कर्बला के 32वें शहीद हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने अरवाह अल-ग़फ़्फ़ारी

कर्बला के 32वें शहीद हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने अरवाह अल-ग़फ़्फ़ारी

आप का शुमार कूड़े के शोरफा में था। आप निहायत शुजा और बहादुर थे। आपके दादा जनाबे हवाक असहाब अमीरूल मोमिनीन में थे और बड़ी इज़्ज़त के मालिक थे। वह जंगे जमल, सिफ्फीन और महरबान में हज़रत अली अ० के साथ हो कर लड़े थे।

अब्दुल्लाह इमाम हुसैन अलै० से आकर मिले थे। और आख़िरे हयात तक इमाम हुसैन अ० के साथ रहे आप को जब इमाम हुसैन अ० की शहादत का यकीन हो गया तो आप की ख़िदमत में हाज़िर हो कर अर्ज परवाज़ हो गए, मौला मरने की इजाज़त दीजिये ताकि हम आप के सामने कुर्बान हो कर सुर्ख-रू हो जायें और लड़ने के लिये निकलना ही चाहते थे कि जंगे मगलूबा हो गई और सब के साथ आप भी शहीद हो गये।

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