Kayi Kabile Tribe ke islam khidmat

*⚔️🇹🇷सल्तनत ए उस्मानिया🇹🇷⚔️*

*मुसलमान जबसे दीन के रास्ते से दूर हुवे तो गुलामी ओर ज़िल्लत उन का मुकद्दर बन गई , हमारा माज़ी हमारी पहचान हे तारीख़े इस्लाम मे खुल्फाए-राशेदीन के बाद बोहोत से मुजाहिदे इस्लाम गुजरे जो बोहोत मशहूर हे जिन्होंने सलेबियो(ईसाई फ़ौज़) के दाँत खट्टे किए_इनमे सुल्तान सलाउद्दीन अयूबी , सुल्तान नूरुद्दीन जंगी ,रुक्न अल-दीन बेयबर्स, सुल्तान अलप-अरसलान ,वगैराह सामिल हे_में तारीख़े इस्लाम से एक ऐसे अज़ीम मुजाहिद का जिक्र करने जा रहा हु जिनके नाम से बोहोत कम लोग वाकिफ हे जिन्होंने मुसलमानो की आज़ादी की जद्दो-जहद के लिए जिहाद का रास्ता अपनाया और बोहोतसी कुर्बानिया दी और इस तरह मुस्लमानो के लिए एक रोशन दौर का आगाज़ हुवा*

*ख़िलाफ़त ए अब्बासिया का खातमा हो चुका था -इस वक़्त तमाम तुर्क काबिलो की सूरत में रहते थे_ये तमाम काबिले खाना-बदोस थे ये सफर करते और जंग करते सर-सब्ज़ इलाके देखते वहा पर आबाद होजाते_उनमे एक काय कबीला था जो अफ़राद के लिहाज से काफी मजबूत ओर ताक़तवर था_सुलेमान शाह काय कबीले के सरदार थे जो सच्चे मुसलमान निडर ओर रहमदिल इन्शान थे_उनके मक़ासिद में इस्लाम की ईशाअत ओर इंसाफ का बोल-बाला करना शामिल था ,क्यों के ये वो वक़्त था जब मुसलमान हर जगह कमजोरी का शिकार थे*

*मंगोल हलाकू खान की सरबराइ बढ़ते चले आरहे थे, ओर ख़िलाफ़ते अब्बासिया के बाद सल्जूक सल्तनत इनकी मंजिल थी , तो उधर सलेबी अपनी सजिसो के जाल बन रहे थे_मुसलमानो की मजबूत और ताक़तवर सल्जूक सल्तनत अपने जावाल के करीब थी, इन हालात में जरूरी था कि मुसलमान की तादाद को बढ़ाया जाए , सरदार सुलेमान शाह के 4 बेटे थे जो बोहोत बहादुर जंगजू थे,, सुलेमान शाह तमाम तुर्क कबीलो को मुत्तहिद करना चाहते थे, ,ताके मुसलमानो को सलेबियो की सजिसो ओर धोको से बचाया जा सके*

शाम के इलाकों पर सुल्तान सलाउद्दीन अयूबी के पोते सुल्तान मलिक अल-अज़ीज़ अयूबी की हुकूमत थी,जबकि अनातोलिया में सल्जूक सुल्तान अलाउद्दीन कयकबाद की हुकूमत थी_सलेबी दोनो सुल्तानों को आपस मे लड़ाना चाहते थे ताके इस खित्ते में मुसलमानो को कमजोर करके उनका खत्मा किया जा सके

*सरदार सुलेमान शाह ने उन सजिसो को खत्म करने में बड़ा किरदार अदा किया जिसकी वजह से अय्यूबी सुल्तान काय कबीले के दोस्त बन गए_और सलजुक सुल्तान की भतीजी हलीमा सुल्तान की सुलेमान शाह के बेटे अल-तुगरल से शादी होगई ,सरदार सुलेमान शाह की वफात के बाद अल-तूगरल जो ,अरतगल, के नाम से मसहूर हे काय कबीले के सरदार बने वो बोहोत जाहिन बेहतरीन जंगजू थे*

*गाज़ी अरतगल (eurtgul) ने सरदार बनने बाद सलेबियो का डट कर मुकाबला किया उनकी सजिसो को ना-काम किया और उनके मशहूर किले कारह-चहिसर को फतह किया, बहादुरी सुजाअत ओर वफ़ा-दारी की वजह से सुल्तान अलाउद्दीन ने अरतगल गाज़ी को अगुज़ कबाइल का सरदार ए आला ओर अनातोलिया के सरहदी इलाके , जो बेजन्टइन के करीब थे , का निगरान बना दिया अरतगल गाज़ी के यहा 3 बेटे सुलेमान , गुन्दूज अल्प, सरु बाटी सभिसी बे, पैदा हुवे*

*उस्मान सब भाइयो में छोटे थे ,अरतगल गाजी ने उनकी दीनी ओर जंगी तरबियत की ,ओर वो बड़े होकर वालिद के शाने-ब-शाने जिहाद में शामिल होते रहे -अरतगल गाज़ी एक मकसद के लिए लड़ रहे थे उन्होंने मंगोलो के बड़े बड़े सिपाह सालार क़त्ल किए जिनमे नुयान ओर अलनचक मशहूर हे*

सल्जूक सल्तनत मंगोलो के हाथो खत्म हो चुकी थी ,ओर अरतगल गाज़ी ने तमाम तुर्क कबीलो को सुगुत में इकट्ठा किया, सलेबियो (ईसाई फ़ौज़ का नाम) से छीने गए इलाको को एक रियासत की सकल दी,ओर तालीम व तरबियत के लिए दरसगाह तामीर की,ताके लोग जदीद उलूम से बेहरावर हो और इस तरफ मजबूत इस्लामी मुहासरे की बुन्याद रखी जा सके

*अरतगल गाज़ी ने मंगोलो का खत्मा करने के लिए फैसला कुन जंग का इरादा किया ओर इस मकसद के लिए मंगोल सुल्तान बरका खान जो मुसलमान हो चुके थे और मिस्र के सुल्तान रुक्न अल-दीन बेयबर्स को अमादा किया ओर तेय पाया कि एक बड़ी फ़ौज़ तैयार की जाए जिसमे तमाम तुर्क कबाइल भी शामिल हो, अनातोलिया में फैसलाकुन जंग का आगाज़ किया गया

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