“हुज़ूर की दुआ”

हुज़ूर नबी ए अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम से मोहब्बत का दावा करने वालों
क्या तुम हुज़ूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम से दुआ नही हासिल करना चाहते

अगर तुम्हे हुज़ूर की दुआ हासिल करनी है तो मोहब्बत करनी होगी तुम्हे ” जनाब ए सय्यदा फ़ातिमा, सय्यदना मौला अली, सय्यदना इमामे हसन,सय्यदना इमामे हुसैन अलैहमुस्सलाम ” से

जैसा की हदीस ए पाक गवाह है कि ” पंजतन पाक अलैहमुस्सलाम में जो ज़ात ए मुक़द्दस शामिल हैं” उनके लिए हुज़ूर ने अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ मांगी के
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” ऐ अल्लाह उनसे मोहब्बत कर जो इनसे (मेरे अहलेबैत से) मोहब्बत करता है “

तो अगर आप अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की मोहब्बत हासिल करना चाहते हैं तो आपको ” पंजतन पाक अलैहमुस्सलाम ” से मोहब्बत करनी होगी

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त भी यही फ़रमाता है मैं उससे मोहब्बत करूँगा जो मेरे महबूब (सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम) की इत्तेबा करेगा

और

क़ुरआन ए पाक में हुज़ूर की क़राबत (अहलेबैत) से मोहब्बत के बारे में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त इरशाद फ़रमाता है
“के ऐ महबूब इनसे फ़रमा दीजे की तुमसे दीन के बदले में कोई उजरत नही चाहता लेकिन मेरी क़राबत (हुज़ूर के अहलेबैत) से मोहब्बत करो

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने हम पर हुज़ूर के अहलेबैत से मोहब्बत लाज़िम फ़रमा दी

और हुज़ूर ने अपने अहलेबैत से मोहब्बत करने वालो के लिए अल्लाह से दुआ भी फ़रमा दी की तू उनसे मोहब्बत कर जो इनसे मोहब्बत करे (यानि सय्यदा फ़ातिमा,सय्यदना अली, सय्यदना हसन, सय्यदना हुसैन अलैहमुस्सलाम)

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