
कर्बला के 30वें शहीद हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने यज़ीद अल-अबदी
आप अपनी कौम के सरदार थे और दोस्तदारे आले मोहम्मद थे। मनक़ज़ अबदी की बेटी मारिया के घर जो इमाम हुसैन की हिमायत में सलाह व मशवरा होता था उस में ये भी शिरकत करते थे। आप गैर न मारूफ रास्तो से गुज़र कर इमाम हुसैन की ख़िदमत थ में मक्का-ए-मोअज़्ज़मा पहुँचे एक मकाम पर क्याम कर छ के इमाम हुसैन से मिलने गये। हज़रत इमाम हुसैन अलै० के लिये तशरीफ ले गये। आख़िर कार ये लोग जल्दी वापस गये और हज़रत से अपने मकान पर मिलें आप मक्के से इमाम हुसैन अलै० के हमरकाब रहे और सुबहे आशूर करबला में शहीद हो गये।
बाज मोअर्ररखीन का बयान है कि आप के भाई अबीदुल्लाह और वालिदे माजिद यज़ीद इब्ने सबीत भी मक्के में इमाम हुसैन के हमराह हुये थे। हमला-ऐ-अव्वल में और बाद नमाज़ की जंग में वालिदे माजिद ने शहादत पाई है।

