मऊ में आपकी तशरीफ़आवरीये मौज़ा भी आपके हल्का-ए-इरादत में दाखिल था और यहाँ के लोग भी आपके जांनिसारों और अक़ीदतमंदों में शुमार होते थे! यहाँ के लोग आपको साल में एक बार या दो बार अपने यहाँ ज़रूर लाते थे! आप यहाँ सुल्तान अहमद के मकान क़याम फरमा होते थें।

सुल्तानपुर– ये वो शहर है जहाँ हज़रत अक्सर और बेशतर आया करते थें! यहाँ हर मज़हबो मिल्लत के लोग आपके अक़ीदतमंद थे! गैर मुस्लिमों में जमुना प्रसाद चूने वाले और राम सुन्दर आपके में ख़ास अक़ीदतमंदों में से थे! यहाँ आप अब्दुल मजीद उर्फ बन्ने भाई के मकान पर क़याम फरमाते थें फिर बाद में अशफ़ाक़ अहमद ख़ान (
उर्फ मन्नू भाई मोहल्ला शाहगंज जमीला मंज़िल में क़याम फ़रमाने लगे। आप जामिया अरबिया और पाँचों पीर अक्सर तशरीफ़ ले जाया करते थें।



जामिया अरबिया सुल्तानपुर- जब आप सुल्तानपुर तशरीफ़ ले जाते तो जामिया अरबिया ज़रूर तशरीफ़ ले जाते थें! यहाँ के तमाम उलेमा तुलबा व मुर्रिसीन और खुद मोहतमिम जामे अरबिया मौलाना सलीम साहब हद दर्जे आपका ऐहतिराम फ़रमाते थे! हज़रत जामे अरबिया के सालाना जलसे में ज़रूर शिरकत फ़रमाते थे! जामिया अरबिया के उलेमा व तुलबा हज़रत से दुआएं और तावीज़ात लेतें और आपकी ख़िदमत करते थें!



सफ़र कानपूरसुल्तान अहमद ख़ान मौज़ा मीरा मऊ बयान करते थे कि एक बार हज़रत मेरे हमराह कानपूर तशरीफ़ ले गयें वहां ज़हीर अहमद, मुहम्मद इस्हाक़ जर्राह जायस के भांजे के क्वार्टर पर क़याम फरमा थे! दूसरे दिन कुछ क़व्वाल आएं और हज़रत को कुछ कलाम सुनाने की ख्वाहिश ज़ाहिर की! हज़रत ने फ़रमाया मैं हज़रत मख़दूम जाजमऊ के आस्ताने पर हाज़री देने जा रहा हूँ! कल | सुनूँगा! दूसरे दिन जाजमऊ से हज़रत वापस हुएं और क़व्वाल आपकी ख़िदमत में हाज़िर हुएं! दस बजे दिन में क़व्वाली शुरू हुई लेकिन हज़रत को उनका कोई कलाम पसंद नहीं आया! क़व्वालों ने मुझसे पूछा हज़रत कैसा कलाम पसंद फ़रमाते हैं, मैंने कहा आपके जद अमजद हज़रत मख़दूम अशरफ़ सिमनानी रहमतउल्लाह अलैह के शान में सुनाओ! क़व्वालों ने मख़दूम अशरफ़ रहमतउल्लाह अलैह के शान में कलाम पढ़ना शुरू कर दिया! हज़रत झूम उठे! नोटों की बारिश शुरू हो गयी! महफ़िले क़व्वाली अभी शबाब पर थी की अचानक पुलिस ने छापा मार दिया और ज़हीर अहमद को गिरफ़्तार कर लिया और बहुत से लोगों के नाम नोट कर लिया! जुर्म ये था की पर्मीशन के बगैर क़व्वाली हो रही थी! हज़रत ने पूछा ये कौन हैं? मैंने कहा दरोगा और पुलिस वाले हैं आपके मेज़बान को पकड़ लिया है।

आपने मुझसे फ़रमाया जाकर उनसे कह दो उनको छोड़ दें लेकिन मेरी हिम्मत नहीं पड़ी! हज़रत ने तीन बार यही फ़रमाया! बिलआख़िर मैंने हज़रत की दस्बोसी किया और डरते हुए दरोगा के पास गया और हज़रत का फरमान सुना दिया! दरोगा बोला ये कानपूर है यहाँ ना जाने कितने ऐसे खाने कमाने वाले आते जाते रहते हैं। हज़रत दूर खड़े थे! मैंने देखा अचानक हज़रत के तेवर बदलने लगें और आप सड़क पर दौड़ लगाने लगें और दहन मुबारक से जी.ज़ी की आवाज़ निकालने लगें | ये देख कर दरोगा और पुलिस वाले बदहवास हो गए! दरोगा ने फ़ौरन ज़हीर अहमद को छोड़ दिया और पुलिस को लेकर वहां से चला गया! दूसरे दिन दरोगा हज़रत के पास आया और माफ़ी का तलबगार हुआ क़व्वाली का पर्मीशन दिलवाया लेकिन हज़रत ने फिर क़व्वाली नहीं सुना और चले आएं!



लम्भुआ ज़िला सुल्तानपुरइस बस्ती में भी हज़रत के के मुरीदो मोतक़िद कसरत से थे! अव्वल आपकी शर्फ़ बैत जिसको हासिल हुई वो रहमतउल्लाह नामी शख्स थे और सबसे पहले हज़रत ने इन्हीं के घर क़याम फ़रमाया! धीरे धीरे ये पूरा गाँव हज़रत के हल्का-ए-इरादत और बैअत में शामिल हो गया। यहाँ हज़रत ज़िन्दगी के आखरी अय्याम में तशरीफ़ लाएं इस वजह से यहाँ के लोगों को आपकी ख़िदमत का ज़्यादा मौक़ा ना मिल सका लेकिन उसके बावजूद

आपने यहाँ खूब फ़ैज़ो करम का दरिया बहाया! ज़ाहिद हुसैन साहब ने बयान किया कि मेरे चार बच्चे पैदा हुएँ लेकिन चारो फौत हो गयें! एक बार हज़रत, मूसा भाई के हमराह लम्भुआ तशरीफ़ लाएं! हज़रत की खुशी के लिए लम्भुआ बाज़ार में मेरे दरवाज़े के सामने महफ़िले सिमाअ का एहतमाम हुआ! महफ़िले सिमाअ के बाद हज़रत की ख़िदमत में मैंने अपनी दरख्वास्त पेश किया और तालिबे दुआ हुआ! हज़रत जज़्ब की हालत में उठे और सड़क पर दौड़ लगाने लगें और इसी आलम में फज्र का वक़्त हो गया, उस वक़्त हज़रत ने फ़रमाया जाओ बच्चा पैदा होगा और महफूज़ रहेगा! आपने एक तावीज़ भी दिया! उसके बाद मेरे दो बच्चे पैदा हुएं वाजिद हुसैन और मुहम्मद अनीस और हज़रत की दुआ से दोनों बा हयात रहें!

सफर बम्बई- एक बार आप अब्दुल शकूर के हमराह बम्बई तशरीफ़ ले गये! बम्बई में भी आपके मुरीदीन अच्छी खासी तायदाद में मौजूद थें! यहाँ हज़रत ने दो दिन मदनपुरा सायरा मंज़िल में क़याम किया और जनाब मुहम्मद मुस्तकीम साहब के मेहमान रहें! लौहर के जनाब ख़लील भाई और ज़हीर उद्दीन भाई के इसरार पर हज़रत कुर्ला कुरैश नगर तशरीफ़ ले गयें! वहां के लोगों ने हज़रत को हाथों हाथ लिया और आपकी बड़ी खिदमत किया! क़याम के दौरान आपने हज़रत हाजी अली, हज़रत मख़दूम माहिमी, हज़रत हाजी मलंग के आस्तानों पर हाज़री भी दिया! एक दिन आप रानी बाग़ चिड़िया घर तशरीफ़ ले गयें! हज़रत को जानवरों से बहुत लगाव था! आप चिड़िया घर में तमाम जानवरों को देख रहे थें देखते देखते आप वहां पहुचें जहाँ लोग हाथी की सवारी कर रहे थें! आपको हाथी की सवारी बहुत पसंद थी लेहाज़ा हाथी देखकर आपने उस पर बैठने की ख्वाहिश ज़ाहिर किया! फीलबान को बुलाया गया वो हाथी लेकर आया लेकिन जब हाथी सामने आया तो आपने उस पर बैठने से इन्कार कर दिया और फ़रमाया की इसने एक मुसलमान का खून किया है! तहक़ीक़ के बाद मालूम हुआ कि वाक़ई उस हाथी ने एक मुसलमान का खून किया था! जलील अहमद कुर्ला कुरैश नगर बयान करते थे की हज़रत
बम्बई से वतन जाने वाले थे और मेरी गाड़ी पासिंग में खोली गयी थी। मैंने हज़रत से दुआ करवाया की गाड़ी पास हो जाये! हज़रत ने फ़रमाया तुम्हारी गाड़ी पास हो जाएगी!मैं गाड़ी लेकर ताड़देव आर०टी०ओ० ऑफिस पहुंचा तो चौहान इंस्पेक्टर ने गाड़ी फेल कर दिया! मैं दोबारा गाड़ी लेकर फिर पहुंचा तो पाटेकर इंस्पेक्टर ने गाड़ी फेल कर दिया! मैं बहुत हैरान कि ये कैसे हो गया बहरहाल फिर मैं गाड़ी कुर्ला आगरा रोड कॉल टैक्स पेट्रोल पम्प ले गया और वहां याकूब फेड गाड़ी में काम करने लगा! वहां मैं एक दरख़्त की शाख पकड़ कर खड़ा था की मैंने देखा चौहान और पाटेकर दोनों स्कूटर पर बैठकर सामने सड़क से गुज़र रहे हैं, जैसे ही मेरे सामने से गुज़रे टायर सलामत और ट्यूब फट गया दोनों स्कूटर से गिर पड़ें! मैंने आगे बढ़कर दोनों को उठाया! जब उनके होश हवास दुरुस्त हुए तो मेरे गाड़ी के काग़ज़ात देखें और आर०टी०ओ० ऑफिस बुलाकर गाड़ी पास कर दिया!

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