कर्बला के 31वें शहीद हज़रते बशीर इब्ने उमर-अल-कन्दी

कर्बला के 31वें शहीद हज़रते बशीर इब्ने उमर-अल-कन्दी

आप का पूरा नाम बशीर इब्ने उमर इब्ने अहदोस अल-हज़रमी अलं-कन्दी था। आप हज़रमौत के रहने वाले थे और आप का शुमार कबीला-ऐ-कुन्दा में होता था। आप ताबई और बड़ी फ्ज़ीलतों के मालिक थे। आप का और आपके लड़को का ज़िक्र अक्सर तारीख़ी जंगों में आता है। आप करबला में इमाम हुसैन की ख़िदमत में हाज़िर हुऐ थे। आप के हमराह आप के एक लड़के मोहम्मद नामी थे। सुबहे आशूर आगाज ही पर आपको इत्तेला मिली कि आप के एक लड़के उमर नामी हुकूमते रै की सरहद पर गिरफ़्तार हो गये हैं आप ने जब ये सुना तो कहा। खुदाया ! मैं अपने लड़के को तुझसे लूँगा ये मुझको गवारा नहीं हो सकता कि मैं ज़िन्दा रहूँ और मेरा लड़का गिरफ़्तार रहे।

हज़रत इमाम हुसैन अ० ने उनका ये कलाम सुन लिया फ्रमाया ऐ बशर ! मैं तुम्हे इजाज़त देता हूँ कि तुम जाकर अपने लड़के को रिहा कराओ। बशर ने जवाब दिया, “आका-ओ-मौला ! मुझे शेर और भेड़िये खा लें अगर में आपको इन दुश्मनों में छोड़कर चला जाऊँ।” हज़रत ने फ्रमाया, “अच्छा पाँच बरदे यमानी जिन की कीमत एक हज़ार अशरफी है अपने बेटे मोहम्मद को दे कर यहाँ से रवाना कर दो आपने इस के बाद पाँचों यमनी चादरे उनको अता फरमाई मुर्भरखीन का इस पर इत्तेफाक है यौमे आशूरा हमला-ए-अव्वल आप ने भी शहादत पाई।

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