क़ासिम बिन हसन की शहादत

🌹क़ासिम बिन हसन की शहादत : हज़रत क़ासिम इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बड़े भाई इमाम हसन के बेटे थे । उस समय उनकी उम्र लगभग तेरह साल थी I रोज़े आशुर चचा हुसैन के पास आये और कहा बाबा हसन ने मेरे बाजू में एक तावीज़ बाँधा था और कहा था बेटे जब कभी सख्त परेशानी आ जाये तो इस तावीज़ को खोलकर अपनी आँखों से लगा लेंना I मैंने इस तावीज़ को आज जब खोल कर देखा तो उस पर लिखा था की भाई हुसैन के साथ तुम्हे भी दींन की हिफाज़त करने जाना पड़ा तो उनसे पहले तुम्हें अपनी कुर्बानी देनी होगी, लिहाज़ा चचाजान ये बाबा का हुक्म है मुझे आप यज़ीदी सिपाहियों का सामना करने जाने दे, आपने कहा “ अए बेटे तुम मेरे भाई हसन की निशानी और वारिस हो अभी तुम बहोत छोटे भी हो तुम्हे मै जंग में जाने की इजाज़त भला किस तरह से दे सकता हूँ तुम्हें देखता हूँ तो मुझे भाई हसन नज़र आते है तुम्हारे चेहरे को देखता हूँ तो नाना जान का नूरानी जलवा नज़र आता है । मगर आपने जवाब दिया चचाजान मेरी रगों में बाबा हसन और दादा अली का खून है, ये तो मेरी खुशकिस्मती है की कम उम्र में ही मुझे जंग करने का मौका मिला है । आप मुझे इजाज़त दे I और फिर इमामे आली मकाम हुसैन अलैहिस्सलाम से इजाज़त लेकर जब ये शेर यज़ीदी फौज मे गया तो इस शेर की तलवार के जौहर से यज़ीदी पीछे हट गए, इतनी कम उम्र में भी हज़रत क़ासिम ने इतनी हिम्मत और बहादुरी से लड़ाई लड़ी कि यज़ीदी फ़ौज के बड़े बड़े सूरमाओं के भी छक्के छूट गए. क़ासिम की बहादुरी देख कर अम्र बिन साअद जैसे बड़े पहलवान को हज़रत क़ासिम के सामने आना पड़ा जिसके बारे में ये मशहूर था की वो एक हज़ार की फौज पर अकेले ही काबू पा सकता था और इस बदबख्त ने हज़रत क़ासिम के सर पर तलवार मार कर उन्हें शहीद कर दिया ((इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैही राजेउन)) 😭😭😭😭😭😭😭😭 HASSANع KA LAL ZEEN PAE THA THO QASIMع THA ZAMIN MAE AYA THO TAQSEEM HOGYA HAYE… EK GATHRI MAE PAMAL QASIMع HOGYA…

उम्मुल मोमिनीन का ख़्वाब

उम्मुल मोमिनीन का ख़्वाब

एक बीबी फरमाती हैं कि में उम्मुल-मोमिनीन हजरत सलमा रजियल्लाहु तआला अन्हा के यहा गयी ! तो देखा कि उम्मुल-मोमिनीन रो रही हैं !

मैंने पूछा कि आप क्यों रो रही हैं ! तो फरमाया मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलेहि वसल्लम कोख़्वाब में देखा है कि आपक सरे अनवर और रीशे मुबारक पर गर्द व गुबार है ! मैंने अर्ज किया या रसूलल्लाह यह क्या बात है ? आपने फरमाया कि में अभी अभी करबला से आ रहा हू ! आज मेरे हुसैन को क़त्ल कर दिया गया है !

(तिर्मिजी शरीफ़ जिल्द 2 , सफा 218 )

सबक उम्मुल-मोमिनीन का ख़्वाब : हजरत इमाम की शहादत के वक़्त हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शहादत गाह में मोजूद थे ! अपने साहबजादे के इस अजीम इम्तिहान को आपने खुद मुलाहजा फरमाया !

मालूम हुआ कि हमारे हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जिन्दा हैं ! और उम्मत के जुमला आमाल व अफ़आल और हालात से बाख़बर हैं
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*दुआओं 🤲🏻 में याद रखियेगा*