Aftab e Ashraf 14

औलियाएकिराम के आस्तानों पर आपकी हाज़री आपको औलियाए कामलीन के आस्तानों पर हाज़री का शर्फ़ भी हासिल हुआ और इस सिलसिले में आपने दूर नज़दीक के कई सफ़र किये! हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह अजमेर शरीफ़, हज़रत ख़्वाजा कुतुबउद्दीन बख़्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह व हज़रत निज़ामउद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह देहली, हज़रत मख़दूम शाह हुसामुल हक़ हुसामी रहमतुल्लाह अलैह व हज़रत मख्दूम शाह पीर क़ासिम चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह व हज़रत मख़दूम शाह पीर करीम चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह ख़ानक़ाह शरीफ़ मानिकपुर, हज़रत मख़दूम अशरफ़ रहमतुल्लाह अलैह किछौछा, हज़रत शाह मीना रहमतुल्लाह अलैह लखनऊ, हज़रत हाजी मलंग रहमतुल्लाह अलैह कल्यान, हज़रत हाजी अली रहमतुल्लाह अलैह व हज़रत मखदूम माहिमी रहमतुल्लाह अलैह मुम्बई, हज़रत बाबा ताजउद्दीन रहमतुल्लाह अलैह नागपुर, हज़रत हाजी वारिस अली शाह रहमतुल्लाह अलैह देवा शरीफ़, हज़रत साबिर पाक रहमतुल्लाह अलैह कलियर शरीफ़, हज़रत मखदूम जाजमऊ रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत शाह अब्दुल लतीफ़ रहमतुल्लाह अलैह मेहँदीपुर और इसके अलावा भी आपको कई आस्तानों पर हाज़री का शर्फ हासिल था!

उर्स और मेलों के तक़रीबात- आप साल भार भले ही कही रहते लेकिन उर्स के अय्याम में जायस ज़रूर तशरीफ़ ले आते थे! दरगाह मख़दूम अशरफ़ जायस के उर्स की २७ और २९ मुहर्रमुल हराम
की शाम को उर्स की सारी तक़रीबात आप ही के सरपरस्ती में होती थी! आप ही महफ़िल की सदारत फ़रमाते थे और मसनदे सज्जादगी को ज़ीनत बख्शते थे! पूरे मरासिम उर्स की अदाएगी के दरमियान आप निहायत पुर सुकून और संजीदा रहते थें! आपको उर्स बहुत पसंद था और इसी लिए बड़े शौक़ से उर्स की तैयारी फ़रमाते थे!



आपके मुरीदों में उर्स- उर्स हज़रत मख़दूम अशरफ़ जायस के अलावा आप अपने मुरीदों में जब चाहते उर्स का ऐलान कर देते थे! मुरीदीन फ़ौरन उर्स की तैयारी में लग जाते थे और पूरे ऐहतेमाम के साथ उर्स किया जाता था! माहे मऊ छटई के पुरवा मीरा मऊ में हर साल चाँद के मुख़्तलिफ़ तारीखों में उर्स आज भी हज़रत की यादगार है जो पूरे जोशो खरोश के साथ मनाया जाता है!

छटई के पुरवा का मेला– हज़रत के क़याम के दौरान जब हाजतमंदो मरीज़ों और दुआ कराने वालों का सिलसिला शुरू हो गया तो आप इससे परेशान हो गयें! एक दिन हालते जज़्ब में आपने फ़रमाया कि जो इस पोखरे में नहायेगा वो अपना मक़सद मुराद पा लगा! ये बात जंगल की आग के तरह फैल गयी और हर तरफ़ से जौक दर जौक लोग यहाँ आने लगे जिसने धीरे धीरे मेले की शक्ल अख्तियार कर लिया! यहाँ जो भी आता अपना मक़सद मुराद पा लेता था! यहाँ आपसे बेपनाह करामातें सादिर हुईं हैं! आपका दरियाए फ़ैज़ अभी शबाब पर था की लोगों ने यहाँ गड़बड़ी शुरू कर दिया जिससे आप नाराज़ हो कर करीमनपुर चले आएं और फ़रमाया ये मेला चंद दिनों में ख़त्म हो जायेगा!



करीमनपुर का मेला– आप छटई के पुरवा से करीमनपुर चले आएं और यहाँ मक़ाम टहिया पर कुटी बनवाकर रहने लगे! रफ़्ता रफ़्ता यहाँ भी हाजतमन्दों की भीड़ लगने लगी यहाँ तक की चंद
दिनों में यहाँ भी मेला लगने लगा! आप तन्हाई और यकसोई के लिए वीरानों को पसंद फ़रमाते लेकिन खल्के ख़ुदा आपके इर्द गिर्द मेला लगा लेते! चंद ही दिनों में आप यहाँ से भी दिल बर्दाश्ता हो गएँ और लौहर चले गएँ!

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