अर-रहीकुल मख़्तूम  पार्ट 79 पार्ट 3

3. शाह फ़ारस खुसरू परवेज़ के नाम पत्र

नबी सल्ल० ने एक पत्र बादशाह फ़ारस किसरा (खुसरो) के पास भेजा, जो यह था-

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

मुहम्मद रसूलुल्लाह की तरफ़ से किसरा अज़ीम फारस की ओर

उस आदमी पर सलाम जो हिदायत की पैरवी करे और अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए और गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं और मुहम्मद उसके बन्दे और रसूल हैं। हैं। मैं तुम्हें अल्लाह की ओर बुलाता हूं, क्योंकि मैं तमाम इंसानों की ओर अल्लाह का भेजा हुआ हूं, ताकि जो आदमी ज़िंदा है, उसे बुरे अंजाम से डराया जाए और काफ़िरों पर हक़ बात साबित हो जाए (यानी हुज्जत पूरी हो जाए ) पस तुम इस्लाम लाओ, सालिम (सुरक्षित) रहोगे और अगर इससे इंकार किया तो तुम पर मजूस के गुनाह का बोझ भी होगा।’

इस पत्र को ले जाने के लिए आपने हज़रत अब्दुल्लाह बिन हुज़ाफ़ा सहमी रज़ियल्लाहु अन्हु को चुना। उन्होंने यह पत्र बहरैन के अधिकारी को दिया। अब यह मालूम नहीं कि बहरैन के अधिकारी ने यह पत्र अपने किसी आदमी के ज़रिए किसरा के पास भेजा या खुद हज़रत अब्दुल्लाह बिन हुज़ाफ़ा सहमी को रवाना किया। बहरहाल जब यह ख़त किसरा को पढ़कर सुनाया गया, तो उसने चाक कर दिया और घमंड में चूर होकर बोला, ‘मेरी जनता में से एक तुच्छ दास अपना नाम मुझसे पहले लिखता है।’

रसूलुल्लाह सल्ल० को इस बात की ख़बर हुई, तो आपने फ़रमाया, ‘अल्लाह उसकी बादशाही के टुकड़े-टुकड़े करे’ और फिर वही हुआ जो आपने फ़रमाया था। चुनांचे इसके बाद किसरा ने अपने यमन के गवर्नर बाज़ान को लिखा कि

1. ज़ादुल मआद 3/61

यह आदमी जो हिजाज़ में है, उसके यहां अपने दो मज़बूत और तन्दुरुस्त आदमी भेज दो कि वे उसे मेरे पास हाज़िर करें।

बाज़ान ने उसे पूरा करते हुए दो आदमी चुने एक उसका क़हरमान बानवीह जो गणितज्ञ था और फ़ारसी में लिखता था। इसरा खुसरो, यह भी फ़ारसी था।’ और उन्हें एक पत्र देकर रसूलुल्लाह सल्ल० के पास रवाना किया, जिसमें आपको यह हुक्म दिया गया था कि उनके साथ किसरा के पास हाज़िर हो जाएं।

जब वे मदीना पहुंचे और नबी सल्ल० के सामने हाज़िर हुए तो एक ने कहा, शहंशाह किसरा ने शाह बाज़ान के एक पत्र के ज़रिए हुक्म दिया है कि वह आपके पास एक आदमी भेजकर आपको किसरा के सामने हाज़िर करे और बाजान ने इस काम के लिए मुझे आपके पास भेजा है कि आप मेरे साथ चलें । साथ ही दोनों ने धमकी भरी बातें भी कहीं । आपने उन्हें हुक्म दिया कि कल मुलाक़ात करें।

इधर ठीक उसी वक़्त जबकि मदीना में यह दिलचस्प ‘मुहिम’ चल रही थी, खुद खुसरो परवेज़ के घराने के अन्दर उसके खिलाफ एक ज़बरदस्त बग़ावत का शोला भड़क रहा था, जिसके नतीजे में कैंसर की फ़ौज के हाथों फ़ौजों की बराबर मिलने वाली हार के बाद अब खुसरो का बेटा शेरवैह अपने बाप को क़त्ल करके खुद बादशाह बन बैठा था। यह मंगल की रात 10 जुमादल ऊला सन् 07 हि० की घटना है। 2

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस घटना का पता वह्य के ज़रिए चला, चुनांचे जब सुबह हुई और दोनों फ़ारसी नुमाइन्दे हाज़िर हुए, तो आपने उन्हें इस घटना की ख़बर दी। उन दोनों ने कहा, कुछ होश है, आप क्या कह रहे हैं? हमने इससे बहुत मामूली बात भी आपके अपराधों में गिन ली है, तो क्या हम आपकी यह बात बादशाह को लिख भेजें ?

आपने फ़रमाया, हां, उसे मेरी बात की ख़बर कर दो और उससे यह भी कह दो कि मेरा दीन और मेरी हुकूमत वहां तक पहुंचकर रहेगी, जहां तक किसरा पहुंच चुका है, बल्कि इससे भी आगे बढ़ते हुए उस जगह जाकर रुकेगी जिससे आगे ऊंट और घोड़े के क़दम जा ही नहीं सकते। तुम दोनों उससे यह भी कह देना कि अगर तुम मुसलमान हो जाओ, तो जो कुछ तुम्हारे आधीन है, वह सब मैं तुम्हें दे दूंगा और तुम्हें तुम्हारी क़ौम का बादशाह बना दूंगा।

1. तारीखे इब्ने खल्लदून 2/37 2. फत्हुल बारी 8/127, तारीख इब्ने खल्लदून 2/37

इसके बाद वे दोनों मदीना से चलकर बाज़ान के पास पहुंचे और उसे तमाम बातें बताईं। थोड़े दिनों बाद एक पत्र आया कि शरवैह ने अपने बाप को क़त्ल कर दिया है। शेरवैह ने अपने पत्र में यह भी हिदायत की थी कि जिस व्यक्ति के बारे में मेरे बाप ने तुम्हें लिखा था, उसे दूसरा आदेश आने तक छेड़ना मत ।

इस घटना की वजह से बाज़ान और उसके फ़ारसी साथी (जो यमन में मौजूद थे) मुसलमान हो गए । ‘

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