
Hadith Bukhari 1001



** تعلیمات امیر (Taleemat e Ameer r.a)
** اکسٹھواں حصہ (part-61)
“معلوم ہونا چاہئے کہ قطب العارفین و رئیس الواصلین سید قطب الدین محمد الحسن والحسینیؒ کے نسب کی صحت انساب کی ثقہ تاریخوں سے تواتر کے ساتھ ثابت ہے چنانچہ مقرب حضرت ربّانی امیر کبیر میر سید علی ہمدانی قدس اللہ سرہ العزیز اپنی تصنیف “عمدۃ المطالب” میں فرماتے ہیں کہ “بارہ (۱۲) سادات صحیح النسب ہیں جو بیرون ہند سے ہندوستان آۓ ہیں۔ وہ ہیں میر سید عماد الدین بغدادیؒ و میر سید جلال الدین کرمانیؒ و میر سید محمد سنبھلیؒ و میر سید قطب الدین کڑویؒ و میر سید عزیز الدین پلاسویؒ و میر سید علاء الدین جیوریؒ (مرید و خلیفہ حضرت میر قوام الدین محمودؒ ابن حضرت قطب الدین مدنیؒ)
و میر سید مبارک غزنویؒ و میر سید سالار چوہنیؒ و میر سید حیدر ردولویؒ و میر سید محمد خاص حوضیؒ و میر سید محمد ماہ بہرائچیؒ (مرید و خلیفہ حضرت علاء الدین جیوریؒ) و میر سید طلحہ ملتانیؒ”
📚 ماخذ از کتاب چراغ خضر۔
امام مہدی علیہ السلام کا ظہور اورفضائل
Imam Mahdi ‘Alayh-is-Salam Ka Zahoor Aur Faza’il
فصل یازدہم
امام آخرالزمانں، مہدی الارض والسماء ہوں گے اور ان کے لئے آسمانی و زمینی علامات کا ظہور ہوگا
Gyarhwi’n Fasl
Imame Aakhir-uz-Zamaan ‘Alayh-is-Salam, Mahdi Al-Ardi Wa-Al-Sama’ Honge Aur Un Ke Li’e Aasmaani Wa Zameeni Alaamaat Ka Zahoor Hoga
حضرت سلمان بن عیسیٰ سے مروی ہے کہ انہوں نے فرمایا۔ مجھ تک یہ بات پہنچی ہے کہ بحیرہ طبریہ سے (امام) مھدی کے ذریعے تابوت سکینہ ظاہر ہوگا۔ یہاں تک کہ بیت المقدس میں آپ کے سامنے اسے اٹھا کر رکھ دیا جائیگا۔ جب یہود اس (تابوت) کو دیکھیں گے تو چند لوگوں کے سوا تمام اسلام قبول کرلیں گے۔
Nu’aym Bin Hammad, Al-Fitan, 01 : 360, Raqm : 1050,
Tahir-ul-Qadri, Al-Qawl-ul-Mu‘tabar Fi Al-Imam-il-Muntazar, : 60.]

ये इश्क़ ही है
मौलाना रूमी फ़रमाते हैं की एक मज़दूर दिन भर अपनी कमर पर बोझ उठा कर काम करता है और एक लोहार अपनी भट्टी में सर मूँह काला करने के बाद निहायत खुशी से घर वापस आता है ताकी अपनी घर की महबूबा (अपनी बीवी) को खुश करे और सामान -ए- हयात मुहय्या कर सके।
ये कारोबार -ए- हयात जो सुबह से शाम तक चलता है, इस में यही इश्क़ का जज़्बा कार फरमा नज़र आता है वरना कौन है जो किसी की खातिर अपने आप को परेशानी और मुसीबत में डाले,
ये सब इश्क़ की बदौलत है।
इश्क़ एक रूहानी चीज़ है और ये ऐसी जिन्स नहीं की जिसको बाज़ार से खरीद लिया जाये।
मौलाना फ़रमाते हैं की मालो दौलत और दुन्या की चीज़ें सब मुर्दा हैं, मगर इन सब के हुसूल की कोशिश ज़िदा लोगों के लिये होती है।
(سوز و ساز رومی)
जिस घराने में मुहब्बत का जादू चलता है उसके रहने वाले जन्नते फिरदौश की सी जिंदगी गुज़ारते हैं और कम आमदनी में खुशो खुर्रम रहते हैं।
ये इश्क़ की बरकत है की मालो दौलत से जो चीज़ खरीदी नहीं जा सकती, उसे पाते हैं।
अगर इश्क़ हो जो शहवत परस्ती से जुदा हो तो फिर इश्क़ कम नहीं होता बल्कि बढ़ता जाता है और ये एक ऐसा रिश्ता है जो मालो दौलत से बाला तर है।
इसे अगर हम मालो दौलत के तराज़ु में लाते हैं तो असल लज़्ज़त बाक़ी नहीं रहेगी।
अल्लाह त’आला से दुआ है की हमें राहे इश्क़ का मुसाफिर बनाये की जिस राह में हर पस्त का बुलंद, तल्ख का शीरीं और नाकाम का कामयाब बनना कोई बड़ी बात नहीं।