एक ख़्वाब

हज़रत इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने एक रात ख़्वाब में देखा कि दोनों आंखों के दर्मियान “कुल हुवल्लाहु अहद” लिखी है। आपके अहले बैत यह ख़्वाब सुनकर बहुत खुश हुए लेकिन जब यह ख़्वाब सईद इब्ने मुसय्यब रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को बताया तो उन्होंने फ़रमाया कि वाक़ई अगर यह ख़्वाब देखा है तो हज़रत इमाम की उम्र के चंद ही रोज़ रह गये हैं। चुनांचे यह ताबीर हुई। थोड़े ही दिन के बाद आपको दुशमनों ने जहर देकर शहीद कर दिया। (तारीखुल-खुलफा सफा १३४)

सबक हज़रत इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के दुशमनों के जुल्म से जामे शहादत नोश फरमाया। आपकी शहादत की तरफ इशारा पहले ही ख़्वाब में हो गया था।

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