Aftab e Ashraf 9

आपका कश्फ़-ओ-करामात- हज़रत सैय्यद जलाल अशरफ़ रहमतउल्लाह अलैह की कश्फ़.ओ.करामात हद्दे शुमार से बाहर हैं जिसे इस अदना किताब में दर्ज करना तवालत का बाइस होगा चुनाँचे यहाँ हम उन्हीं करामातों का ज़िक्र कर रहें हैं जो आपके मुताल्लिक़ मशहूर और मारूफ़ है!

(1) मशहूर है कि आपके मुरीद मुहम्मद याकूब खान मरहूम उनके बेटे मुहम्मद तैयब ख़ान माहे मऊ ज़िला अमेठी बयां करते हैं की एक दफ़ा हज़रत मेरे घर में तशरीफ़ फरमा थें। सावन भादौ की काली रात थी! चिराग़ जल रहा था जो हवा के एक झोंके के बाद बुझ गया! मैं हज़रत की ख़िदमत में लगा हुआ था हज़रत का पैर दबा रहा था! मैं हज़रत मुझको बार बार ताक़ीद कर रहे थे कि भैया दीवार के तरफ़ ना जाना वहां कुछ है मुहम्मद तैयब ख़ान कहते हैं कि जब हज़रत ने कई बार इस जुमले को दोहराया तो मुझे भी उलझन पैदा हुई! चिराग़ बुझ गया था मैंने माचिस तलाशा और लालटेन जलाया! जब रौशनी हो गयी तो मैंने दीवार के तरफ कदम बढ़ाया और देखा की उसमें एक होल है जिसमें एक काला बिच्छू बैठा है और वोह ज़ोर ज़ोर से उसमें डंक मार रहा है! मैंने उसे बाहर निकाला और उसे मार दिया! सावन भादौ की काली रात में काले बिच्छू को देख लेना ये उनकी बसारत नहीं बल्कि बसीरत का कमाल था!

(2) मुहम्मद वकील ख़ान इन मुहम्मद कासिम ख़ान मरहूम सेमरा परगना अठेहा ज़िला प्रतापगढ़ जिनका पूरा घराना हज़रत का मुरीद अक़ीदतमन्द और चाहने वाला था! वोह बयान करते थे कि एक बार हज़रत मेरे घर पर मौजूद थे! हम लोग हज़रत की ख़िदमत पर लगे हुए थें! हज़रत ने हम लोगों से कहा कि भैया शिकार कर लाओ। मै थें और मेरे भाई सईद ख़ान साथ में थे! मैंने देखा की अरहर के एक खेत में मुर्गाबी बैठी है! मैंने उस पर निशाना साधा और तीन बार ट्रिगर दबाया मगर मेरी बंदूक न चल सकी न काम कर सकी मैंने जब गौर करके मुर्गाबी के आगे देखा तो मेरे होश उड़ गयें सामने एक औरत बैठी हुई घास छील रही थी अगर गोली चल जाती तो यकीनन वोह औरत
भी उसके ज़द में आ जाती! मैंने फिर उस मुर्गाबी को वहां से उड़ाया तो वोह एक आम के दरख्त पर जाकर बैठ गयी! मैंने निशाना लगाया और निशाना लग गया मुर्गाबी तड़पती हुई नीचे आ गिरी मैंने उसे ज़बह किया और हज़रत के पास लेकर हाज़िर हुआ! इधर हज़रत की निगाहें पहले ही सब कुछ देख चुकी थीं! मैं जब हज़रत की ख़िदमत में हाज़िर हुआ तो हज़रत ने मुझसे पूछा भैया शिकार मिल गया मैंने हज़रत के सामने शिकार हाज़िर किया! हज़रत ने कहा भैया आज बड़ा ग़ज़ब हो जाता अगर पहली बार में तुम्हारी बंदूक चल जाती तो, क्यूंकि जब तुमने पहली बार गोली चलाने की कोशिश की थी तो तीन बार ट्रिगर दबाया था तो मैंने उसे रोक लिया था! अगर गोली चल जाती वोह औरत ज़द में आजाती! अल्लाह तआला ने अपने कामलीन बन्दों को कैसी ताक़त दे रखी है वोह दूर से होने वाले वालेआत को अपनी निगाहों से देख भी रहें हैं और उसे अपने क़ुदरते कामिला से रोक भी रहें हैं! ये उनकी वलायत और बसीरत का खुला हुआ सबूत है! I

(3) मर्ज़ काफूर हो गया- मुहम्मद रफ़ीक़ माहे मऊ ने बयान किया की मेरे लड़के मुहम्मद इश्तियाक़ को कालरा हो गया था यकायक तबियत बहुत ज़्यादा ख़राब हो गयी थी यहाँ तक की हाथ पैर ठण्डे हो गयें!
मैं एक गिलास में पानी लेकर हज़रत की कुटिया पर पहुंचा! हज़रत कुटी के बाहर ही तशरीफ़ फरमा थे! हज़रत के पास मुहर्रम अली पेश इमाम भी मौजूद थें! मैंने हज़रत से कहा मेरे लड़के की तबियत बहुत ख़राब है बचने की कोई उम्मीद नहीं पानी दम फरमा दीजे और मैं रोने लगा! हज़रत कुछ बोले नहीं और थोड़ी दूर जाकर दौड़ लगाना शुरू कर दिया! थोड़ी देर के बाद तशरीफ़ लाएं और चारपाई पर बैठ गये। मैंने हज़रत से पानी दम करने के लिए फिर दरख्वास्त की, आप चारपाई से फिर उठे और दौड़ लगाने लगें उसके बाद चारपाई पर तशरीफ़ लाएं और लेट गयें और मुंह पर चादर डाल लिया! मुहम्मद रफ़ीक़ का बयान है मै कुछ देर तो खड़ा रहा फिर मैंने सोचा अब हज़रत पानी नहीं दम फरमाएंगे अभी मैंने ये सोचा ही था के हज़रत उठ बैठे और मुझसे पानी दम करने के लिए माँगा और फ़रमाया जाओ ठीक हो जायेगा! मैंने घर जाकर लड़के को पानी पिलाया बच्चे ने फ़ौरन आँखे खोल दिया और उठ बैठा और मर्ज़ काफूर हो गया!

(4) क़त्ल का मुजरिम बरि हो गया- अब्दुल शकूर माहे मऊ |ने बयान किया था कि प्रताप भुजवा जो की अशरफपुर का रहने वाला था और ९९ वे डकैतों में माखुज़ था और एक क़त्ल के केस में भी मुलव्विस था। पुलिस उसे पकड़ कर थाने ले गयी और इस क़दर मारा की हाथ पैर की हड्डी हड्डी टूट गयी और सुल्तानपुर चालान कर दिया! वोह उस वक़्त जेल में था! उसकी माँ हज़रत के पास आई और हज़रत को एक रुपये नज़राना किया और अपने बेटे का हाल बयां किया और दुआ की दरख्वास्त किया! हज़रत ने फ़रमाया वह बिल्कुल ठीक हो ! जायेगा और छूट जायेगा! हज़रत की दुआ से वोह तमाम डकैतों से बरि हो गया और सबसे हैरत अंगेज़ बात ये हुई की क़त्ल वाला केस जिसमें ये माखुज़ था ऐसा दबा कि फिर चला ही नहीं और उसके तमाम साथियों को उम्रकैद की सज़ा हो गयी!

(5) बे औलाद को औलाद मिल गयी- सुल्तान अहमद मौज़ा मीरा मऊ ज़िला रायबरेली ने बयान किया कि हमारे यहाँ एक शख़्स मुहम्मद यार नामी हज़रत के मुरीद थे! इनके कोई औलाद नरीना (बेटे) नही थे! वोह हज़रत के पास आएं और तालिब ए दुआ हुए! हज़रत ने फ़रमाया तुम्हारे बच्चा होगा चुनांचे चंद ही दिनों के बाद हज़रत की दुआ से इनकी बीवी हामला हुईं! अब इन्होंने हिफाज़त हमल के लिए कुछ दूसरे लोगों से भी गंडा तावीज़ बनवायें लेकिन बिल आख़िर हमल साकित हो गया! दूसरी बार जब हज़रत को मीरा मऊ लाया गया तो मुहम्मद यार की बीवी खैरुन्निसा आईं और हज़रत के सामने रोने लगीं! हज़रत ने मुझसे फ़रमाया चलो भैया भाग चलें इसका ईमान दुरुस्त नहीं है और आबादी से बाहर एक बाग़ में चले गयें! वोह औरत भी हज़रत के साथ हो ली! आपने मुझसे फरमाया ये तो भैया यहाँ भी आ गयी! मैंने फ़रमाया हज़रत ये आपकी ख़ादिमा है आपको किस तरह छोड़ सकती है! आपने उस से कहा दूर हो जा! ! औरत थोड़ी दूर जाकर बैठ गयी फिर आहिस्ता आहिस्ता हज़रत के पास पहुंची और आपका पैर दबाना चाहा हज़रत ने पैर खींच लिया लेकिन मेरी सिफ़ारिश से हज़रत ने पैर फैला दिया! औरत हज़रत का पैर दबाने लगी और रोने लगी उसी वक़्त उसके शौहर मुहम्मद यार भी पहुंच गयें! हज़रत ने मुझसे फ़रमाया लो ये भी आ गया! हज़रत ने फिर फ़रमाया इस से कह दो कि दौड़ता हुआ जाये और चारपाई ले कर आये! हज़रत का ये हुक्म सुनकर मुहम्मद यार दौड़ता हुआ गया और ! चारपाई ले आया! हज़रत ने फ़रमाया ख़ाली चारपाई ले कर आया है कह दो बिस्तर भी लेकर आये ये सुनकर वोह बिस्तर भी ले आया! फिर आपने उस से तकिया मंगवाया फिर लोटा और डोरी इसी तरह पांच बार उसे दौड़ाया! बेचारे का दौड़ते दौड़ते बुरा हाल हो गया था! फिर आपने मुझसे फ़रमाया की ये औरत क्या कहती है? तो मैंने औरत से कहा कि अब अपना मुद्दा बयान करो तो उसने आपसे एक बेटा होने के दुआ के लिए दरख्वास्त किया! हज़रत वै फिर मुझसे फ़रमाया भैया इसका ईमान दुरुस्त नहीं है! औरत ये बात सुनकर रोती रही तो हज़रत ने औरत से फ़रमाया अपना ईमान दुरुस्त रखना जाओ अल्लाह ने तुमको औलाद दिया और हज़रत मखदूम साहब ने और मैंने यही कलमात आपने दो बार फ़रमाया चुनांचे उसके बाद उस औरत के यके बाद दीगरे दो बच्चे पैदा हुएं जो शिफ़ात अहमद और सिराज अहमद नाम से मौजूद थे!

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