अल्लाह” कहने से 40 नेकीयाँ मिलती है…

अल्लाह” कहने से 40 नेकीयाँ मिलती है…
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लफ़्ज़ “अल्लाह” क़ुरआन मजीद मे 2700 बार आया है और क़ुरआन मजीद के हर हर्फ़ के बदले 10 नेकीयाँ मिलती है । [तिर्मिज़ी: 2910]
[लफ़्ज़ “अल्लाह” मे 4 हर्फ़ आते हैं: 4 * 10 = 40]

इस लिये हमें ख़ुदा हाफ़िज़ की जगह अल्लाह हाफ़िज़ कहना चाहिये…

यह प्यारी बात लोगों तक पहुँचाए

अल्हम्दुलिल्लाह, नेमत और गुनाह…
अल्लाह पाक जब किसी शख़्स को नेमत अता करता है और वह उस पर एक बार “अल्हम्दुलिल्लाह” कहता है तो वह उस नेमत का शुक्र अदा कर देता है अगर दुसरी बार “अल्हम्दुलिल्लाह” कहता है तो अल्लाह पाक उसका सवाब नये सिरे से अता फ़रमाता है और अगर तिसरी बार “अल्हम्दुलिल्लाह” कहता है तो अल्लाह पाक उस बन्दे के गुनाह माफ़ कर देता है ।
[हाकिम मुस्तदरक: 1871 – इमाम हाकिम ने इस हदीस की सनद को सही कहा है ।]
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*शेअर करके सद्का ऐ जारिया रवां करने में हिस्सेदार बनें*
*दुआओं 🤲🏻 में याद रखियेगा*
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Quran and Hadith about Nazzr e Bad and Jadu

*जादू करना*

*पस वो लोग उनसे वो बातें सीखते हैं जिसके ज़रिये मियां बीवी के दरमियान तफरीक़ डाल सकें………और आख़िरत में उनका कुछ हिस्सा नहीं*

*📕 पारा 1,सूरह बक़र,आयत 102*

*_ये बीमारी हमारे मुआशरे में बहुत आम हो गयी है जहां किसी को खाते कमाते देखा या मियां बीवी के बीच मुहब्बत देखी फौरन कुछ लोग हसद की आग में जल-भुन जाते हैं और बसा बसाया घर उजाड़ने में लग जाते हैं,ये हराम है हालांकि जायज़ काम के लिए जायज़ तरीक़े से दुआ तावीज़ कराना बिला शुब्ह जायज़ है,जैसा कि हदीसे पाक में है कि_*

*तुम नज़रे बद के लिए दुआ तावीज़ कराओ*

*📕 बुखारी,जिल्द 3,सफह 290*

*_और खुद हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हज़रत इमाम हसन व हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को दम करते और युं फरमाते थे कि “मैं तुम दोनों को अल्लाह तआला के कामिल कलिमात के साथ हर शैतान और ज़हरीले जानवर के शर से और हर शरीर आंख से अल्लाह की पनाह में देता हूं_*

*📕 हुलियतुल औलिया,जिल्द 5,पेज 56*
*📕 तज़किरातुल अम्बिया,सफह 152*

*हां ग़ैर शरई अल्फाज़ के साथ दम करना या तावीज़ बांधना और जादू करना हराम है बल्कि इसे शिर्क तक फरमाया गया है,इससे बचना बहुत बहुत ज़रूरी है*

*📕 अलमुअज्जमुल कबीर,जिल्द 10,पेज 262*

*_एक मुसलमान का एक मुसलमान के मालो दौलत व आराइश व इल्म को देखकर हसद करना हराम है और हसद नेकियों को ऐसे खा जाता है जैसे आग लकड़ियों को,हां अगर किसी की कोई चीज़ पसंद आ गयी और खुद भी ऐसी आरज़ू करता है कि मेरे पास भी ऐसी चीज़ हो ये हसद नहीं बल्कि ग़िब्ता है जिसे रश्क़ भी कह सकते हैं हसद तब होगा जब उसकी वो चीज़ उससे छिन जाने की तमन्ना रखे,लिहाज़ा मुसलमानों को चाहिए कि किसी की बढ़ती हुई अज़मत को देखकर उससे हसद रखने की बजाय अपने लिए उसी नेमत के वास्ते खुद मौला तआला से दुआ करे अगर वो उस नेमत के लायक़ होगा और मौला ने चाहा तो उसे ज़रूर अता करेगा,उसके ख़ज़ाने में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं और किसी की नेमत छीनकर किसी को देना उसकी शान के बईद है,लिहाज़ा अपनी सोच बदलें_*

*हज़रते मौला अली कर्रमल्लाहु तआला वज्हुल करीम से मरवी है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि तीन किस्म के आदमी जन्नत में नहीं जायेंगे शराब नोशी करने वाला रिश्तेदारों से क़ता ताल्लुक़ करने वाला और जादू करने वाला मगर ये कि तौबा कर ले*

*📕 मुसनद अहमद,जिल्द 4,सफह 399*

*जादूगर की सज़ा ये है कि उसे क़त्ल किया जाए*

*📕 मुस्तदरक,जिल्द 4,सफह 360*

*जो शख्स किसी नजूमी के पास जाए और उसकी कही हुई बातों की तस्दीक़ करे तो उसकी 40 दिन की नमाज़ क़ुबूल ना होगी*

*📕 मुस्लिम,जिल्द 2,सफह 232*

*काहिन अगर कल्मए हक़ भी बोलता है तब भी उसमें 100 झूट मिलाकर बोलता है*

*📕 बुखारी,जिल्द 2,सफह 857*

कुरान शरीफ की सुरतों का नाम और उनका मतलब

*कुरान शरीफ की सुरतों का नाम और उनका मतलब*
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हम हर रोज कुरआन ए मजीद कि तिलावत करते हैँ या सुनते हैं । हम को पता है कि कुरआन मजीद मेँ 114 सुरतेँ हैं । और उन सुरतोँ के नाम भि आप ने पढा होगा या सुना होगा । लेकिन क्या आप को उन सुरतोँ के नाम का मतलब पता है ?? अगर नहीँ पता है तो आइए आज हम जानते हैं कुरआन मजीद कि सुरतों के नाम ओर उनका मत्लब ,

1, सुरह फातिहा = शुरु कर्ना
2,सुरह बकरह = गाय ( जानवर )
3,सुरह आले इमरान = हजरत अबु तालिब (इमरान) अलैहिस्सलाम कि औलादें ,
4,सुरह निसा = औरतेँ
5,सुरह माइदह = दस्तर्ख्वान
6,सुरह अन्आम = जानवर
7,सुरह आअराफ= बुलन्दियाँ
8,सुरह अन्फाल = माले गनीमत
10,सुरह तौबा = माफि
11,सुरह युनुस = अल्लाह के एक नबि का नाम
12,सुरह हूद =अल्लाह के एक नबि का नाम
13,सुरह युसुफ =अल्लाह के एक नबि का नाम
14,सुरह राअद = बादल कि गरज
15,सुरह इबराहीम = अल्लाह के एक नबि का नाम
16,सुरह हिज्र = एक जग्ह का नाम
17,सुरह नहल = मधुमख्खी
18,सुरह इसरा = मेअराज का वाकिया
19,सुरह काह्फ= गार , गुफा
20,सुरह मरियम = हजरत ईसा अलैहिस्सलाम कि वालिदा का नाम
21,सुरह ताहा = हुरुफे मुकत्तआत के दो हुरुफ
22,सुरह अम्बिया = अल्लाह के तमाम नबि
23,सुरह हज्ज= जियारत
24,सुरह मोअमिनून= इमान वाले लोग
25,सुरह नूर = रोशनि
26,सुरह फुरकान= सहि और गलत में फर्क कर्ने वाली चीज
27,सुरह शुअरा = शायर लोग
28,सुरह नम्ल= च्युँटि
29,सुरह कसस = किस्से सच्चे कहानी
30,सुरह अनकबूत = मकडि
31,सुरह रूम = एक देश का नाम
32, सुरह लुकमान= अल्लाह के एक नेक बुजुर्ग बन्दे का नाम
33,सुरह सज्दा = झुकना , सज्दा करना
34,सुरह अहजाब = लश्कर , जमा , गिरोह
35,सुरह सबा = एक कौम
36,सुरह फातिर = पैदा करने वाला
37,सुरह यासीन = हुरुफ ए मुकत्तआत के दो हुरुफ
38,सुरह साफ्फात= सफ बन्दी करने वाले लाइन से खडे होने वाले ,
39,सुरह साद = हुरुफ ए मुकत्तआत का एक हर्फ
40,सुरह जुमर= गिरोह दर गिरोह
41,सुरह गाफिर = बख्शने वाला
42,सुरह हा मीम = हुरुफ ए मुकत्तआत के दो हुरुफ
43,सुरह शूरा = सलाह मश्वेरा
44,सुरह जुख्रुफ = सोना
45,सुरह दुखान = धुवाँ
46,सुरह जासियह = घुट्नों के बल गिरे हुए
47,सुरह अहकाफ = एक जग्ह का नाम
48,सुरह मोहम्मद = हमारे प्यारे नबि का नाम
49,सुरह फत्ह = जीत , कामियाबि
50,सुरह हुजरात = हुजरे , कमरे
51,सुरह काफ = हुरुफ ए मुकत्तआत का एक हर्फ
52,सुरह जारियात = धूल उडाने वाली हवा
53,सुरह तूर = एक पहाड का नाम
54,सुरह नज्म = सितारे
55,सुरह कमर = चाँद
56,सुरह रहमान = अल्लाह का नाम
57,सुरह वाकिया = वाकेअ होने वाली , कियामत
58,सुरह हदीद = लोहा
59,सुरह मुजादलह = बहस इख्तेलाफ , झगडा
60,सुरह हश्र= जम्आ होने वाला , कियामत के दिन ,
61,सुरह मुम्तहिनह= इम्तेहान लेने वालि
62,सुरह सफ= लाइन से खडे होना ,
63,सुरह जुम्आ= हफते के दिनोँ मेंसे एक मुबारक दिन ,
64,सुरह मुनाफेकुन = मुनाफिक लोग
65,सुरह तगाबुन= हार जीत , नुक्सान से गुजर्ना
66,सुरह तलाक= आजाद करना , तलाक देना
67,सुरह तहरीम= हराम कर देना
68,सुरह तबारक=बादशाही
69,सुरह कलम = कलम
70,सुरह हाक्कह= कियामत
71,सुरह मआरिज = बुलन्दियां
72,सुरह नूह = एक नबि का नाम
73,सुरह जिन्न = जिन्नात ( आग से पैदा कि हुयि अल्लाह कि एक प्राणी )
74,सुरह मुज्जम्मिल = चादर लपेटने वाला
75,सुरह मुद्दस्सिर= चादर ओढ्ने वाला
76,सुरह कियामह= कियामत
77,सुरह दह्र = जमाना , अर्सा
78,सुरह मुर्सलात = हवाएं
79,सुरह नबा = अहम खबर
80,सुरह नाजिआत = सख्ती से खिँचने वाली
81,सुरह अबस = त्यौरी चढाना
82,सुरह तकवीर = लपेटना
83,सुरह इन्फेतार = फट्ना
84,सुरह मुतफ्फेफिन = नाप तौल में कमि करने वाले
85,सुरह इन्शेकाक = फट जाना
86,सुरह बुरुज = सितारों वाला आसमान
87,सुरह तारिक = चमकता तारा
88,सुरह अअला = सब से ऊंचा
89,सुरह गाशिअह = छा जाने वाली मुसिबत
90,सुरह फज्र = फज्र ,सुब्ह सादिक
91,सुरह बलद = शहर
92,सुरह शम्स = सुरज
93,सुरह लैल = रात
94,सुरह दुहा = दिन कि रोशनि
95,सुरह शर्ह= खोल देना
96,सुरह तीन = इन्जीर
97,सुरह अलक = जमा हुवा खून
98,सुरह कद्र =कद्र , इज्जत
99,सुरह जल्जलह = जल्जला
100,सुरह आदियात = घोड्दौड का घोडा
101,सुरह कारियह = खडखडा देने वाली ( कियामत )
102,सुरह तकासुर = ज्यादती कि ख्वाहिश
103,सुरह अस्र = जमाना
104,सुरह हुमजह= ऐब निकालना
105,सुरह फील = हाथि
106,सुरह कुरैश= अरब के एक कबीले का नाम
107,सुरह माऊन = आम इस्तेअमाल कि चिजेँ
108,सुरह कौसर = हौज ए कौसर
109,सुरह काफिरुन= कुफ्फार लोग ,
110,सुरह नस्र= मदद
111,सुरह मसद = आग के शोअले
112,सुरह इख्लास = खालिस , वहदानियत
113,सुरह फलक= सुब्ह ,
114,सुरह नास = इन्सान , आदमी लोग

*पोस्ट को बड़ी एहतियात से लिखा है फिर भी इसमें अगर कोई भूल हो तो अहले इल्म सुधार करे
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*शेअर करके सद्का ऐ जारिया रवां करने में हिस्सेदार बनें*

Safeer e Imam Hussain Alahissalam Hazrat Kais bin mushir ki shahadat

Hazrat imam hussain a,s ne makam hazir me pohockar apne ek rafik kais bin mushir saidawi ko aapni aamad ki itillai taherir dekar kufa bheja lekin ummwi hukkam ne pahele raste me naka bandi kar li thi isliye kais jab kadsiya pohoche to giraftar kar liye gaye hussain bin numair ne unko ibne zyad ke pas kufa bhej diya ibne zyad ne unko ye gustakhana hukm diya ki kasre imarat ki chat par chadkar …Kazzab ibne kazzab hussain bin ali ko galiya do (( mazallah)) kais is hukm par kasr ke upar chad gaye or Allah taala ki hamd wa sana ke bad kaha

logo hussain bin ali a,s fatema binte rasool Allah s,a,w s. ke lakhte jigar is wakht khalke khuda me sabse behtarin shaks hai mai unhi ka bheja hua tumhare pas aaya hu wo mukam e hajir tak pohoch chuke hai isiliye tumhara farz hai ke unki madad ko aage bado or unki aawaz par labbaik kaho

fir hazrat kais ne ibne zyad or uske baap ko bura bhala kha hazrat ali a s ke liye dua e magfirat ki

ibne zyad unki bato ko sunkar aag babola ho gaya or huqm diya ki unko bohot uchi imarat se niche gira do or unke tukde tukde kar do chunanche ibne zyad ke jallado ne huqm ki lameel ki or unko niche gira diya gaya jisse aapki haddiya chakna choor ho gai or aap intekal farma gaye is tarha hazrat imam hussain a,s ka ye saccha or pakka mohibb or kasid aap par apni jaan kurban kar gaya

(( tarikh e tabari jild 5 safa no 220))