कुँवारा नहीं मारना

कुँवारा नहीं मारना

कुँवारा मरना अच्छी बात नहीं है। हमारे बुज़ुर्गों ने ये नहीं सिखाया।

हज़रते इब्ने मसऊद रदिअल्लाहु त’आला अन्हु फ़रमाते थे अगर मेरी उम्र में से सिर्फ़ दस दिन बाक़ी रह गये हों और उन के बाद मेरी मौत हो तो मे चाहूँगा कि निकाह कर लूँ और अल्लाह त’आला से इस हालत में मुलाक़ात ना हो कि मै कुँवारा रहूँ।

(قوت القلوب، ج2، ص827)

इमाम अहमद बिन हम्बल रहमतुल्लाह अ़लैह के मुतल्लिक़ बयान किया जाता है कि आप की बीवी का इंतिक़ाल हुआ तो अगले ही दिन आप ने निकाह कर लिया।

हज़रते बिश्र रहमतुल्लाह अ़लैह का इंतिक़ाल हुआ तो किसी ने आप को ख्वाब में देखा। आप ने फ़रमाया कि मुझे ये मक़ाम अ़ता किया गया लेकिन शादी शुदा लोगों के मक़ाम तक ना पहुँच सका। (उन को अहलो अयाल पर सब्र करने की वजह से एक खास मक़ाम हासिल हुआ।)

हज़रते म’आज़ बिन जबल रदिअल्लाहु त’आला अन्हु की बीवी (ताऊन की वजह से) इंतिक़ाल फ़रमा गई तो आप ने फ़रमाया कि मेरा निकाह कर दो, मै नहीं चाहता कि अल्लाह त’आला से इस हालत में मिलूँ कि मै कुँवारा रहूँ।

(ایضاً)

निकाह मैं जल्दी करो

*_🌹निकाह मैं जल्दी करो…._*

*_लड़की के बालिग़ होते है उसके निकाह करने में जल्दी करना सुन्नत….इसकी दिनी और दुनियावी दोनों चीज़े हमे मअलूम होना चाहिए…._*

_आइये पहले दीन से समझ ले, लड़की को 9 साल के बाद अपने पास सुलाने की इजाज़त नही शरीअत ने लड़की के बालिग़ होने और हैज़ आने की मुद्दत कम से कम 9 साल रखी है… लड़की के बालिग़ होने के बाद उसके जिस्म,दिमाग़, सोच में तेज़ी से बदलाव होते और वह अपने से जुदा जीन्स की तरफ़ माएल होती है,_

_यही हाल लड़को का होता है जब जिस्म जवानी में क़दम रखते है तो उनकी भी एक ख़ुराक़ होती है जब वह हलाल (निक़ाह) तरीके से नही हासिल होती तो जिस्म हराम तरीके से उज़ गिज़ा की जानिब दोढ़ता है,_

_लिहाज़ा इसीलिये मेरे मुस्तफ़ा जाने रहमत ने निक़ाह करने में जल्दी फ़रमाई फ़रमाने रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम है कि :- बन्दे ने जब निकाह कर लिया तो आधा दीन मुकम्मल हो जाता है …अब बाकी आधे के लिए अल्लाह से डरे…_

*_📚:-(मिश्कात शरीफ़, जिल्द-2,सफ़ा-72,हदीस-2972)_*

_सुब्हानल्लाह…हमारे नबी ने हमे दीन मुकम्मल करने का कितना आसान रास्ता बताया है आधा निकाह करके और बाकी अपने रब्बे करीम से डरे उसके जलाल और कहर से डरे उसके अज़ाब से डरे…अगर अल्लाह का डर हमेशा रहेगा तो फ़िर किसी से डर नही लगेगा और गुनाहों से बुरी बातों से भी हम दूर रहेंगे…और अगर निक़ाह न कर सके किसी बिना पर तो उसे चाहिए रौज़ा रखें…._

_और दुनियावी लिहाज़ से हम खुदकी मिसाल देंगे कि 21 की उम्र में निक़ाह हुवा और रब तआला ने 30 तक औलाद से उमरह से फ़ारिग कर दिया, जबकि गेरो में 32-35 साल तक तो शादी ही होती है, बढ़े बुज़ुर्ग कहते है की बाप के काँधे झुकने से क़ब्ल बेटा उसके काँधे तक आ जाना चाहिए….लिहाज़ा अगर कोई बढ़ी वजह जैसे माली हालत, पढ़ाई, रिश्ता न मिलना या बाहर मुल्क में काम करता हो ये सब न हो तो बिला वजह निक़ाह न रोके उसे जल्द से जल्द अंजाम दे…

मक्का से गारे सौर तक 1

✿मक्का से गारे सौर तक *
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( हिस्सा 1)
★__ अब हुजूर सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम को हिजरत के सफर पर रवाना होना था, उन्होंने हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम से पूछा :- मेरे साथ दूसरा हिजरत करने वाला कौन होगा ?
जवाब में हजरत जिब्राइल अलैहिस्सलाम ने कहा- अबू बकर सिद्दीक होंगे ।

★_ हुजूर सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम उस वक्त तक चादर ओढ़े हुए थे इसी हालत में हजरत अबू बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु के घर पहुंचे ,दरवाजे पर दस्तक दी तो हजरत असमा रज़ियल्लाहु अन्हा ने दरवाज़ा खोला और हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम को देखकर अपने वालिद हजरत अबू बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु को बताया कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम आए हैं वो चादर ओढ़े हुए हैं। यह सुनते ही अबू बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु बोल उठे :- अल्लाह की क़सम ! इस वक़्त आप सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम यक़ीनन किसी खास काम से तशरीफ लाए हैं _,”
फिर उन्होंने आप सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम को अपनी चारपाई पर बिठाया, आप सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया :- दूसरे लोगों को यहां से उठा दो _,”
हजरत अबू बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु ने हैरान हो कर अर्ज़ किया :- ऐ अल्लाह के रसूल ! यह तो सब मेरे घरवाले हैं ।
इस पर आप सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने फरमाया:- मुझे हिजरत की इजाज़त मिल गई है। हजरत अबू बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु फौरन बोल उठे :- मेरे मां-बाप आप पर कुर्बान ! क्या मैं आपके साथ जाऊंगा?
जवाब में हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया :- हां , तुम मेरे साथ जाओगे _,”

★_ यह सुनते ही मारे खुशी के हजरत अबु बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु रोने लगे । हजरत आयशा सिद्दीका रजियल्लाहु अन्हा फरमाती हैं -मैंने अपने वालिद को रोते देखा तो हैरान हुई … इसलिए कि मैं उस वक्त तक नहीं जानती थी कि इंसान खुशी की वजह से भी रो सकता है ।
फिर हजरत अबू बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु ने अर्ज़ किया :- ऐ अल्लाह के रसूल ! आप पर मेरे मां-बाप कुर्बान ! आप इन दोनों ऊंटनियों में से एक ले लें , मैंने इन्हें इसी सफर के लिए तैयार किया है_,”
इस पर हुजूर सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने फ़रमाया :- मैं यह क़ीमत देकर ले सकता हूं ।
यह सुनकर हजरत अबू बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु रोने लगे और अर्ज़ किया :- ऐ अल्लाह के रसूल ! आप पर मेरे मां-बाप क़ुर्बान ! मैं और मेरा सब माल तो आप ही का है _,”
हुजूर सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम ने एक ऊंटनी ले ली ।

★_ बाज़ रिवायात में आता है कि और हुजूर सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने ऊंटनी की क़ीमत दी थी । उस ऊंटनी का नाम क़सवा था । यह आप सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम की वफात तक आपके पास हीं रही , हजरत अबू बकर सिद्दीक रजियल्लाहु अन्हु की खिलाफत मे उसकी मौत वाक़े हुई ।

★_ सैयदा आयशा सिद्दीका रजियल्लाहु अन्हा फरमाती हैं कि हमने उन दोनों ऊंटनियों को जल्दी-जल्दी सफर के लिए तैयार किया ,चमड़े की एक थैली में खाने-पीने का सामान रख दिया। हजरत समा रज़ियल्लाहु अन्हा ने अपनी चादर फाड़कर उसके एक हिस्से से नाश्ते की थैली बांध दी दूसरे हिस्से से उन्होंने पानी के बर्तन का मुंह बंद कर दिया । इस पर आन’हजरत सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया :- अल्लाह ताला तुम्हारी इस ओढ़नी के बदले जन्नत में दो ओढनियां देगा ।

★_ओढ़नी को फाड़ कर दो करने के अमल की बुनियाद पर हजरत असमा रज़ियल्लाहु अन्हा को जातुल नताक़ीन का लक़ब मिला, यानी दो ओढ़नी वाली। याद रखें कि नताक़ उस दुपट्टे को कहा जाता है जिसे अरब की औरतें काम के दौरान कमर के गिर्द बांध लेती है।
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Qaul e Mawla Ali Alahissalam

आदाबके ज़रिये अपनी इज़ज़तकी हिफाज़त करो और इल्मके ज़रिये अपने दीनकी हिफाज़त करो.

फरमाने मौला अली A S

अख्लाक वो चीज़ है जिसकी कुछ कीमत नहीं देनी पड़ती है, मगर उससे हर चीज़ खरीदी जा सकती है

फरमाने मौला अली A S

अवाम वो आइना है जिसमें इन्सान अपने अख्लाक को देखता है. खूबियां दोस्तोंके ज़रिये और बुराइयां दुश्मनों के ज़रिये.

फरमाने मौला अली A S

खुश-अख्लाक लोगों से खुश-अख्लाकी से पेश आना कमाल नहीं, मगर बद-अख्लाक लोगों से खुश-अख्लाकी से पेश आना कमाल है.