इमाम हुसैन का सर मुबारक और अजीज इब्ने हारून


अजीज़ इब्ने हारून-

करबला के कैदी इमाम हुसैन का सर मुबारक और शहीदों के सरों को चंद दिन कूफा में रखने कें बाद इब्ने ज्याद ने फौज के साथ दमिश्क रवाना किया !

दमिश्क जाते हुए यह काफिला हलब के पास आकर एक पहाड के नीचे उतरा ! उस पहाड पर एक कस्बा था ! इस कस्बे के सरदार का नाम अजीज़ इब्ने हारून था ! यह यहूदी था !

रात को हज़रत शहरबानो रजियल्लाहु तआला अन्हा की लौंडी शीरीं ने रोकर अर्ज किया ! कि अगर इजाजत हो तो जो कुछ मेरे पास बचा है ! इसे बेचकर इस पहाडी कस्बे से आपके वास्ते कुछ कपडा ख़रीद लाऊँ ?

बीबी साहिबा ने उसके इसरार पर इजाज़त दे दी ! शीरीं पहाड पर गयी ! और कस्बे का दरवाजा बंद पाकर खटखटाया ।

कस्बे का सरदार ‘अजीजे इब्ने हारून ने खुद आकर दरवाजा खोला ! और शीरीं का नाम लेकर

पुकारा ! शीरीं ने सलाम किया ! बह बडी ताजीम के साथ शीरीं को अपने साथ ले गया !

शीरीं ने पूछा आपने मेरा नाम कैंसे जान लिया ? उसने” जवाब दिया कि मेंने अभी अभी खवाब में हजरत मूसा और हजरत हारून अलैहिस्सलाम को परेशान हाल देखकर हाल पूछा तो उन्होंने फ़रमाया:

तुझे मालूम नहीं कि नबी आखिरुज्जमा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे हज़रत हुसेन रजियल्लाहु तआला अन्हु को शहीद कर दिया गया है !

उनका सर मुबारक लोग शाम को लिये जा रहे हैं ! और आज रात इस पहाड के नीचे ठहरे हैं ! मैंने अर्ज किया क्या मुहम्मद ( सल्लल्लाहु अलैहि बसल्लम ) को जानते हैं ! और मानते हैं ?

फरमाया: ऐ अजीज ! वह सच्चे रसूल हैं ! उनके बारे में अल्लाह ने हम सब पर अहद किया है ! हम उन पर ईमान लाये हैं ! जो उन पर ईमान न लायेगा ! वह दोजख में जायेगा !

मैंने अर्ज किया कि ज्यादा यकीन के लिये मुझे कुछ और बताइये ! तो उन्होंने फ़रमाया किले के दरवाजे पर जाकर खडे हो जाओ ! शीरीं नाम की एक लोंडी आकर दरवाजा बजायेगी ! उसकी बात मानना ! उसी की वाअस तू मुसलमान होगा !

जब सरे हुसैन के पास पहुंचे तो हमारा सलाम कहना ! वह सलाम का जवाब देंगे ! चुनांचे में खवाब से चौक कर फोरन दरवाजे पर आया कि तूने दरवाजा बजाया !

शीरीं ने सारा किस्सा आकर बीबी साहिबा को बताया ! यह किस्सा सुनकर सब अहले बैत हैरान हुए ! सुबह अजीज इब्ने हारून यजीदियों को कुछ रिश्वत देकर अहले बैत के पास आया !

हर एक के लिये कीमती जोडा लाया ! और हजार दीनार इमाम जैनुल आबिदीन को नज़्र करके मुसलमान हो गया ! फिर इमाम के हुजूर हाजिर होकर हजरत मूसा व हारून अलैहिस्सलाम का सलाम अर्ज किया ! तो सरे अनवर ने सलाम का जवाब दिया ।
(तजकिरा सफा 102 )

सबक: अल्लाह वालों का फेज दुनिया से जाने के बाद भी जारी रहता है ! जैसा कि यहूदी मुसलमान हुआ ! हमारे हजरत इमाम हुसेन का भी फैज जारी है

नक़्क़ारा-ए-खुदा


नक़्क़ारा-ए-खुदा

असीराने करबला ( Aseerane Karbala ) जब दरबारे यजीद में पेश किये गये ! तो हज़रत इमाम जेनुल आबिदीन रजियल्लाहु तआला अन्हु को देखकर यजीद ने पूछा: यह कौन है ?

बताया गया यह अली इब्ने हुसैन हैं ! बोला मैंने तो सुना था कि वह मारा गया ! बताया गया कि हुसैन के तीन लड़के थे !

अली अकबर अलीं असग़र मारे गये यह अली औसत (मझलें) हैं ! यह बीमारी को वजह से बच रहे ! ओर लाये गये !

यजीद ने हजरत इमाम जैनुल आबिदीन रजियल्लाहु अन्हु को बुलाकर अपने लड़के पास बिठाया और कहा ! ऐ अली ! मेरा लड़का तेरे बराबर है ! क्या तुम उससे मुकाबला कर सकते हो ?

आपने फ़रमाया कि एक एक तलवार दोनों को दे और मुकाबला देख ले ! इतने में नक़्क़ारा-ए-यजीद बजा ! यजीद के बेटे ने बडे फ़ख़्र से कहा कि यह नौबत मेरे बाप की नाम की बजी है ! या तेरे बाप के नाम की ?

उसी वक़्त मोअज्जिन ने अजान दी ! हज़रत इमाम ने जवाब दिया: देखा वह मेरे बाप…दादा के नाम की नौबत बजी तो क़यामत तक यूंही बजती रहेगी !

तेरे बाप दादा की नौबत चंद रोज बजकर बंद हो जायेगी ! यह जवाब सुनकर यजीद का लड़का ला जवाब हो गया और हाजिरीन भी हैरान रह गये !
(तजकिरा सफा 113, तनक्रीह 131)

सबक : हुसैन और अहले-बैत इमाम रजियल्लाहु तआला अन्हुम के नाम लेवा क़यामत तक बाकी रहेंगे ! और यजीद का कोई नाम तक लेने को तैयार नहीं ! मालूम हुआ कि जुल्म जालिम को मिटा देता है ! सब्र व शुक्र साबिर को खुदाई भर में और खुदा का मकबूल बना देता है ।

ख़लील व नमरूद का मुनाज़रह

ख़लील व नमरूद का मुनाज़रह
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〽️हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने जब नमरूद को ख़ुदा परस्ती की दावत दी तो नमरूद और हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम में हस्बे जेल मुनाज़रह हुआ।

नमरूदः तुम्हारा रब कौन है? जिसकी पर परसतिश की तुम मुझे दअवत देते हो?

हज़रत ख़लील अलैहिस्सलामः मेरा रब वो है जो ज़िन्दा भी कर देता है और मार भी डालता है।

नमरूदः ये बात तो मेरे अन्दर भी मौजूद है, लो अभी देखो मैं तुझे ज़िन्दा भी करके दिखाता हूँ और मार कर भी। ये कहकर नमरूद ने दो शख़्सों को बुलाया। उनमें से एक शख़्स को क़त्ल कर दिया और एक को छोड़ दिया और कहने लगा, देख लो एक को मैंने मार डाला और एक को गिरफ्तार करके छोड़ दिया, गोया उसे ज़िन्दा कर दिया। नमरूद की ये अहमक़ाना बात देख कर हज़रत ख़लील अलैहिस्सलाम ने एक दूसरी मुनाज़राना गुफ़्तगू फ़रमाई और फ़रमाया-

ख़लील अलैहिस्सलाम: मेरा रब सूरज को मशरिक़ की तरफ़ से लाता है तुझ में अगर ताक़त है तो तू मग़रिब
की तरफ़ से लाकर दिखा। ये बात सुन कर नमरूद के होश उड़ गए और ला जवाब हो गया।

(क़ुरआन करीम, पारा-3, रूकू-3)

🌹सबक़ ~

झूटे दअवे का अंजाम ज़िल्लत व रूसवाई, और काफ़िर इन्तिहाई अहमक़ होता है।

📕»» सच्ची हिकायात ⟨हिस्सा अव्वल⟩, पेज: 78, हिकायत नंबर- 63

हज़रत हबीब इब्ने मजाहिर अ० स० को सरकार इमाम आली मकाम का खत

हज़रत हबीब इब्ने मजाहिर अ० स० को सरकार इमाम आली मकाम का खत💘

अरब में दस्तूर था जब किसी को खत लिखते थे तो अगर बाप का नाम साथ हो तो इसका मतलब खुशी की खबर है अगर मां का नाम साथ हो तो खुशी की खबर नहीं है,,,,,,,
8 मोहर्रम को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने क़ासिद के हाथ खत भेजा कूफे में अपने बचपन के साथी हज़रत हबीब अलैहिस्सलाम को क़ासिद खत ले कर कूफा पहोंचा हज़रत हबीब अलैहिस्सलाम के घर का दरवाज़ा खटखटाया आप खाना के लिए पहला निवाला उठाया ही था की दरवाज़े की आवाज़ पर आप बोले कौन जवाब आया मैं हुसैन अलैहिस्सलाम का क़ासिद आप भागते हुवे गए क़ासिद का माथा चूमा खत लिया और जल्दी से खोला खोलते ही ज़ारो कतार रोने लगे बीवी ने पूछा क्या हुआ??? कहते हैं नाम में हुसैन इब्ने फातिमा लिखा है खैर हो।
इमाम का खत पढ़ा उसमे इमाम ने लिखा था हबीब अगर आना चाहते हो तो कर्बला अजावो मैं अपने बहेन बेटियों बच्चो के साथ हूं और आशूर के बाद तुम कभी मेरी जियारत ना कर पाओगे😥
हबीब रोने लगे और बीवी की तरफ देखा और सोचा इसके दिल में क्या है जान लूं,,,,,
बीवी से कहने लगे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने बुलाया है बीवी ने कहा जाओ आपने फ़रमाया अगर मैं गया तो तुम बेवा और बच्चे यतीम हो जाएंगे।
बीवी ने कहा कैसे हो आप आप को बीबी ज़हरा के लाल बुला रहे हैं और तुम बहाने ढूंढ़ रहे हो🙄
हज़रत हबीब ने फरमाया मैं सिर्फ तुम्हारा इम्तेहान ले रहा था???
आप घर से निकले कर्बला के लिए दूर से ही इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने जब देखा की हज़रत हबीब इब्ने मज़ाहिर अलैहिस्सलाम आ रहे हैं आपने सब को इस्तकबाल के लिए बुलाया आप आए और इमाम पाक का हाथ चूमे कदमो को चूमा और नारा ए तकबीर की सदा बुलंद की जब ये शोर खेमे में पाक बीबी जैनब ए आलिया सलामुल्लह अलैह को सुनाई दी आप ने हज़रत फिज्जा स० अ० से फरमाया ये शोर कैसा क्या जंग शुरू हो गई???
आपने फरमाया पाक बीबी इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बचपन के दोस्त हबीब इब्ने मज़ाहिर आए हैं।
बीबी जैनब ए आलिया सलामुल्लाह अलैह ने फरमाया मेरा सलाम हबीब तक पहोंचाओ हबीब अलैहिस्सलाम को बताया गया की बीबी जैनब सलमुल्लह अलैह ने आप तक सलाम पहोचाया ये सुनते ही हज़रत हबीब अलैहिस्सलाम अपने सर से अमामा उतार कर बालों को खोल कर बेतहाशा रोने लगे😭😭😭😭😭
और कहने लगे हाये ये कैसा वक़्त आगाया आले मोहम्मद पर आप आका जादिया गुलामों पर सलाम भेज रही हैं😭😭😭😭😭
हाय क्या मवद्दत थी हज़रत हबीब अलैहिस्सलाम को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के घराने से