
क्या मौला अली अलैहिस्सलाम
सभी सहाबियोंसे अफज़ल हैं.??
@ अहले सुन्नत वल जमाआत में तफसीरे कुरान के सबसे बड़े
और बहुत ही मोतबर आलिम इमाम फकरुद्दीन राज़ी हैं जिन्होंने
‘तफसीरे कबीर’ लिखी है।
इनके बारे में हमें कोई भी introduction देने की जरुरत नहीं
है क्योंकि आलमे इस्लाम में कोई भी ऐसा अहले इल्म नहीं है
जो इन्हें ना जानता हो।
इमाम फकरुद्दीन राजी ने सूरह आले इमरान की आयत नंबर 61
यानि आयते मुबाहिला की तफसीर में ‘मसला ए ख़मसा’ उन्वान
के तहत अली को नफ्से रसूल मानकर इस बात की वजाहत
की है कि अली नफ्से मुहम्मद हैं इसलिए मौला अली
अलैहिस्सलाम कुल तमाम सहाबियों से यकीनन अफज़ल हैं…
चूंकि मुहम्मद सल्ल० सभी अंबिया से अफजल हैं इसलिए नफ्से
रसूल की अफजलियत भी किसी से कम नहीं…
इस आयत के तहत मुबाहिला में नजरान के ईसाईयों के हठधर्मी
के मुकाबले में मुहम्मद सल्ल० ने अपने नफ्स मौला अली
अलैहिस्सलाम को ले गये, अपने नवासों इमाम हसन औ हुसैन
को लेकर गयें और अपनी बेटी फातिमा तुज्जहरा सलामुल्लाह
अलैहा को लेकर गये थे।
अब अगर कोई कहे कि अबू बक्र अफजल हैं अली
अलैहिस्सलाम से तो वो पहले इमाम फकरुद्दीन राजी पर फतवा
लगाए कि उन्होंने ना अली को कुल सहाबा से अफजल माना है।
है किसी अहले सुन्नत वल जमाआत के आलिमों में इतनी हिम्मत
जो इमाम फकरुद्दीन राजी पर फतवा लगाकर दायरे इस्लाम से
खारिज करे.. करने वाले खुद खारिज हो जाएंगे..



