हज़रते अली शेरे ख़ुदा से मरवी है

कि मक्का शरीफ़ में हुजूर के हमराह था तो हम अतराफ़ शहर की तरफ निकले तो मैंने देखा कि जो दरख़्त और पहाड़ हुजूर के सामने से गुज़रता वोह कहता “अस्सलातो वस्सलामु अलैका या रसूलुल्लाह ” (अये अल्लाह के रसूल आप पर सलाम हो)…

[ तिर्मिज़ी शरीफ़ जिल्द 02, सफ़ा न.203]

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