EID E GHADEER

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BOOK ONGhadir-declaration

तारीख 18 जिल्हिज्जा नबी करीम सल्ल0 अपने आखरी और पहले (हज)हज्जतुल विदा से वापिस मदीना आ रहें है की खुम नामक गाँव के करीब पहुचते है आयात नाजिल हो जाती है = بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

يَا أَيُّهَا الرَّسُولُ بَلِّغْ مَا أُنْزِلَ إِلَيْكَ مِنْ رَبِّكَ ۖ وَإِنْ لَمْ تَفْعَلْ فَمَا بَلَّغْتَ رِسَالَتَهُ ۚ وَاللَّهُ يَعْصِمُكَ مِنَ النَّاسِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْكَافِرِينَ

ऐ पैग़म्बर आप इस हुक्म को पहुंचा दें जो आपके परवरदिगार की तरफ़ से नाज़िल किया गया है और अगर आपने ये न किया तो गोया उसके पैग़ाम को नहीं पहुंचाया और ख़ु़दा आपको लोगांे के शर से महफ़ूज़ रखेगा कि बेशक अल्लाह काफ़िरों की हिदायत नहीं करता है
Surah 5 Ayat No 67

आयत के नुजूल के बाद आप सल्ल0 ठहर जाते है आगे निकल गए अशहाब को बुलाते है पीछे वालो का इन्तेजार करते है जब तमाम अशहाब इकट्ठे हो जाते है तब आप सल्ल0 उनके ऊँठो पर लदे सामान के पिलान उतरवाते है और एक मिम्बर बनाते है आप ने उस उस शख्स का पिलान उतरवाया जिसे आप जानते थे ये ऐलान सुनना नही चाहता और अपने सामान के जरिये रुका रहे
.
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. Note (1)
.आखिर कौन सा ऐसा काम होना है जिसके लिए अल्लाह कह रहा है अगर आज ये ना पहुचाया तो
कार ए रिसालात (रिसालात का काम)अंजाम ही ना दिया
आइये आगे बढ़ते है

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फिर आप रसूलुल्लाह सल्ल0 मिम्बर पे चढ़े खुदा ए तआला की हम्द ओ सना की आपने एक ताबिल खुतबा दिया फरमाया ए लोगो मैं अल्लाह का बन्दा हूं अल्लाह ने मुझे अपना रसूल बना कर भेजा
Qull’o Nafs’an Jaykat’Al Mout हर जानदार शै मौत का मज़ा चखेगा
करीब है अल्लाह का क़ासिद (मौत का फरिश्ता)आये और मैं उसकी दावत को लब्बैक कहदूँ

Note (2)
आप सल्ल0 के इस आखरी खुतबा से वहाबिया का एतराज़ भी खत्म होता है जो बो लोग इल्म ए ग़ैब का इनकार करते है वो देखे बुखारी मुस्लिम से रसूलल्लाह सल्ल0 को अपनी मौत का इल्म था

इससे पहले मैं तुम्हारे दरमियान दो भारी चीजे छोड़े जा रहा हूँ जिसको मजबूती से थामे रहे क़यामत तक गुमराह ना होंगे Qitab’Allahi Wa Ahl-Al Bait’i itrat’i
पहली क़ुरान है अल्लाह की किताब इसमे हिदायत है नूर है ये आसमान से जमीं तक लटकी हुई रस्सी है इसको मजबूती से थामे रहो
दूसरी मेरे अहले बैत है मैं अपने अहले बैत के बारे में अल्लाह का ख़ौफ़ दिलाता हूं और यहीं अल्फ़ाज़ आप सल्ल0 ने तीन मर्तबा कहे (सही मुस्लिम 6225

फिर आप सल्ल0 ने कहा
एना एना अली इब्न अबी तालिब अबू तालिब के बेटे अली कहाँ हो अमीर की आवाज़ आयी फिदाका अबी उम्मी लब्बैक या रसूलल्लाह
हाजिर हूं या रसूल अल्लाह रसूलुल्लाह सल्ल0 ने मिम्बर पे बुलाया और कहाँ ए लोगो मै तुम्हारी जानो का वली हूं
तमाम असहाब ने कहाँ Wraa Kaan’O Ya Rasool’Allah बेशक आप हमारी जान ओ माल के वली है
फिर आप सल्ल0 ने गवाही लेने के बाद फरमाया
मन कुंतो मौला फ़ा हाज़ा अलिय्यून मौला मैं जिस जिस का मौला अली भी उसका मौला नबी करीम सल्ल0 तमाम जिन्न ओ बशर अल्लाह की हर मख़लूख के मौला है तो अली अलैहिस्सलान भी सबके मौला हुए
इस बात पर इज्मा ए उम्मत है कि हमारे नबी करीम सल्ल0 सैय्यदुल अम्बिया है इमामुल अम्बिया तमाम अम्बिया अलैहिमुस्सलाम के मौला है तो अमीर ए क़ायनात अली इब्न अबी तालिब भी तमाम अम्बिया अलैहिमुस्सलाम के मौला हुए
जब आप सल्ल0 इन ताबिल खुतबात से फारिग हुए नमाज़ ए अस्र अदा की और मदीने की जानिब चल दिए
फिर आयते करीमा का नुजूल हो गया
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

ۚ الْيَوْمَ أَكْمَلْتُ لَكُمْ دِينَكُمْ وَأَتْمَمْتُ عَلَيْكُمْ نِعْمَتِي وَرَضِيتُ لَكُمُ الْإِسْلَامَ دِينًا ۚ فَمَنِ اضْطُرَّ فِي مَخْمَصَةٍ غَيْرَ مُتَجَانِفٍ لِإِثْمٍ ۙ فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَحِيمٌ

आज मैंने तुम्हारे दीन को कामिल कर दिया है और तुम पर अपनी नेअमतों को तमाम कर दिया और तुम्हारे लिए दीने इस्लाम को पसन्द कर लिया है
Surah Maiyda 5 /3

(Comment)
तो मोमनीन पता चला वो अली की विलायत थी जिसके लिए अल्लाह अपने हबीब को बोल रहा था ए हबीब पहुँचा दे जो तुझ पर हमारी जानिब से नाजिल हुआ है गोया ऐसा ना किया तो कार ए रिसालात मनसब ए रिसालात को अंजाम ही ना दिया देखे मोमनीन कितनी अहम है विलायते अमीर उल मोमिनीन जिसके ऐलान के बाद अल्लाह ने नेअमत तमाम कर दी और दीन मुकम्मल का आग़ाह भी कर दिया क़ुरान की आयात तफासिर से साबित होता है विलायते अमीर उल मोमिनीन अली इब्न अबी तालिब के बगैर दीन मुकम्मल ही नही जबकि रोज़ा नमाज़ हज जकात औरतो पर पर्दा सारे मामलात 8 हिजरी तक मुकम्मल हो चुके थे
.
.#पड़ोएमुसलमानो_अलिय्यूनवलीउल्लाह
#बेशकयहीबुनियादएलाइलाहाहै

.#नामुआफ़कियाअल्लाहनेआदमसफीउल्लाहकेमुन्किर_को
#कैसेमुआफ़करेगामुन्किरए_अलिय्यूनवलीउल्लाहको

यहां पर ग़दीर ए खुम मुकम्मल हो जाती है मुझ तालिब ए इल्म की नजर में वर्ना ये मुख्तसर है
ग़दीर का खुतबा बहुत लंबा है …..

विलायते अमीरुल मोमिनीन के मुताल्लिक क़ुरानी आयात और अहले सुन्नत कुतुब की चंद अहादीस और मुहद्दिसीन के अक़वाल
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( मैं जिस जिस का वली अली भी उसका वली)
“रसूलुल्लाह सल्ल0

हज़रत अम्मार इब्ने यासिर रदिअल्लाहु अन्ह अरजा से रिवायत है आं हज़रत सल्ल0 ने फरमाया
जहां तौहीद ओ रिसालात की तस्दीक करो वहां वहां मेरे भाई अली की विलायत तस्दीक करो (सही मुस्लिम जिल्द 3 सफा 96….108

हजरत ए अबु दरदा रदिअल्लाहु अन्ह अरजा से रिवायत है रसूलल्लाह सल्ल0 ने फरमाया
ए लोगो अली की विलायत सफीना ए नजात है
कहीं तुम भी मुकर ना जाना जैसे मूसा के बाद हारून का इन्कार किया था कौम ने और बो हमेशा बर्बाद रहें
(खसाएसे अली जिल्द 2 सफा 156
इमाम नसाई

साबित बिन क़ैस रदिअल्लाहु अन्ह अरजा से रिवायत है रसूलल्लाह सल्ल0 ने फरमाया
मैं इस फानी दुनिया को अनक़रीब अलविदा कहूंगा साबित बिन क़ैस ने अर्ज़ किया या रसूलुल्लाह सल्ल0 हम आपके बाद किसके सहारे रहेंगे तब आप सल्ल0 ने फरमाया मैं तुम्हारे दरमियान अली को हुज्जत छोड़े जा रहा हूँ
उसकी इत्तेबाअ करना विलायत की पैरवी करना अनक़रीब फिर तुम्हारा विलायते अली इब्ने अबी तालिब पर इम्तेहान होगा
तारिख ए दमिश्क जिल्द 1 सफा 119

इमाम शमशुद्दीन अज ज़हबी
अपनी तस्नीफ
(अज़ पैग़ाम शरीयत ए मुहम्मदी)
के जिल्द 2 सफा 266 पर तहरीर फरमाते है अली अलै0 की विलायत उम्मत ए मुहम्मदिया पर ऐसे ही वाजिब है जैसे तौहीद ओ रिसालात है

इमाम अलाउद्दीन अली मिश्री अल मुतवफ्फा 850 हिजरी
अपनी तस्नीफ
हयात उल कुलूब में तहरीर फरमाते है इमाम जाद बिन अली से नकल करते है कि अफजल उल ताबेईन हजरत उबैश करनी रदिअल्लाहु अन्ह अरजा कहते है
हम रसूलल्लाह की वसीयत वा मुजीब विलायते अली इब्न अबी तालिब पर कायम ओ दायम रहें हम हक़ सुब्हानहु से इसका अज्र रोज़ ए महशर लेंगे
हयात उल कुलुब जिल्द 2 सफा 298

और अल्लाह भी क़ुरान में भी तीन विलायत का जिक्र कर रहा है
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

إِنَّمَا وَلِيُّكُمُ اللَّهُ وَرَسُولُهُ وَالَّذِينَ آمَنُوا الَّذِينَ يُقِيمُونَ الصَّلَاةَ وَيُؤْتُونَ الزَّكَاةَ وَهُمْ رَاكِعُونَ

ईमान वालों बस तुम्हारा वली अल्लाह है और उसका रसूल (स0) और वह साहेबाने ईमान जो नमाज़ क़ायम करते हैं और हालते रूकुअ में ज़कात देते हैं
(Surah 5 Ayat No 55)

साबित हुआ जहां जहां तौहीद और रिसालात की गवाही दी जाएगी वहां वहां वा हुक्म ए इलाही और अहादीस ए रसूल के तहत अमीरुल मोमिनीन अली इब्न अबी तालिब की गवाही दी जाएगी

वाजेह करता चलू जब हम जहां भी
अशहदु अल ला इलाहा इल्लल्लाहो वहदहु ला शरीक लह वा अशहदो’अन ना मुहम्मदुर्रसुलल्लाह पड़ेंगे वहां वहां हम को अलिय्यूनवलीउल्लाह पड़ना पड़ेगा तब हम वाक़ई दर हकीकत मोमिन बनेगे और सही इस्लाम पर साबित कदम उतरेंगे: वमा अलैना इल्लल बलाग

 

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SUNNI Reference:

hadith ref:Ibn ‘Abbas (in his Tafsir, on the margin of ad-Durru ‘l-manthur, vol. 5, p. 355);

al-Kalbi (as quoted in at-Tafsiru ‘l-kabir of ar-Razi, vol. 29. p.227;

al-Alusi, Ruhu ‘l-ma’ani, vol. 27, p. 178); al-Farra’, (ar-Razi, ibid.; al-Alusi, ibid.);

Abu ‘Ubaydah Mu’ammar ibn Muthanna alBasri (ar-Razi, ibid.; and ash-Sharif al-Jurjani, Sharhu ‘l-mawaqif, vol. 3, p. 271);

al- Akhfash al-Awsat (in Nihayatu ‘l-‘uqul);

al-Bukhari (in as-Sahih, vol.7, p. 240);

Ibn Qutaybah (in al Qurtayn, vol.2, p.164);

Abu’l-‘Abbas Tha’lab (in Sharhu ‘s-sab’ah al-mu’allaqah of az-Zuzani);

at-Tabari (in his Tafsir, vol.9, p. 117);

al-Wahidi (in al-Wasit); ath-Tha’labi (in al-Kashf wa ‘l-bayan);

az-Zamakhshari (in al-Kashshaf, vol. 2, p. 435); al-Baydawi (in his Tafsir, vol.2, p. 497);

an-Nasafi (in his Tafsir, vol. 4, p. 229); al-Khazin al-Baghdadi (in his Tafsir vol. 4, p. 229);

and Muhibbu’d-Din Afandi (in his Tanzilu ‘l-ayat)

 

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हदीसे ग़दीर के रावी सहाबा में से।
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सहाबा की कसीर तादाद ने हदीसे ग़दीर को नक़्ल किया है, अब हम यहाँ पर अल्फ़ा बेड के लिहाज़ से उन असहाब के असमा की फ़ेहरिस्त बयान करते हैं, लेकिन सबसे पहले तबर्रुकन असहाबे किसा के असमा को नक़्ल करते हैं :

1. हज़रत अमीर अल मोमीनीन अली इब्ने अबी तालिब अलैहिस्सलाम

2. सिद्दीक़ ए ताहिरा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा

3. हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम

4. हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम

अलिफ़

5. अबू बक्र बिन अबी क़ुहाफ़ ए तमीमी

6. अबू ज़वीब ख़ुवैलद

7. अबी राफ़ए क़ुतबी

8. अबू ज़ैनब बिन औफ़े अंसारी

9. अबू अम्रा बिन अम्र बिन महसने अंसारी

10. अबू फ़ज़ालए अंसारी, जो जंगे बद्र में भी शरीक थे और जंगे सिफ़्फ़ीन में भी हज़रत अली अलैहिस्सलाम की रकाब में शहीद हुये हैं।

11. अबू क़ुदामा अंसारी

12. अबी लैला अंसारी, बाज़ नक़्लों के मुताबिक़ ये जंगे सिफ़्फ़ीन में शहीद हुये।

13. अबू हुरैर ए दूसी

14. अबुल हैसम बिन तैहान, जो जंगे सिफ़्फ़ीन में शहादत के दर्जे पर फ़ाएज़ हुये।

15. ओबई बिन कअबे अंसारी ख़ज़रजी, बुज़ुर्ग क़ुर्रा

16. उसामा बिन ज़ैद बिन हारिसे कल्बी

17. असअद बिन ज़ोरार ए अंसारी

18. असमा बिन्ते उमैस ख़सअमिया

19. उम्मे सलमा, ज़ौज ए रसूले अकरम (स)

20. उम्मे हानी, बिन्ते अबूतालिब अलैहिस्सलाम

21. अनस बिन मालिके अंसारी ख़ज़रजी, ख़ादिमे पैग़म्बर (स)

22. बराअ बिन आज़िबे अंसारी औसी

23. बरीदा बिन आज़िबे औसी अंसारी से

24. साबित बिन वदीअ ए अंसारी, अबू सईद ख़ज़रजी मदनी

जीम

25. जाबिर बिन समुरा बिन जुनादा, अबू सुलैमाने सुवाई

26. जाबिर बिन अब्दुल्लाहे अंसारी

27. जबला बिन अम्रे अंसारी

28. जबीर बिन मुतअम बिन अदी क़रशी नौफ़ली

29. जरीर बिन अब्दुल्लाहे बिजिल्ली

30. जुन्दब बिन जुनाद ए ग़फ़्फ़ारी अबूज़र

31. जुन्दब बिन अम्र बिन माज़ने अंसारी, अबू जुनैदा

हे

32. हुब्बा बिन जवीन, अबू क़ुदाम ए उरफ़ी बजली

33. हुब्शी बिन जुनादा सलूली

34. हबीब बिन बुदैल बिन वरक़ा ए ख़ुज़ाई

35. हुज़ैफा बिन उसैद, अबू सरीयहे ग़फ़्फ़ारी, मौसूफ़ का शुमार असहाबे शजरा में होता है।

36. हुज़ैफ़ा बिन यमान यमनी

37. हस्सान बिन साबित

खे़

38. ख़ालिद बिन ज़ैद, अबू अय्यूब अंसारी, मौसूफ़ रूम के साथ होने वाली जंग में शहीद हुए।

39. ख़ालिद बिन वलीद बिन मुग़िर ए मख़्ज़ूमी, अबू सुलेमान

40. खज़ीमा बिन साबिते अंसारी ज़ुश शहादतैन, जो जंगे सिफ़्फ़ीन में शहीद हुए।

41. ख़ुवैलद बिन अम्रे ख़ुज़ाई, अबू शरीह

रे, ज़े

42. रुफ़ाआ बिन अब्दुल मुन्ज़िरे अंसारी

43. ज़ुबैर बिन अवाम क़रशी

44. ज़ैद बिन अरक़मे अंसारी खज़री

45. ज़ैद बिन साबित अबू सईद

46. ज़ैद या यज़ीद बिन शराहिले अंसारी

47. ज़ैद बिन अब्दुल्लाहे अंसारी

सीन

48. साद बिन अबी बक़ास, अबू इस्हाक़

49. साद बिन जुनाद ए औफ़ी, पिदरे अतिया औफ़ी

50. साद बिन उबाद ए अंसारी, ख़ज़रजी

51. साद बिन मालिके अंसारी, अबू सईदे खिदरी

52. सईद बिन जै़द क़रशी अदबी, यह अशर ए मुबश्शेरा में से हैं।

53. सईदे बिन साद बिन उबाद ए अंसारी

54. सलमाने फ़ारसी, अबू अब्दुल्लाह

55. सलमा बिन अम्र बिन अल अकू असलम, अबू मुस्लिम

56. समुरा बिन जुन्दब फ़ज़ाज़ी, अबू सुलेमान

57. सहल बिन हुनैफ़ अंसारी, ओसी

58. सहल बिन साद अंसारी, खज़रजी, सायेदी, अबुल अब्बास

साद ज़ाद

59. सुदैय बिन अजलाने बाहुली, अबू अमामा

60. ज़ुमैर ए असदी

तो

61. तलहा बिन अब्दुल्लाहे तैमी

अऐन

62. आमिर बिन उमैरे नमीरी

63. आमिर बिन लैला बिन हमज़ा

64. आमिर बिन लैला ग़फ़्फ़ारी

65. आमिर बिन वासेल ए लैसी

66. आयशा बिन्ते अबी बक्र

67. अब्बास बिन अब्दुल मलिक बिन हाशिम, पैगम़्बर (स) के चचा

68. अब्दुर्रहमान बिन अब्दुर रब अंसारी

69. अब्दुर्रहमान बिन औफ़ करशी, ज़ोहरी, अबू मुहम्मद

70. अब्दुर्रहमान बिन यामुर दैली

71. अब्दुल्लाह बिन अब्दुल असद मख़्ज़ूमी

72. अब्दुल्लाह बिन बुदैल बिन वरक़ा

73. अब्दुल्लाह बिन बशीर माज़नी

74. अब्दुल्लाह बिन साबिते अंसारी

75. अब्दुल्लाह बिन जाफ़र बिन अबी तालिब हाशिमी

76. अब्दुल्लाह बिन हंतब करशी, मख़्ज़ूमी

77. अब्दुल्लाह बिन रबीआ

78. अब्दुल्लाह बिन अब्बास

79. अब्दुल्लाह बिन अबी औफ़ा बिन अलक़मा असलमी

80. अब्दुल्लाह बिन उमर बिन ख़त्ताब अदबी, अबू अब्दुर्रहमान

81. अब्दुल्लाह बिन मसऊदे हुज़ली

82. अब्दुल्लाह बिन यामील

83. उस्मान बिन अफ़्फ़ान

84. उबैद बिन आज़िब अंसारी

85. अदी बिन हातिम अबू तरीफ़

86. अतिया बिन बसर माज़नी

87. उक़बा बिन आमिर जोहनी

88. अम्मार बिन यासिर अनसी, अबुल यक़ज़ान

89. अमारये ख़ज़री अंसारी

90. उमर बिन अबी सलमा बिन अब्दिल असद मख़्ज़ूमी

91. उमर बिन ख़त्ताब

मख़्फ़ी न रहे कि हज़रत उमर की हदीस को हाफ़िज़ बिन मग़ाज़ेली ने किताबुल मनाक़िब में दो तरीक़े से और मुहिब्बुद दीन तबरी ने अर रियाज़ुन नज़रा और ज़ख़ायरुल उक़बा में मुसनदे अहमद से नक़्ल किया है, नीज़ इब्ने कसीर दमिश्क़ी व शमसुद्दीन जज़री ने हज़रत उमर को हदीसे ग़दीर के रावियों में शुमार किया है।

() मनाक़िबे अली बिन अबी (अ) पेज 22 हदीस 31

() अर रियाज़ुर नज़रा जिल्द 3 पेज 113

() ज़ख़ायरुल उक़बा पेज 67

() अल बिदायह वन निहायह जिल्द 7 पेज 386, असनल मतालिब पेज 48

92. इमरान बिन हसीन ख़ज़ाई, अबू नहीद

93. अम्र बिन हुम्क़े खज़ाई, कूफ़ी

94. अम्र बिन शराजील

95. अम्र बिन आस

96. अम्र बिन मर्रा जोहनी, अबू तलहा

फ़े

97. फ़ातेमा बिन्ते हमज़ा बिन अब्दुल मुत्तलिब

क़ाफ़ व काफ़

98. क़ैस बिन साबित शम्मास अंसारी

99. क़ैस बिन साद बिन उबाद ए अंसारी

100. कअब बिन अजर ए अंसारी

मीम

101. मालिक बिन हवीरस लैसी, अबू सुलैमान

102. मिक़दाद बिन अम्र कंदी

नून

103. नाजिया बिन अम्र बिन ख़ुज़ाई

104. नुज़ला बिन उबैया असलमी, अबू बरज़ा

105. नोमान बिन अजलान अंसारी

हे व या

106. हाशिम बिन मिरक़ाल बिन अतबा बिन अबी वक़ास ज़ोहरी, मदनी

107. वहन्शी बिन हर्ब हबशी, हिमसी, अबू वसमा

108. वहब बिन हमज़ा

109. वहब बिन अब्दुल्लाह सवाई, अबू जुहैफ़ा

110. याली बिन मर्रा बिन वहब सक़फ़ी, अबू मुराज़िम

कारेईने केराम, यह थे एक सौ दस बुज़ुर्ग सहाबी ए रसूल, जिनके असमा ए गेरामी हम ने बयान किये हैं, यक़ीनी तौर पर उससे ज़्यादा अफ़राद ने इस हदीसे ग़दीर को नक़्ल किया है, क्यो कि तारिख़ के मुताबिक़ सर ज़मीने ख़ुम में एक लाख से भी ज़्यादा सहाबी और हाजी हाज़िर थे, लिहाज़ा हालात के पेशे नज़र इस हदीस के रावी इससे कहीं ज़्यादा हैं, लेकिन अहले सुन्नत की किताबों की छान बीन करने से यह तादाद मिलती है।

हाफ़िज़ सजिसतानी (मुतवफ़्फ़ा 477) ने किताब अद दिराया फ़ी हदीसिल विलाया को 17 जिल्दों में तालिफ़ की है, जिसमें हदीसे ग़दीरे के तरीक़ों को ज़िक्र किया है, चुनाँचे मौसूफ़ ने इस हदीस को एक सौ बीस सहाबा से नक़्ल किया है। (अल मनाक़िब इब्ने शहर आशूब जिल्द 3 पेज 34)

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❤Eid e Ghadeer Elaan e wilayat e Maula Ali Ul Murtuza Alehissalaaam❤

Kaun hain hamare Ali?

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Aadam Alaihissalam ki takhleeq se 14 hazaar saal pehle Mai aur Ali Allah ki Bargah me Ek Noor they.”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Ali ko Meri Mitti se banaya gaya.”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Mai aur Ali Ek He Nasab se Hain!”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Mai aur Ali Ek He Darakht se Paida Hue Hain! (yaani Ek He Shajra, Ek He Nasab)”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Ali ka Gosh Mera Gosh hai aur Ali ka Khoon Mera Khoon hai.”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Ali Mujhse hai aur Mai Ali se Hun.”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Ali Mere liye aise hai jaise Harun Alaihissalam Musa Alaihissalam keliye.”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Mai Ilm ka Shehar hun Ali Uska Darwaza hai, jisko is Shehar me aana ho wo darwaze se aaye.”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Jiska Mai Maula Hun uska Ali Maula Hai.”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Tum dono jahan me Mere Bhai ho.”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Ali Mere Jaisa Hai (ka Nafsi)”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Ali Mere liye aise hai Jaise Mera Sar Mere Jism keliye!”

Ali wo Jiske liye RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Ay Allah! Jo Ali se Muhabbat karey Tu usse Muhabbat kar aur jo Is se bugz rakhe Tu us se bugz rakh.”

Ab bhi aankh khuli ya aur batayen “Kaun Hain hamare Maula Ali?”

Alaihim Afdalus Salawatu was Salaam

1. Imam Ahmad ibn Hanbal, al-Fada’il al-sahaba, vol.2, pg.663 H#1130 from Abdur-Razzak, from Mu’amar, from al-Zuhri, from Khalid ibn Mu’dan, from Zadan, from Salman al-Farsi. (RadiAllahu Anhum)
Imam-al Tabari, al Riyad al Nadirah, vol.2, pg.163- 164 and vol.3 pg.154
Mustadrak al-Hakim, vol.2 pg.609
Imam-al Jawzi in Tadhkirat Al-ashy khawass, pg.46
Musnad al-Firdaus, H#4176 (its mentions 4000 years instead of 14000 years)
Tarikh Damishq ibn Asakir, Vol.3, Pg.154
Imam Dhahabi Mizan al-itidal, vol.1 pg.235
Imam al-Razi in Zayn al Fata fi tafsir Surat Hal ata
Imam Ahmad ibn Hanbal in Zawaid manaqib Amir al Muminin, manuscript.
This tradition has also been narrated by also Ibn Mardawayh, Ibn Abd al Barr, al Khatib al Baghdadi, Ibn al Maghazili, al-Asimi, Shiruyah al Daylami and others from Imam Ali Alaihissalam, Hazrat Salman , Abu Dharr , Anas ibn Malik, Jabir ibn Abd Allah and other companions (RadiAllahu Anhum Ajmaeen) Musnad Ahmad bin Hanbal, vol.4 pg.66

2. Tabrani, Mujam al Awsat, 6/162,163 #6085
Haysami, Majma uz Zawaid, 9/168

3. Imam Alusi in Tafsir Ruh al-Ma’ani, Vol.6 pg.186
Imam Tabarani in Mujam al awsat, vol.3

4. Tirmidhi, vol.13 pg.178
Mujam al awsat Tabarani, vol.3
Manaqib al-Maghazili, pg.122
Asad Al-Ghaba ibn Atheer, vol.4 pg.26
Riyadh Al-Nadhira Tabari, vol.2 pg.216
Manaqib Khawarizmi, ch.14, pg.87

5. Tabrani Mujam al Kabir, 12/18, #12341
Haysami, Majma uz Zawaid, 9/111

6. Sahih Bukhari (Baab)
Tirmizi, Jaame al Sahih, 5/632, #3712
Ibne Hibban, Sahih, 15/373, #6929
Hakim, Mustadrak, 3/119, #4579
Nasayi, Sunan al Kubra, 5/132, #8484
Ibne Abi Shaibah, Musannaf, 6/372,373, #32121
Abu Ya’ala, Musnad, 1/293, #355
Tabrani, Mujam al Kabir, 18/128, #265

7. Sahih Bukhari, 4/1602, #4154
Sahih Muslim, 4/1870, 1871, #2404

8. Tirmzi, Jaame as Sahih
Hakim, Mustadrak

9. Ye Hadees-e-Pak 150 se zyada alag alag sanado se riwayat hui hai hamari Ahle Sunnat ki kitabo me. Batao kitne refence chahiye.

10. Tirmizi, Jaame as Sahih, 5/636, #3720
Hakim, Mustadrak, 3/15, #4288

11. Sunan al-kubra Nasai, vol.7 #8403
Fazail e sahaba Ahmad, vol.2 #966
Khasais e Ali Nasai, pg.63 #71
Musnad ibn abi Shaybah, vol.6 #32077

12. Mustadrak Hakim, vol.3 pg.141
Al-Jami Suyuti, vol.1 pg.583
Sawaiq al-muharriqa Haythami, pg.125
Tarikh Baghdad Al-Baghdadi, vol.1 pg.51
Hilyat ul-Awliya Asfahani, vol.1 pg.182
Al-Riyadh Al-Nadihra Tabari, vol.2 pg.219
Manaqib, Khawarizmi, ch.14, pg.91

13. Tabrani, Mujam al Kabir, 2/357, #6505
Haysami, Majma uz Zawaid, 9/106
Hisamuddin Hindi, Kanzul Ummal, 13/138,139, #36437
Ibne Asakir, Tarikh e Damishq al Kabir, 45/179

Allahumma Salle Ala Sayyedina wa Maulana Muhammad wa Ala Sayyedina Aliyyuw wa Sayyedatina Fatimah wa Sayyedatina Zainab wa Sayyedina Hasan wa Sayyedina Hussain wa Ala Aalihi wa Sahbihi wa Baarik wa Sallim.

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ईद ए ग़दीर, साहिब ए ईमान मुस्लमान की सबसे बड़ी ईद।
वैसे तो ग़दीर को लोग इस वजह से पहचानते है क्योंकि इस दिन रसूल ए खुदा स अ ने मौला अली की विलायत का एलान किया था, ग़दीर का वाक़या सबको पता है।
ईद ए ग़दीर के दिन मौला अली को विलायत के एलान के साथ साथ दीन ए हक़, दीन ए खुदा भी मुकम्मल हुआ, क्योंकि जबतक विलायत ए अली का एलान न हो जाए इस्लाम मुकम्मल नही होता, अल्लाह ने क़ुरान में रसूल अल्लाह से बहुत से आमाल अंजाम देने का हुक्म दिया है और रसूल अल्लाह ने हुक्म ए खुदा के मुताबिक हर वो अम्ल अंजाम दिया है जिसका हुक्म उन्हें मिला, लेकिन रसूल अल्लाह के आखरी हज में अल्लाह ने रसूल अल्लाह को जो हुक्म दिया, उस हुक्म देने का अंदाज़ से ही पता चलता है की मौला अली की विलायत किनती ज़रूरी है। अगर रसूल अल्लाह एलान ए विलायत ना करे तो उनकी रिसालत खतरे में आ जाती है, अगर रसूल ए खुदा एलान ए विलायत न करे तो दीन ए खुदा मुकम्मल नही होता, बेशक हमारे लिए ईद ए ग़दीर से बड़ी ख़ुशी कुछ नही है।
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ये जानता है की मैंने जो रसूल से कह दिया बेशक रसूल मेरे हुक्म को जामा ए अम्ल देंगे, हमेशा रसूल अल्लाह ने हर हुक्म ए खुदा को माना है, लेकिन उसके बाद भी अल्लाह का ये लहजा, ये अल्फ़ाज़ की अए रसूल अगर तुमने ये काम नही किआ तो गोया रिसालत का कोई भी काम अंजाम नही दिया, ये लहजा और अलफ़ाज़ अल्लाह ने रसूल अल्लाह से कहकर हमे ये बताया है को इब्लीस की तरह सारी उम्र अगर सजदे में पड़े रहो, और रसूल अल्लाह का जानशीन, खलीफा, और इमाम बिना किसी फासले के अगर मौला अली को नही माना तो हश्र भी तुम्हारा इब्लीस के साथ होगा। आज इस दुनिया में मुसलमानो को ये तक नही पता की ग़दीर है क्या, क्योंकि लोगो ने अपना दीन मोलवीओ से सुनकर लिआ है, और बुग़ज़ ए अली में किसी भी मुल्ला ने मंज़िलते अली बया नही किआ, और इसी वजह से ग़दीर उन्हें पता ही नही। आज इस दुनिया में लोग गुमराही की तरफ इस लिए बढ़ रहे है क्योंकि उन्होंने मौला अली को छोड़ क्र ऐरो गैरो को अपना रहबर मान लिया, जबकि रसूल अल्लाह की साफ़ हदीस है की अगर सारी दुनिया एक तरफ जा रही है और अली दूसरी तरफ जा रहे है तो तुम अली के साथ जाओ, क्योंकि हक़ सिर्फ और सिर्फ अली के साथ है। अब पता ये चलता है की जिसने भी मौला अली को छोड़कर किसी को भी अपना इमाम
माना तो वो मुनकिर ए रसूल व मुनकिर ए खुदा यानि मुनाफ़िक़ हुआ, उसका ईमान अधूरा
तमाम पर ईमान रखने वालो के किदमत में ईद ए ग़दीर की पुरखुलूस मोबारकबाद।
ईद ए ग़दीर तीन बड़ी वजहों की वजह से सबसे बड़ी ईद है।
दीन ए खुदा मुकम्मल होने का दिन,
रसूल अल्लाह की रिसालत बचने का दिन,
मौला अली की विलायत के एलान का दिन।

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Hijrat, Ghadeer, Science

Har saal 2 din day & night exact length ke hote hain, un dono dino ko Equinox kehte hain, ye photo Equinox ki hai.
Youm-e-Ghadeer wo Din hai jab Tajdar-e-Kainat SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne hazaron Sahaba-e-Ikram ke Majme me Makka aur Madina ke bich ek Muqaam hai Ghadeer-e-Khum naam ka, waha Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne Hazrat Ali Alaihissalam ko Puri Ummat ka Maula banaya. Is Hadees ke ek do nahi balke 153 Sanad hain, jo bhi is Hadees ko manne se inkar kare wo usi lamhe kafir hojata hai, itni puckhta Sanad ki Hadees hai.
To ye Azeem Waqiya 18 Zilhajj 10 Hijri ko hua jo English calendar ke hisab se 21 banta hai. 21 march ki din ke kareeb he eqinox hota hai. Equinox yaani basically wo din jisme purey earth pe din aur raat equal hon yaani perfectly balanced day aur night. Equinox saal me 2 baar hota hai, 20,21 March ke around aur 22, 23 ya 24 September ke around hota hai. Ye dates orbital mechanics ki wajah se is tarah aage piche hoti rehi hain. Is saal ka pehla equinox 21 March ko hua tha.

Saal ke ye 2 “perfectly balanced” din Islam me bahot he zyada important din hain. 24 September wo din tha jab RasoolAllah SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam Makka se Hijrat farmakar Madina tashreef laaye, jiske natija aap sabko pata hai ke global revolution ki shuruaat hogayi! Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ki Hijrat ne duniya ke progress ke raaste pe daal diya.
Aur dusra azeem event 21 March ko hua jab Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne Apne Azeem Revolution ki continuation keliye is revolutionary system ke nigahbaani keliye Sayyeduna Maula Ali Alaihissalam ko ummat ka Maula banaya! Ab Maula Ali Alaihissalam Islam ki Roohani system ke nigehbaan hain. Ye waqiya jis din hua, wo bhi equinox tha 21 march! Aur ittefaq bhi dekhiye jab Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne Hazrat Ali Alaihissalam ko sabka Maula banaya to sabse pehle Hazat Abu Bakr Siddiq aur Hazrat Umar-e-Farooq RadiAllahu Anhuma Maula Ali Alaihissalam ke paas aaye, Unhe Mubarkbaad pesh ki aur Hazrat Umar ne farmaya: “Ay Ali! Mubarak ho aajse Aap HAR DIN AUR RAAT keliye sabke Maula banadiye gaye!”
Us din, din aur raat exactly equal lenght ke they aur usi din Hazrat Farooq-e-Aazam RadiAllahu Anhu ka ye farmana! ye coincidence nahi balke Allah Ta’ala ne Unki Zubaan par ye alfaz jaari kiye!

Ye earth ka real photo hai is saal ke pehle equinox ka jisko GOES-16 satellite ne 36000 km dur se liya. Dekho kaise day aur night sides divide hue hain.

 

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ईदे ग़दीर मुबारक हो।
हज़ पर मक्का से मदीना जब वापसी का सफर था तो खुमे ग़दीर यांनी एक तालाब मीठे पानी का और दरख्तों के साये मै तमाम सहाबा आराम के लिए इस जगह रुकते थे।
अल्लाह के रसूल ने सब सहाबा को एक जगह जमा करके आप ने फ़रमाया कि मै जिसका मौला हु अली भी उसके मौला है, यांनी जो हुज़ूर को अपना मौला मानता है तो उसकी पहचान ये है कि वो हज़रत अली अलैहिस्लाम को भी अपना मौला मानता है।
सूफियो मै ये अक़ीदा है जो हकीकत और सच्च है कि इस दिन रसूलल्लाह ने हज़रत अली को अपना रूहानी जानशीन ऐलान फ़रमाया।
लिहाज़ा ये 18 जिलहिज़ ईद यानि ख़ुशी का दिन है।
क्योकि सहाबा किराम ने हज़रत अली को इस ऐलान को सुनने के बाद मुबारकबाद पेश कि।
हज़रत अबूबकर सद्दीक रज़ि और हज़रत उमर रज़ि ने हज़रत अली को मुबारकबाद दी और कहा कि आज आपने ऐसी सुबह कि के आप तमाम मोमिनो के मौला हो हमारे भी मौला हो।
उम्मत के लिए ये बहुत ख़ुशी और मुबारकबाद देने का दिन है।
ईदे ग़दीर शिया खूब मनाते है इसलिए सुन्नियो ने इसको छोड़ दिया जबकि असल मै ये सुन्नियो के लिये बहुत बड़ी खुशी का दिन है।
दरगाही और खानकाही लोग इस ईदे ग़दीर के दिन मुबारकबाद देते है और ख़ुशी मनाते है।
सब भाइयो को बहुत बहुत मुबारक

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Jin logo ne Ghadeer-e-Khum ka Azeem Waqiya logo se chupaya wo duniya me andhe hokar ya bars ki haalat me mar gaye!

Abdur Rehman bin Abi Laila se riwayat hai ke Hazrat Sayyeduna Maula Ali al Murtaza KarramAllahu Wajhahul Kareem ne logon se khitab kiya aur farmaya:

Mai us aadmi ko Allah aur Islam ki Qasam deta hun, jisne Rasool-e-Akram SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ko Gadeer-e-Khum ke din Mera Haath Pakde hue ye farmate suna ho:

“Ay Musalmano! Kya Mai tumhari jaano se kareebtar nahi hun?” Sabne jawab diya: Kyon nahi, Ya RasoolAllah! Aap SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya: “Jiska Mai Maula Hun uska Ali Maula Hai, Ay Allah! Jo Isey Dost rakhe Tu usey Dost rakh, jo Is (Ali) se adawat rakhe Tu us se adawat rakh, jo Iski madat kare Tu uski madat farma, jo Iski ruswaayi chahe Tu usey ruswa kar?”

Is par 13 se jaaed Afrad ne khade hokar gawahi di aur JIN LOGO NE YE BAATE CHUPAAYI WO DUNIYA ME ANDHE YA BARS KI HAALAT ME MAR GAYE.

📚Hisamuddin Hindi, Kanzul Ummal, 13/131, Hadees 36417
Ibne Asakir, Tarikh e Damishq al Kabeer, 45/158
Kanzul Mattalib fee Manaqib Ali ibne Abi Talib Alaihi-Mussalam, Hadees 57

💐Allahumma Salli wa Sallim Ala Sayyedina wa Maulana Muhammadiw wa Ala Ahlul Bayt.

“Hazrat Shuaba Bin Kuhayl Se Riwayat Karte Hain Ki Mein Ne Aboo Tufayl Se Suna Ki Aboo Sareehah….. Ya Zayd Bin Arqam RadiyAllahu Ta’ala Anhuma…. Se Marwi Hai (Hazrat Shuaba Ko Raawi Ke Muta’lliq Shak Hai) Ki Huzoor Nabi-E-Akram SallAllahu Ta’ala Alayhi Wa Aalihi Wa Sallam Ne Farmaya :
Jis Ka Mein Mawla Hoo’n, Us Ka Ali Mawla Hai.”
Is Hadith Ko Imam Tirmidhi Ne Riwayat Kiya Hai Aur Kaha Ki Yeh Hadith Hasan Sahih Hai.
Shuaba Ne Is Hadith Ko Maymoon Aboo Abd-ul-Allah Se, Unhone Zayd Bin Arqam Se Aur Unhone Huzoor Nabi-E-Akram SallAllahu Ta’ala Alayhi Wa Aalihi Wa Sallam Se Riwayat Kiya Hai.

[Tirmidhi Fi As-Sunan, 05/633, Raqam-3713,
Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 05/195, 204, Raqam-5071, 5096,
وقد روي هذا الحديث عن حبسي بن جنادة في الكتب الآتية :
Hakim Fi Al-Mustadrak, 03/134, Raqam-4652,
Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 12/78, Raqam-12593,
Ibn Abi Asim Fi As-Sunnah, : 602, Raqam-1359,
Hisam-ud-Deen Hindi Fi Kanz-ul-Ummal, 11/608, Raqam-32946,
Ibn Asakir Fi Tarikh Dimishq Al-Kabir, 45/77, 144,
Khatib Al-Baghdadi Fi Tarikh Baghdad, 12/343,
Ibn Kathir Fi Al-Bidayah Wan-Nihayah, 05/451,
Haythami Fi Majma’-uz-Zawa’id, 09/108,
وقد روي هذا الحديث أيضا عن جابر بن عبدلله في الكتب ألآتية.
Ibn Abi Asim Fi As-Sunnah, : 602, Raqam-1355,
Ibn Abi Shaybah Fi Al-Musannaf, 06/366, Raqam-32072,
وقد روي هذا الحديث عن ايوب الأنصاري في الكتب ألآتية :
Ibn Abi Asim Fi As-Sunnah, : 602, Raqam-1354,
Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 04/173, Raqam-4052,
Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Awsat, 01/229, Raqam-348,
وقد روي هذا الحديث عن بريدة في الكتب ألاتيية :
Abd-ur-Razzaque Fi Al-Musannaf, 11/225, Raqam-20388,
Tabarani Fi Al-Mu’jam-us-Saghir, 01 : 71,
Ibn Asakir Fi Tarikh Dimishq Al-Kabir, 45/143,
Ibn Abi Asim Fi As-Sunnah, : 601, Raqam-1353,
Ibn Kathir Fi Al-Bidayah Wan-Nihayah, 05/457,
Hisam-ud-Deen Hindi Fi Kanz-ul-Ummal, 11/602, Raqam-32904,
وقد روي هذا الحديث عن مالك بن حويرث في الكتب ألاتيية :
Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 19/252, Raqam-646,
Ibn Asakir Fi Tarikh Dimishq Al-Kabir, 45 : 177,
Haythami Fi Majma’-uz-Zawa’id, 09/106,
Ghayat-ul-Ijabah Fi Manaqib-il-Qarabah,/139, 140, Raqam-157.]

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Writing Alaih Salam with Ahlul Bayt

Sayyidna Ali alayh salam.

Imam Bukhari in his Sahih Bukhari mentions the chain of ahadith many times as

حدثنا ‏ ‏يحيى ‏ ‏حدثنا ‏ ‏وكيع ‏ ‏عن ‏ ‏الأعمش ‏ ‏عن ‏ ‏سعد بن عبيدة ‏ ‏عن ‏ ‏أبي عبد الرحمن ‏ ‏عن ‏ ‏علي ‏ ‏عليه السلام ‏ ‏قال ‏

In the above chain in the end it says: ‏ ‏عن ‏ ‏علي ‏ ‏عليه السلام ‏ ‏قال i.e from Ali “ALAIH SALAM” who said

[Sahih Bukhari, Kitab Tafsir ul Quran, Tafsir of Surat al-Layl Hadith #4566][Online English Version: Volume 6, Book 60, Hadith No: Number 472]

Note: In the online version you won’t find Arabic text and Chain of the hadith

At another place Imam al-Bukhari in his Sahih Bukhari mentions Ali “ALAIH SALAM”



صحيح البخاري – كِتَاب تَفْسِيرِ الْقُرْآنِ – سُورَةُ وَالذَّارِيَاتِ

–  –  سُورَةُ وَالذَّارِيَاتِ قَالَ عَلِيٌّ عَلَيْهِ السَّلَام الذَّارِيَاتُ الرِّيَاحُ وَقَالَ غَيْرُهُ  تَذْرُوهُ  تُفَرِّقُهُ  وَفِي أَنْفُسِكُمْ أَفَلَا تُبْصِرُونَ  تَأْكُلُ وَتَشْرَبُ فِي مَدْخَلٍ وَاحِدٍ وَيَخْرُجُ مِنْ مَوْضِعَيْنِ  فَرَاغَ  فَرَجَعَ  فَصَكَّتْ  فَجَمَعَتْ أَصَابِعَهَا فَضَرَبَتْ بِهِ جَبْهَتَهَا وَالرَّمِيمُ نَبَاتُ الْأَرْضِ إِذَا يَبِسَ وَدِيسَ  لَمُوسِعُونَ  أَيْ لَذُو سَعَةٍ وَكَذَلِكَ عَلَى الْمُوسِعِ قَدَرَهُ يَعْنِي الْقَوِيَّ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ  الذَّكَرَ وَالْأُنْثَى وَاخْتِلَافُ الْأَلْوَانِ حُلْوٌ وَحَامِضٌ فَهُمَا زَوْجَانِ  فَفِرُّوا إِلَى اللَّهِ  مَعْنَاهُ مِنْ اللَّهِ إِلَيْهِ وَمَا خَلَقْتُ الْجِنَّ وَالْإِنْسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ  مَا خَلَقْتُ أَهْلَ السَّعَادَةِ مِنْ أَهْلِ الْفَرِيقَيْنِ إِلَّا لِيُوَحِّدُونِ وَقَالَ بَعْضُهُمْ خَلَقَهُمْ لِيَفْعَلُوا فَفَعَلَ بَعْضٌ وَتَرَكَ بَعْضٌ وَلَيْسَ فِيهِ حُجَّةٌ لِأَهْلِ الْقَدَرِ وَالذَّنُوبُ الدَّلْوُ الْعَظِيمُ وَقَالَ مُجَاهِدٌ  صَرَّةٍ  صَيْحَةٍ  ذَنُوبًا سَبِيلًا الْعَقِيمُ الَّتِي لَا تَلِدُ وَلَا تُلْقِحُ شَيْئًا  – ص 1838 –  وَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ وَالْحُبُكُ اسْتِوَاؤُهَا وَحُسْنُهَا  فِي غَمْرَةٍ  فِي ضَلَالَتِهِمْ يَتَمَادَوْنَ وَقَالَ غَيْرُهُ تَوَاصَوْا تَوَاطَئُوا وَقَالَ  مُسَوَّمَةً  مُعَلَّمَةً مِنْ السِّيمَا  قُتِلَ الْإِنْسَانُ  لُعِنَ

The Tafsir of Surat adh-Dhariyat

‘Ali, peace be upon him, said that “dhariyat” are the winds…

Under Surat ADH-DHARIYAT, Lesson: Book of Commentary(Interpretation of Holy Quran), Page No 355 

ali a.svol 6

Fatima A.S

Imam al-Bukhari also used ‘Alaiha Salaam’ for Fatima (A.S):

لما ثقل النبي ‏ ‏صلى الله عليه وسلم ‏ ‏جعل يتغشاه فقالت ‏ ‏فاطمة ‏ ‏عليها السلام

In the above chain it says: ‏ ‏ ‏ ‏فاطمة ‏ ‏عليها السلامi.e from Fatima “ALAIHA SALAM”

[Sahih Bukhari, Kitab al-Maghazni, Hadith 4103]

At another place Imam Bukhari in his Sahih Bukhari mention Fatima “ALAIHA SALAM”

صحيح البخاري – كِتَاب فَضَائِلِ الْقُرْآنِ – بَاب كَانَ جِبْرِيلُ يَعْرِضُ الْقُرْآنَ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

بَاب كَانَ جِبْرِيلُ يَعْرِضُ الْقُرْآنَ عَلَى النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَقَالَ مَسْرُوقٌ عَنْ عَائِشَةَ عَنْ فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام أَسَرَّ إِلَيَّ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّ جِبْرِيلَ كَانَ يُعَارِضُنِي بِالْقُرْآنِ كُلَّ سَنَةٍ وَإِنَّهُ عَارَضَنِي الْعَامَ مَرَّتَيْنِ وَلَا أُرَاهُ إِلَّا حَضَرَ أَجَلِي 

4711 حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ قَزَعَةَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ  كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَجْوَدَ النَّاسِ بِالْخَيْرِ وَأَجْوَدُ مَا يَكُونُ فِي شَهْرِ رَمَضَانَ لِأَنَّ جِبْرِيلَ كَانَ يَلْقَاهُ فِي كُلِّ لَيْلَةٍ فِي شَهْرِ رَمَضَانَ حَتَّى يَنْسَلِخَ يَعْرِضُ عَلَيْهِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الْقُرْآنَ فَإِذَا لَقِيَهُ جِبْرِيلُ كَانَ أَجْوَدَ بِالْخَيْرِ مِنْ الرِّيحِ الْمُرْسَلَةِ

VII: Jibril used to review the Qur’an with the Prophet, may Allah bless him and grant him peace

Translation: It is reported from ‘A’isha that Fatima, peace be upon her, said, “The Prophet, may Allah bless him and grant him peace, confided to me, ‘Jibril used to review the Qur’an with me every year, but this year he reviewed it with me twice. I only think that my time is approaching.'”

4711. Ibn ‘Abbas said, “The Prophet, may Allah bless him and grant him peace, was the most generous of people, and he was at his most generous during the month of Ramadan because Jibril used to met him every night in the month of Ramadan until it ended. The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, used to review the Qur’an with him. When Jibril met him, he was more generous with good than the blowing wind.”

Reference: Chapter 69. Book of the Virtues of the Qur’an, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

2) In the Hard copy, it is present under vol 6 chapter 7 Page 485 

fatima a.s

Sahih Bukhari Continues

1)

صحيح البخاري – كِتَاب الصَّلَاةِ – أَبْوَابُ سُتْرَةِ الْمُصَلِّي – بَاب الْمَرْأَةِ تَطْرَحُ عَنْ الْمُصَلِّي شَيْئًا مِنْ الْأَذَى

بَاب الْمَرْأَةِ تَطْرَحُ عَنْ الْمُصَلِّي شَيْئًا مِنْ الْأَذَى 

498 حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ إِسْحَاقَ السُّورَمَارِيُّ قَالَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُوسَى قَالَ حَدَّثَنَا إِسْرَائِيلُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ قَالَ  بَيْنَمَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَائِمٌ يُصَلِّي عِنْدَ الْكَعْبَةِ وَجَمْعُ قُرَيْشٍ فِي مَجَالِسِهِمْ إِذْ قَالَ قَائِلٌ مِنْهُمْ أَلَا تَنْظُرُونَ إِلَى هَذَا الْمُرَائِي أَيُّكُمْ يَقُومُ إِلَى جَزُورِ آلِ فُلَانٍ فَيَعْمِدُ إِلَى فَرْثِهَا وَدَمِهَا وَسَلَاهَا فَيَجِيءُ بِهِ ثُمَّ يُمْهِلُهُ حَتَّى إِذَا سَجَدَ وَضَعَهُ بَيْنَ كَتِفَيْهِ فَانْبَعَثَ أَشْقَاهُمْ فَلَمَّا سَجَدَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَضَعَهُ بَيْنَ كَتِفَيْهِ وَثَبَتَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَاجِدًا فَضَحِكُوا حَتَّى مَالَ بَعْضُهُمْ إِلَى بَعْضٍ مِنْ الضَّحِكِ فَانْطَلَقَ مُنْطَلِقٌ إِلَى فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام وَهِيَ جُوَيْرِيَةٌ فَأَقْبَلَتْ تَسْعَى وَثَبَتَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَاجِدًا حَتَّى أَلْقَتْهُ عَنْهُ وَأَقْبَلَتْ عَلَيْهِمْ تَسُبُّهُمْ فَلَمَّا قَضَى رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ الصَّلَاةَ قَالَ اللَّهُمَّ عَلَيْكَ بِقُرَيْشٍ اللَّهُمَّ عَلَيْكَ بِقُرَيْشٍ اللَّهُمَّ عَلَيْكَ بِقُرَيْشٍ ثُمَّ سَمَّى اللَّهُمَّ عَلَيْكَ بِعَمْرِو بْنِ هِشَامٍ وَعُتْبَةَ بْنِ رَبِيعَةَ وَشَيْبَةَ بْنِ رَبِيعَةَ وَالْوَلِيدِ بْنِ عُتْبَةَ وَأُمَيَّةَ بْنِ خَلَفٍ وَعُقْبَةَ بْنِ أَبِي مُعَيْطٍ وَعُمَارَةَ بْنِ الْوَلِيدِ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ فَوَاللَّهِ لَقَدْ رَأَيْتُهُمْ صَرْعَى يَوْمَ بَدْرٍ ثُمَّ سُحِبُوا إِلَى الْقَلِيبِ قَلِيبِ بَدْرٍ ثُمَّ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَأُتْبِعَ أَصْحَابُ الْقَلِيبِ لَعْنَةً

XIX: A woman removing something harmful from a person praying

498. It is related that ‘Abdullah said, “Once while the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, was standing in prayer at the Ka’ba, there was a group of Quraysh sitting there and one of them said, ‘Do you not see this show-off? Which of you will go to so and so’s butchered camel, get hold of its innards, bring them and then, when he prostrates, put them on his back?’ The most wretched of them did it and when the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, prostrated, he put them on his back. The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, remained in prostration and they laughed until they fell over one another laughing. Someone went to Fatima, peace be upon her, who was a young girl at the time. She came running. The Prophet, may Allah bless him and grant him peace, remained in prostration until she removed it from him. Then she turned to them and cursed them. When the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, finished the prayer, he said, ‘O Allah! Punish Quraysh! O Allah, punish Quraysh! O Allah, punish Quraysh!’ Then he named them: ‘O Allah, punish ‘Amr ibn Hisham, ‘Utba ibn Rabi’a, Shayba ibn Rabi’a, al-Walid ibn ‘Utba, Umayya ibn Khalaf, ‘Uqba ibn Abi Mu’ayt, and ‘Umara ibn al-Walid.'”

‘Abdullah said, “By Allah, I saw them all lying dead on the day of Badr and then they were dragged into the well of Badr and then the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, ‘The people of the well have been pursued by the curse.'”

 

References: Chapter 12. The Sutra of the One who Prays, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 1, Book 9, Number 499:Sahih Bukhari, Translated byMohsin khan

2)
صحيح البخاري – كِتَاب الْجِهَادِ وَالسِّيَرِ – بَاب لُبْسِ الْبَيْضَةِ

بَاب لُبْسِ الْبَيْضَةِ 

2754 حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْلَمَةَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ سَهْلٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ  أَنَّهُ سُئِلَ عَنْ جُرْحِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ أُحُدٍ فَقَالَ جُرِحَ وَجْهُ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَكُسِرَتْ رَبَاعِيَتُهُ وَهُشِمَتْ الْبَيْضَةُ عَلَى رَأْسِهِ فَكَانَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام تَغْسِلُ الدَّمَ وَعَلِيٌّ يُمْسِكُ فَلَمَّا رَأَتْ أَنَّ الدَّمَ لَا يَزِيدُ إِلَّا كَثْرَةً أَخَذَتْ حَصِيرًا فَأَحْرَقَتْهُ حَتَّى صَارَ رَمَادًا ثُمَّ أَلْزَقَتْهُ فَاسْتَمْسَكَ الدَّمُ

LXXXIV: Wearing helmets

2754. It is related that Sahl was asked about the wound of the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, on the Day of Uhud. He said, “The face of the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, was wounded, his front-tooth broken and his helmet was smashed on his head. Fatima, peace be upon her, washed the blood away while ‘Ali held the water. When she saw that it increased the bleeding, she took a mat and burned it until it was ash and then applied it and the bleeding stopped.”

 

References: Chapter 61. Book of Jihad and Military Expeditions, Sahih Bukhari Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 4, Book 52, Number 159, Sahih Bukhari Translated by Mohsin Khan

3)
صحيح البخاري – كِتَاب فَرْضِ الْخُمُسِ – بَاب الدَّلِيلِ عَلَى أَنَّ الْخُمُسَ لِنَوَائِبِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالْمَسَاكِينِ

بَاب الدَّلِيلِ عَلَى أَنَّ الْخُمُسَ لِنَوَائِبِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَالْمَسَاكِينِ وَإِيثَارِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَهْلَ الصُّفَّةِ وَالْأَرَامِلَ حِينَ سَأَلَتْهُ فَاطِمَةُ وَشَكَتْ إِلَيْهِ الطَّحْنَ وَالرَّحَى أَنْ يُخْدِمَهَا مِنْ السَّبْيِ فَوَكَلَهَا إِلَى اللَّهِ 

2945 حَدَّثَنَا بَدَلُ بْنُ الْمُحَبَّرِ أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ قَالَ أَخْبَرَنِي الْحَكَمُ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ أَبِي لَيْلَى حَدَّثَنَا عَلِيٌّ  أَنَّ فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام اشْتَكَتْ مَا تَلْقَى مِنْ الرَّحَى مِمَّا تَطْحَنُ فَبَلَغَهَا أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أُتِيَ بِسَبْيٍ فَأَتَتْهُ تَسْأَلُهُ خَادِمًا فَلَمْ تُوَافِقْهُ فَذَكَرَتْ لِعَائِشَةَ فَجَاءَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَذَكَرَتْ ذَلِكَ عَائِشَةُ لَهُ فَأَتَانَا وَقَدْ دَخَلْنَا مَضَاجِعَنَا فَذَهَبْنَا لِنَقُومَ فَقَالَ عَلَى مَكَانِكُمَا حَتَّى وَجَدْتُ بَرْدَ قَدَمَيْهِ عَلَى صَدْرِي فَقَالَ أَلَا أَدُلُّكُمَا عَلَى خَيْرٍ مِمَّا سَأَلْتُمَاهُ إِذَا أَخَذْتُمَا مَضَاجِعَكُمَا فَكَبِّرَا اللَّهَ أَرْبَعًا وَثَلَاثِينَ وَاحْمَدَا ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ وَسَبِّحَا ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ فَإِنَّ ذَلِكَ خَيْرٌ لَكُمَا مِمَّا سَأَلْتُمَاهُ

VI: The evidence that the khumus is for the needs of the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, and the poor. The preference of the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, for the People of the Suffa and widows. When Fatima complained to him about grinding and milling and asked him to give her a servant from the captives, he told her to trust in Allah

2945. It is related from ‘Ali, “Fatima, peace be upon her, complained of what she endured from the mill for grinding, and she heard that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, had taken captives. She went to him to ask for a servant and she did not find him. She mentioned it to ‘A’isha. When the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, came, ‘A’isha mentioned that to him. He came to him when we had gone to bed and we went to get up and he said, ‘Stay where you are’ until I felt the coolness of his feet on my chest. He said, ‘Shall I indicate to you two what is better than what you asked for? When you go to bed, say “Allah is greater” thirty-four times, “Praise be to Allah” thirty-three times, and “Glory be to Allah” thirty-three times. That is better for you than what you asked for.'”

References: Chapter 62. Book of Khumus, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley 

►Volume 4, Book 53, Number 344: Sahih Bukhari, Translated by Mohsin khan

4)
صحيح البخاري – كِتَاب الْجِزْيَةِ – بَاب طَرْحِ جِيَفِ الْمُشْرِكِينَ فِي الْبِئْرِ وَلَا يُؤْخَذُ لَهمْ ثَمَنٌ

بَاب طَرْحِ جِيَفِ الْمُشْرِكِينَ فِي الْبِئْرِ وَلَا يُؤْخَذُ لَهمْ ثَمَنٌ 

3014 حَدَّثَنَا عَبْدَانُ بْنُ عُثْمَانَ قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي عَنْ شُعْبَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ  بَيْنَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَاجِدٌ وَحَوْلَهُ نَاسٌ مِنْ قُرَيْشٍ مِنْ الْمُشْرِكِينَ إِذْ جَاءَ عُقْبَةُ بْنُ أَبِي مُعَيْطٍ بِسَلَى جَزُورٍ فَقَذَفَهُ عَلَى ظَهْرِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمْ يَرْفَعْ رَأْسَهُ حَتَّى جَاءَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام فَأَخَذَتْ مِنْ ظَهْرِهِ وَدَعَتْ عَلَى مَنْ صَنَعَ ذَلِكَ فَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ اللَّهُمَّ عَلَيْكَ الْمَلَا مِنْ قُرَيْشٍ اللَّهُمَّ عَلَيْكَ أَبَا جَهْلِ بْنَ هِشَامٍ وَعُتْبَةَ بْنَ رَبِيعَةَ وَشَيْبَةَ بْنَ رَبِيعَةَ وَعُقْبَةَ بْنَ أَبِي مُعَيْطٍ وَأُمَيَّةَ بْنَ خَلَفٍ أَوْ أُبَيَّ بْنَ خَلَفٍ فَلَقَدْ رَأَيْتُهُمْ قُتِلُوا يَوْمَ بَدْرٍ فَأُلْقُوا فِي بِئْرٍ غَيْرَ أُمَيَّةَ أَوْ أُبَيٍّ فَإِنَّهُ كَانَ رَجُلًا ضَخْمًا فَلَمَّا جَرُّوهُ تَقَطَّعَتْ أَوْصَالُهُ قَبْلَ أَنْ يُلْقَى فِي الْبِئْرِ

XX: Throwing the corpses of idolaters into a well and not taking any price for them

3014. It is related that ‘Abdullah said, “While the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, was in prostration, surrounded by some of the idolaters of Quraysh, ‘Uqba ibn Abi Mu’ayt brought the foetal membrance of a young camel and threw it on the back of the Prophet, may Allah bless him and grant him peace. He did not raise his head until Fatima peace be upon her came and removed it from his back. Then he pronounced an invocation against those who had done that. The Prophet, may Allah bless him and grant him peace, said, ‘O Allah! Destroy the council of Quraysh! O Allah, destroy Abu Jahl ibn Hisham, ‘Utba ibn Rabi’a, Shayba ibn Rabi’a, ‘Uqba ibn Abi Mu’ayt, and Umayya ibn Khalaf! (or and Ubayy ibn Khalaf)’ I saw them killed on the day of Badr and they were thrown into the well, except for Umayya or Ubayy. He was a fat man and when they dragged him, his joints separated before he was thrown into the well.”

 

References: Chapter 63. Chapters on the Jizya and Truces, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 4, Book 53, Number 409: Sahih Bukhari, Translated by Mohsin khan

 

5) Imam Bukhari, made a chapter on Fatima A.S and added Ahile Salam with her name
صحيح البخاري – كِتَاب فَضَائِلِ الصحابة – بَاب مَنَاقِبِ فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام

بَاب مَنَاقِبِ فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام وَقَالَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاطِمَةُ سَيِّدَةُ نِسَاءِ أَهْلِ الْجَنَّةِ 

3556 حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ حَدَّثَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ عَنْ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ عَنْ الْمِسْوَرِ بْنِ مَخْرَمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا  أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ فَاطِمَةُ بِضْعَةٌ مِنِّي فَمَنْ أَغْضَبَهَا أَغْضَبَنِي

XXIX: The Virtues of Fatima, peace be upon her

The Prophet, may Allah bless him and grant him peace, said, “Fatima is the mistress of the women of the Garden.” (see 3426)

3556. It is related from al-Miswar ibn Makhrama that the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said, “Fatima is part of me. Whoever makes her angry, makes me angry.”

References: Chapter 66. Book of the Virtues of the Companions, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 5, Book 57, Number 111: Sahih Bukhari, Translated by Mohsin Khan

6)
صحيح البخاري – كِتَاب الْمَغَازِي – اشتد غضب الله على من قتله النبي صلى الله عليه وسلم في سبيل الله 

3847 بَاب حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ عَنْ أَبِي حَازِمٍ أَنَّهُ سَمِعَ سَهْلَ بْنَ سَعْدٍ  وَهُوَ يُسْأَلُ عَنْ جُرْحِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَقَالَ أَمَا وَاللَّهِ إِنِّي لَأَعْرِفُ مَنْ كَانَ يَغْسِلُ جُرْحَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَمَنْ كَانَ يَسْكُبُ الْمَاءَ وَبِمَا دُووِيَ قَالَ كَانَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام بِنْتُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَغْسِلُهُ وَعَلِيُّ بْنُ أَبِي طَالِبٍ يَسْكُبُ الْمَاءَ بِالْمِجَنِّ فَلَمَّا رَأَتْ فَاطِمَةُ أَنَّ الْمَاءَ لَا يَزِيدُ الدَّمَ إِلَّا كَثْرَةً أَخَذَتْ قِطْعَةً مِنْ حَصِيرٍ فَأَحْرَقَتْهَا وَأَلْصَقَتْهَا فَاسْتَمْسَكَ الدَّمُ وَكُسِرَتْ رَبَاعِيَتُهُ يَوْمَئِذٍ وَجُرِحَ وَجْهُهُ وَكُسِرَتْ الْبَيْضَةُ عَلَى رَأْسِهِ

XX: The wounds which the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, received on the Day of Uhud

3847. It is related that Sahl ibn Sa’d was asked about the wound of the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, on the Day of Uhud. He said, “By Allah, I know who washed the face of the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, and who poured the water and with what he was treated.” He said, “Fatima, peace be upon her, washed the blood away while ‘Ali poured the water from a shield. When she saw that it increased the bleeding, she took a piece of mat and burned it and then applied it and the bleeding stopped. That day his front-tooth broken and his face was injured, and his helmet was smashed on his head.”

 

References: Chapter 67. Book of Expeditions, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 5, Book 59, Number 402: Sahih Bukhari Translated by Mohsin khan

 

7)
صحيح البخاري – كِتَاب الْمَغَازِي – هلموا أكتب لكم كتابا لا تضلوا بعده فقال بعضهم إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قد غلبه الوجع وعندكم القرآن حسبنا كتاب الله 

4170 حَدَّثَنَا يَسَرَةُ بْنُ صَفْوَانَ بْنِ جَمِيلٍ اللَّخْمِيُّ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ عَنْ أَبِيهِ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ  دَعَا النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام فِي شَكْوَاهُ الَّذِي قُبِضَ فِيهِ فَسَارَّهَا بِشَيْءٍ فَبَكَتْ ثُمَّ دَعَاهَا فَسَارَّهَا بِشَيْءٍ فَضَحِكَتْ فَسَأَلْنَا عَنْ ذَلِكَ فَقَالَتْ سَارَّنِي النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنَّهُ يُقْبَضُ فِي وَجَعِهِ الَّذِي تُوُفِّيَ فِيهِ فَبَكَيْتُ ثُمَّ سَارَّنِي فَأَخْبَرَنِي أَنِّي أَوَّلُ أَهْلِهِ يَتْبَعُهُ فَضَحِكْتُ

LXXVIII: The Illness and death of the Prophet, may Allah bless him and grant him peace

4170. It is related that ‘Aisha said, O The Prophet, may Allah bless him and grant him peace, summoned Fatima, peace be upon her, in his final illness. He confided something to her and she wept. Then he called her and confided something to her and she laughed. We asked her about that and she said, ‘She confided him that he would die in the illness in which he died and so I wept. Then he confided to me and informed me that I would be the first of his family to follow him and I laughed.'”

 

References: Chapter 67. Book of Expeditions, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 5, Book 59, Number 718:  Sahih Bukhari Translated by Mohsin khan

8)
صحيح البخاري – كِتَاب الْمَغَازِي – ما ترك رسول الله صلى الله عليه وسلم دينارا ولا درهما ولا عبدا ولا أمة 

4193 حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ حَدَّثَنَا حَمَّادٌ عَنْ ثَابِتٍ عَنْ أَنَسٍ قَالَ  لَمَّا ثَقُلَ النَّبِيُّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ جَعَلَ يَتَغَشَّاهُ فَقَالَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام وَا كَرْبَ أَبَاهُ فَقَالَ لَهَا لَيْسَ عَلَى أَبِيكِ كَرْبٌ بَعْدَ الْيَوْمِ فَلَمَّا مَاتَ قَالَتْ يَا أَبَتَاهُ أَجَابَ رَبًّا دَعَاهُ يَا أَبَتَاهْ مَنْ جَنَّةُ الْفِرْدَوْسِ مَأْوَاهْ يَا أَبَتَاهْ إِلَى جِبْرِيلَ نَنْعَاهْ فَلَمَّا دُفِنَ قَالَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام يَا أَنَسُ أَطَابَتْ أَنْفُسُكُمْ أَنْ تَحْثُوا عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ التُّرَابَ

4193. It is related that Anas said, “When the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, was very ill, the pain began to make him faint. Fatima, peace be upon her, said,.’Have you more pain, father?’ He said to her, ‘After today your father will suffer no more pain.’ When he died, she said, ‘Father, your Lord has answered your prayer. Father, the Garden of Firdaws is your shelter. Father, shall we announce your death to Jibril?’ When he was buried, Fatima, peace be upon her, said, ‘Anas, are you happy to put dust on the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace?'”

References: Chapter 67. Book of Expeditions, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 5, Book 59, Number 739: Sahih Bukhari Translated by Mohsin khan

9)
صحيح البخاري – كِتَاب النِّكَاحِ – بَاب وَلَا يُبْدِينَ زِينَتَهُنَّ إِلَّا لِبُعُولَتِهِنَّ إِلَى قَوْلِهِ لَمْ يَظْهَرُوا عَلَى عَوْرَاتِ النِّسَاءِ

بَاب  وَلَا يُبْدِينَ زِينَتَهُنَّ إِلَّا لِبُعُولَتِهِنَّ إِلَى قَوْلِهِ لَمْ يَظْهَرُوا عَلَى عَوْرَاتِ النِّسَاءِ 

4950 حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي حَازِمٍ قَالَ  اخْتَلَفَ النَّاسُ بِأَيِّ شَيْءٍ دُووِيَ جُرْحُ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَوْمَ أُحُدٍ فَسَأَلُوا سَهْلَ بْنَ سَعْدٍ السَّاعِدِيَّ وَكَانَ مِنْ آخِرِ مَنْ بَقِيَ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالْمَدِينَةِ فَقَالَ وَمَا بَقِيَ مِنْ النَّاسِ أَحَدٌ أَعْلَمُ بِهِ مِنِّي كَانَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام تَغْسِلُ الدَّمَ عَنْ وَجْهِهِ وَعَلِيٌّ يَأْتِي بِالْمَاءِ عَلَى تُرْسِهِ فَأُخِذَ حَصِيرٌ فَحُرِّقَ فَحُشِيَ بِهِ جُرْحُهُ

CXXII. “They should not display their adornments except to their husbands or their fathers or their husbands’ fathers, or their sons or their husbands’ sons or their brothers or their brothers’ sons or their sisters’ sons or other women or those they own as slaves or their male attendants who have no sexual desire or children who still have no awareness of women’s private parts.”(24:31)

4950. It is related that Abu Hazim said, “People disagree about how the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, was treated on the Day of Uhud. They asked Sahl ibn Sa’id as-Sa’idi, who was the last remaining Companion of the Prophe, may Allah bless him and grant him peace, in Madina, and he said, ‘There is no one left who knows it better than I do. Fatima, peace be upon her, washed the blood from his face while ‘Ali brought water on his shield. A mat was taken and burned and his wound was stuffed with it.”

References: Chapter 70.  Book of Marriage, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 7, Book 62, Number 175:, Sahih Bukhari Translated by  Mohsin Khan

10)
صحيح البخاري – كِتَاب النَّفَقَاتِ – بَاب خَادِمِ الْمَرْأَةِ

بَاب خَادِمِ الْمَرْأَةِ 

5047 حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ أَبِي يَزِيدَ سَمِعَ مُجَاهِدًا سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ أَبِي لَيْلَى يُحَدِّثُ عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ  أَنَّ فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام أَتَتْ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ تَسْأَلُهُ خَادِمًا فَقَالَ أَلَا أُخْبِرُكِ مَا هُوَ خَيْرٌ لَكِ مِنْهُ تُسَبِّحِينَ اللَّهَ عِنْدَ مَنَامِكِ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ وَتَحْمَدِينَ اللَّهَ ثَلَاثًا وَثَلَاثِينَ وَتُكَبِّرِينَ اللَّهَ أَرْبَعًا وَثَلَاثِينَ ثُمَّ قَالَ سُفْيَانُ  – ص 2052 – إِحْدَاهُنَّ أَرْبَعٌ وَثَلَاثُونَ فَمَا تَرَكْتُهَا بَعْدُ قِيلَ وَلَا لَيْلَةَ صِفِّينَ قَالَ وَلَا لَيْلَةَ صِفِّينَ

VII. A woman’s servant

5047. It is related from ‘Ali ibn Abi Talib that Fatima, peace be upon her, went to the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, to ask him for a servant. He said, “Shall I tell you what is better for you than that? When you go to sleep, say ‘Glory be to Allah’ thirty-three times, ‘Praise be to Allah,’ thirty-three times, and ‘Allah is greater’ thirty-four times.” (Sufyan said, “One of them is thirty-four.”) He said, “I have never failed to do that.” He was asked, “Not even on the night of [the Battle of] Siffin?” He said, “Not even on the night of Siffin.”

References: Chapter 72. The Book of Maintenance, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 7, Book 64, Number 275:  Sahih Bukhari Translated by Mohsin khan

11)
صحيح البخاري – كِتَاب الِاسْتِئْذَانِ – بَاب الْقَائِلَةِ فِي الْمَسْجِدِ

– ص 2316 –  بَاب الْقَائِلَةِ فِي الْمَسْجِدِ 

5924 حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ عَنْ أَبِي حَازِمٍ عَنْ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ قَالَ  مَا كَانَ لِعَلِيٍّ اسْمٌ أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ أَبِي تُرَابٍ وَإِنْ كَانَ لَيَفْرَحُ بِهِ إِذَا دُعِيَ بِهَا جَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بَيْتَ فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام فَلَمْ يَجِدْ عَلِيًّا فِي الْبَيْتِ فَقَالَ أَيْنَ ابْنُ عَمِّكِ فَقَالَتْ كَانَ بَيْنِي وَبَيْنَهُ شَيْءٌ فَغَاضَبَنِي فَخَرَجَ فَلَمْ يَقِلْ عِنْدِي فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِإِنْسَانٍ انْظُرْ أَيْنَ هُوَ فَجَاءَ فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ هُوَ فِي الْمَسْجِدِ رَاقِدٌ فَجَاءَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَهُوَ مُضْطَجِعٌ قَدْ سَقَطَ رِدَاؤُهُ عَنْ شِقِّهِ فَأَصَابَهُ تُرَابٌ فَجَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَمْسَحُهُ عَنْهُ وَهُوَ يَقُولُ قُمْ أَبَا تُرَابٍ قُمْ أَبَا تُرَابٍ

XL. Midday nap in the mosque

5924. Abu Hazim related that Sahl ibn Sa’d said, “There was no name which ‘Ali loved more than Abu Turab. He used to be happy when he was called that. The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, went to Fatima’s Peace Be Upon Her house and did not find ‘Ali at home. He said, ‘Where is your cousin?’ She said, ‘We had a difference of opinion and he got angry with me and went out. He did not take his mid-day nap here with me.’ The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, said to someone, ‘See where he is.’ He came back and said, ‘Messenger of Allah, he is sleeping in the mosque.’ The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, went and found ‘Ali lying there. His cloak had fallen from on top of him and had become covered with dust. The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, began to dust it off, saying, ‘Get up, Abu Turab (Dusty one)! Get up, Abu Turab!'”

 

References: Chapter 82. Book of Asking Permission to Enter, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

►Volume 8, Book 74, Number 297: Sahih Bukhari Translated by Mohsin Khan

12)
صحيح البخاري – كِتَاب الِاسْتِئْذَانِ – بَاب مَنْ نَاجَى بَيْنَ يَدَيْ النَّاسِ وَمَنْ لَمْ يُخْبِرْ بِسِرِّ صَاحِبِهِ فَإِذَا مَاتَ أَخْبَرَ بِهِ

بَاب مَنْ نَاجَى بَيْنَ يَدَيْ النَّاسِ وَمَنْ لَمْ يُخْبِرْ بِسِرِّ صَاحِبِهِ فَإِذَا مَاتَ أَخْبَرَ بِهِ 

5928 حَدَّثَنَا مُوسَى عَنْ أَبِي عَوَانَةَ حَدَّثَنَا فِرَاسٌ عَنْ عَامِرٍ عَنْ مَسْرُوقٍ حَدَّثَتْنِي عَائِشَةُ أُمُّ الْمُؤْمِنِيِنَ قَالَتْ  إِنَّا كُنَّا أَزْوَاجَ النَّبِيِّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ عِنْدَهُ جَمِيعًا لَمْ تُغَادَرْ مِنَّا وَاحِدَةٌ فَأَقْبَلَتْ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام تَمْشِي لَا وَاللَّهِ مَا تَخْفَى مِشْيَتُهَا مِنْ مِشْيَةِ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَمَّا رَآهَا رَحَّبَ قَالَ مَرْحَبًا بِابْنَتِي ثُمَّ أَجْلَسَهَا عَنْ يَمِينِهِ أَوْ عَنْ شِمَالِهِ ثُمَّ سَارَّهَا فَبَكَتْ بُكَاءً شَدِيدًا فَلَمَّا رَأَى حُزْنَهَا سَارَّهَا الثَّانِيَةَ فَإِذَا هِيَ تَضْحَكُ فَقُلْتُ لَهَا أَنَا مِنْ بَيْنِ نِسَائِهِ خَصَّكِ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ بِالسِّرِّ مِنْ بَيْنِنَا ثُمَّ أَنْتِ تَبْكِينَ فَلَمَّا قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سَأَلْتُهَا عَمَّا سَارَّكِ قَالَتْ مَا كُنْتُ لِأُفْشِيَ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ سِرَّهُ فَلَمَّا تُوُفِّيَ قُلْتُ لَهَا عَزَمْتُ عَلَيْكِ بِمَا لِي عَلَيْكِ مِنْ الْحَقِّ لَمَّا أَخْبَرْتِنِي قَالَتْ أَمَّا الْآنَ فَنَعَمْ فَأَخْبَرَتْنِي قَالَتْ أَمَّا حِينَ سَارَّنِي فِي الْأَمْرِ الْأَوَّلِ فَإِنَّهُ أَخْبَرَنِي أَنَّ جِبْرِيلَ كَانَ يُعَارِضُهُ بِالْقُرْآنِ كُلَّ سَنَةٍ مَرَّةً وَإِنَّهُ قَدْ عَارَضَنِي بِهِ الْعَامَ مَرَّتَيْنِ وَلَا أَرَى الْأَجَلَ إِلَّا قَدْ اقْتَرَبَ فَاتَّقِي اللَّهَ وَاصْبِرِي فَإِنِّي نِعْمَ السَّلَفُ أَنَا لَكِ قَالَتْ فَبَكَيْتُ بُكَائِي الَّذِي رَأَيْتِ فَلَمَّا رَأَى جَزَعِي سَارَّنِي الثَّانِيَةَ قَالَ يَا فَاطِمَةُ أَلَا تَرْضَيْنَ أَنْ تَكُونِي سَيِّدَةَ نِسَاءِ الْمُؤْمِنِينَ أَوْ سَيِّدَةَ نِسَاءِ هَذِهِ الْأُمَّةِ

XLIII. Someone who has a private conversation in front of the people and the one who did not disclose the secret of his companions but discloses it when he has died

5928. Masruq related that ‘A’isha, the Umm al-Mu’minin, said, “We, the wives of the Prophet, may Allah bless him and grant him peace, were all with him, and none of us had left when Fatima, peace be upon her, came walking. By Allah, her gait was much like that of the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace. When he saw her, he welcomed her and said, ‘Welcome, my daughter!’ and then he had her sit to his right or to his left and then she confided something to her and she wept profusely. When he saw her sorrow, he confided something else to her and she laughed. I was the only one of his wives who said to her, ‘The Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, singled you out for a secret from among us and then you wept.” When the Messenger of Allah, may Allah bless him and grant him peace, got up and left, I asked her, ‘What did he confide to you?’ She said, ‘I will not divulge the secret of the Messenger of Allah.’ When he died, I said to her, ‘I insist? on you by what right I have on you to tell me.; She said, ‘Now I will do it.’ She told me and said, ‘As for what he confided to me the first time, he told him that Jibril used to present the Qur’an to him once a year. He said, “This year, he has presented it to me twice. I only think that my time is approaching. Fear Allah and be steadfast. I am an excellent predecessor for you.”‘ She said, ‘Then I wept as you say. When he saw my distress, he confided to me a second time and said, “Fatima, are you not pleased that you will be the mistress of the believing women or the mistress of the women of this community?'”

Chapter 82. Book of Asking Permission to Enter, Sahih Bukhari, Translated by: Ustadha Aisha Bewley

Hussain A.S

Imam Bukhari also used ‘Alaihi Salaam’ for Imam Hussain (A.S):

‏أتي ‏ ‏عبيد الله بن زياد ‏ ‏برأس ‏ ‏الحسين ‏ ‏عليه السلام ‏ ‏فجعل في طست

In the above chain it says: ‏ ‏ ‏‏ ‏الحسين ‏ ‏عليه السلام i.e from Hussain “ALAIH SALAM”

[Sahih Bukhari, Hadith 3465] 

hussain a.s

Sunan Tirmidhi

Ali ALAIH SALAM

أَخَذَ عَلِيٌّ بِيَدِي قَالَ انْطَلِقْ بِنَا إِلَى الْحَسَنِ نَعُودُهُ فَوَجَدْنَا عِنْدَهُ أَبَا مُوسَى فَقَالَ عَلِيٌّ عَلَيْهِ السَّلَام أَعَائِدًا جِئْتَ يَا أَبَا مُوسَى أَمْ زَائِرًا فَقَالَ لَا بَلْ عَائِدًا ” – ص 301 – ” فَقَالَ عَلِيٌّ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ مَا مِنْ مُسْلِمٍ يَعُودُ مُسْلِمًا غُدْوَةً إِلَّا صَلَّى عَلَيْهِ سَبْعُونَ أَلْفَ مَلَكٍ حَتَّى يُمْسِيَ وَإِنْ عَادَهُ عَشِيَّةً إِلَّا صَلَّى عَلَيْهِ سَبْعُونَ أَلْفَ مَلَكٍ حَتَّى يُصْبِحَ وَكَانَ لَهُ خَرِيفٌ فِي الْجَنَّةِ

Translation: Thuwayr reported his father as saying that Sayyidina Ali(Alaih Salam) held him by his hand aid, ‘Come, let us pay a sick visit to Husayn .“ There they found Sayyidina Abu Musa (RA) with him. Sayyidina Ali asked him, “Have you come to pay a sick visit, 0 Abu Musa, or just a regular visit?” He said, “I have come to visit the sick.” So, Ali said, “I heard Allah’s Messenger (SAW)say : If a Muslim pays visit to a sick Muslim in the morning, seventy thousand angels pray for him till evening, and if he pays him the sick visit at night then seventy thousand angels pray for him till morning, and there is (also) a garden for him in Paradise.”

Reference: 10- BOOK OF FUNERALS, Chapter 2 Paying a sick visit, Hadith no 971

Sunan Abu Dawood

Ali ALAIH SALAM

حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ أَخْبَرَنَا أَبُو عَوَانَةَ عَنْ أَبِي إِسْحَقَ عَنْ عَاصِمِ بْنِ ضَمْرَةَ عَنْ عَلِيٍّ عَلَيْهِ السَّلَام قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَدْ عَفَوْتُ عَنْ الْخَيْلِ وَالرَّقِيقِ فَهَاتُوا صَدَقَةَ الرِّقَةِ مِنْ كُلِّ أَرْبَعِينَ دِرْهَمًا دِرْهَمًا وَلَيْسَ فِي تِسْعِينَ وَمِائَةٍ شَيْءٌ فَإِذَا بَلَغَتْ مِائَتَيْنِ فَفِيهَا خَمْسَةُ دَرَاهِمَ

 

Translation: Narrated Ali(A.S): The Prophet (peace_be_upon_him) said: I have given exemption regarding horses and slaves; with regard to coins, however, you must pay a dirham for every forty (dirhams), but nothing is payable on one hundred and ninety. When the total reaches two hundred, five dirhams are payable.

 

Reference: Book 9, Number 1569: Sunan Abu Dawood] 

ali-sd-asfatimamn k.w

Fatima ALAIH SALAM

حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ خَالِدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَوْهَبٍ الْهَمْدَانِيُّ حَدَّثَنَا الْمُفَضَّلُ عَنْ رَبِيعَةَ بْنِ سَيْفٍ الْمَعَافِرِيِّ عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْحُبُلِىِّ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ قَالَ قَبَرْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَعْنِي مَيِّتًا فَلَمَّا فَرَغْنَا انْصَرَفَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ وَانْصَرَفْنَا مَعَهُ فَلَمَّا حَاذَى بَابَهُ وَقَفَ فَإِذَا نَحْنُ بِامْرَأَةٍ مُقْبِلَةٍ قَالَ أَظُنُّهُ عَرَفَهَا فَلَمَّا ذَهَبَتْ إِذَا هِيَ فَاطِمَةُ عَلَيْهَا السَّلَام فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَا أَخْرَجَكِ يَا فَاطِمَةُ مِنْ بَيْتِكِ فَقَالَتْ أَتَيْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَهْلَ هَذَا الْبَيْتِ فَرَحَّمْتُ إِلَيْهِمْ مَيِّتَهُمْ أَوْ عَزَّيْتُهُمْ بِهِ فَقَالَ لَهَا رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فَلَعَلَّكِ بَلَغْتِ مَعَهُمْ الْكُدَى قَالَتْ مَعَاذَ اللَّهِ وَقَدْ سَمِعْتُكَ تَذْكُرُ فِيهَا مَا تَذْكُرُ قَالَ لَوْ بَلَغْتِ مَعَهُمْ الْكُدَى فَذَكَرَ تَشْدِيدًا فِي ذَلِكَ  

Translation:  Narrated Abdullah ibn Amr ibn al-‘As: We buried a deceased person in the company of the Apostle of Allah (peace_be_upon_him). When we had finished, the Apostle of Allah (peace_be_upon_him) returned and we also returned with him. When he approached his door, he stopped, and we saw a woman coming towards him. He (the narrator) said: I think he recognized her. When she went away, we came to know that she was Fatimah(A.S)The Apostle of Allah (peace_be_upon_him) said to her: What brought you out of your house, Fatimah? She replied: I came to the people of this house, Apostle of Allah, and I showed pity and expressed my condolences to them for their deceased relation. The Apostle of Allah (peace_be_upon_him) said: You might have gone to the graveyard with them.    She replied: I seek refuge in Allah! I heard you referring to what you mentioned. He said: If you had gone to the graveyard…He then mentioned severe words about it. I then asked Rabi’ah (a narrator of this tradition) about al-kuda (stony land). He replied: I think it means the graves.

 

Reference: Book 20, Number 3117: Sunan Abu Dawood 

 

fatima-sd-as

 

Musnad Ahmed Bin Hambal

 

Ali A.S

حَدَّثَنَا يَحْيَى ” – ص 430 – ” عَنْ جَعْفَرِ بْنِ مُحَمَّدٍ قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ وَكَانَ كَاتِبًا لِعَلِيٍّ قَالَ كَانَ مَرْوَانُ يَسْتَخْلِفُ أَبَا هُرَيْرَةَ عَلَى الْمَدِينَةِ فَاسْتَخْلَفَهُ مَرَّةً فَصَلَّى الْجُمُعَةَ فَقَرَأَ سُورَةَ الْجُمُعَةِ وَإِذَا جَاءَكَ الْمُنَافِقُونَ فَلَمَّا انْصَرَفَ مَشَيْتُ إِلَى جَنْبِهِ فَقُلْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ قَرَأْتَ بِسُورَتَيْنِ قَرَأَ بِهِمَاعَلِيٌّ عَلَيْهِ السَّلَام قَالَ قَرَأَ بِهِمَا حِبِّي أَبُو الْقَاسِمِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ

 

In the above quote it says: ‏ ‏عن ‏ ‏علي ‏ ‏عليه السلام ‏ ‏قال i.e from Ali “ALAIH SALAM” who said

 

Reference: Musnad Ahmed, Hadith no 9265

 

 

Fatima A.S

حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ يَعْنِي ابْنَ طَهْمَانَ عَنْ نَافِعِ بْنِ أَبِي نَافِعٍ عَنْ مَعْقِلِ بْنِ يَسَارٍ قَالَ وَضَّأْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ذَاتَ يَوْمٍ فَقَالَ هَلْ لَكَ فِي فَاطِمَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا تَعُودُهَا فَقُلْتُ نَعَمْ فَقَامَ مُتَوَكِّئًا عَلَيَّ فَقَالَ أَمَا إِنَّهُ سَيَحْمِلُ ثِقَلَهَا غَيْرُكَ وَيَكُونُ أَجْرُهَا لَكَ قَالَ فَكَأَنَّهُ لَمْ يَكُنْ عَلَيَّ شَيْءٌ حَتَّى دَخَلْنَا عَلَى فَاطِمَةَ عَلَيْهَا السَّلَام فَقَالَ لَهَا كَيْفَ تَجِدِينَكِ قَالَتْ وَاللَّهِ لَقَدْ اشْتَدَّ حُزْنِي وَاشْتَدَّتْ فَاقَتِي وَطَالَ سَقَمِي قَالَ أَبُو عَبْد الرَّحْمَنِ وَجَدْتُ فِي كِتَابِ أَبِي بِخَطِّ يَدِهِ فِي هَذَا الْحَدِيثِ قَالَ أَوَ مَا تَرْضَيْنَ أَنِّي زَوَّجْتُكِ أَقْدَمَ أُمَّتِي سِلْمَا وَأَكْثَرَهُمْ عِلْمًا وَأَعْظَمَهُمْ حِلْمًا 

 

In the above quote it says: ‏ ‏ ‏ ‏فاطمة ‏ ‏عليها السلامi.e from Fatima “ALAIHA SALAM”

Reference: Musnad Ahmed, Hadith no: 19796

 

The Permissibility Of Using Alaihi Salaam For Members Of The Ahlul Bayt (عليه السلام) With [SCANNED REFERENCES]From Authenticated Books Of Hadith …

Alayhis ‘Salaam After The Name Of Ali (Alayhis ‘Salaam) By Imam Bukhari (R.A) – Sahih Bukhari Volume No. VI Islamic University Al-Madina Munawara . Book of Commentary (Interpretation Of The Holy Quran) Page Number 355 SCANNED REFERENCES

Alayhis ‘Salaam After The Name Of Fatima (Alayhis ‘Salaam) By Imam Bukhari (R.A) – Sahih Bukhari Volume No. VI Islamic University Al-Madina Munawara Volume 6 Chapter 7 Page 485 SCANNED REFERENCES

Alayhis ‘Salaam After The Name Of Hussain (Alayhis ‘Salaam) By Imam Bukhari Sahih Bukhari Volume No. V Islamic University Al-Madina Munawara , Chapter 23 Hadith No 91 Page 66 SCANNED REFERENCES

Alayhis ‘Salaam After The Name Of Ali Alayhis ‘Salaam Sunan Abu Dawood Reference: Book 9, Number 1569: Sunan Abu Dawood Volume 2, Page 158 SCANNED REFERENCES

Alayhis ‘Salaam Used For Fatimah Alayhis ‘Salaam By Imam Abu Dawood Reference: Book 20, Number 3117: Sunan Abu Dawood Volume 3, Page 321 SCANNED REFERENCES