Syeda Fatima Zahra (S.A)

 

 

ज़िक्रमुबारक शहज़ादिये आलमीन हज़रत सैय्यदा तय्यबा ताहिरा आबिदा ज़ाहिदा फ़ातिमा रज़िअल्लाह ला अन्हा बिन्त मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम

हुज़ूर पुर नूर सरवरे कायनात सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम कि शहज़ादियों मे सबसे छोटी शहज़ादी का इस्म मुबारक हज़रत सैय्यदा फ़ातिमा और कुन्नियत उम्मे मोहम्मद है! हमारे आक़ा रसूले अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम कि ये वोह शहज़ादी है की जिनपर तमाम मकारिम एख़लाक और औसाफ़े फ़ज़ाएल खत्म थे! या यूँ कहा जा सकता है कि ताजदारे अम्बिया सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम कि सीरते तय्यबा का एक बेहतरीन नमूना का दूसरा नाम “फ़ातिमा ज़हरा” था!

आपके अलक़ाबात मे सैय्यदुन्निसा, ज़हरा, तय्यबा, ताहिरा, मुत्तहरह, ज़ाकिया, राज़िया, मरज़िया, आबिदह, ज़ाहेदा, और बतूल मशहूर और निहायत मक़बूल अलक़ाबात है! 

अल्लामा इब्ने हज्र अलैरहमा शरह क़सीदा हम्ज़िया मे फ़ातिमा, बतूल, ज़हरा, की वजह तस्मिया यूँ बयान करते है कि—फ़ातिमा इस वजह से कि अल्लाह तबारको तआला ने आप रज़िअल्लाह तआला अन्हा से मोहब्बत रखने वालो को आतिशे दोज़ख से महफ़ूज़ फ़रमाया, बतूल इसलिये कि आप ज़माने भर की औरतों मे मुम्ताज़ और साहिबे फ़ज़ीलत हैं, ज़हरा इसलिये कि अल्लाह तबारको तआला ने आपको हैज़ से महफ़ूज़ और मामून रखा!

 

विलादत बासआदत- आप रज़िअल्लाह ताला अन्हा कि विलादत ऐलाने नबूवत से पांच साल क़ब्ल हुई! ये वोह ज़माना था कि कुरैश ख़ाना काबा के तामीर में मश्ग़ूल थे, इस वक्त रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की उम्र शरीफ़ा चौतीस बरस की थी! हज़रत फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा ने भी अपनी वालिदा माजिदा सैय्यदा तय्यबा ताहिरा ख़दीजा कुबरा रज़िअल्लाअह तआला अन्हा और हमशीराने ज़ीवक़ार के साथ ही रसूले अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के दस्ते हक़ पर बैते इस्लाम का शर्फ़ हासिल किया –

 

फ़ज़ाएल व मुनाक़िब- हज़रत सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा के फ़ज़ाएल व मुनाक़िब बेशुमार है और आप फ़ज़्लो करामत के उस बुलंदी पर फ़ाऐज़ है कि उसके र्गदे राह को पाना भी हर किसी के बस का रोग नही, इस ऐतराफ़े हक़ीक़त के साथ ये बन्दा नाचीज़ं (मुसन्निफ) जनाब सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा के कुछ फ़ज़ाएल व मुनाक़िब कितब सीर व हदीस से नक़्ल करने का शर्फ़ हासिल कर रहा है, और रब्बे करीम गफूरुरहीम से इस नाचीज़ कि यही दुआ है की वोह इसके इसी अमल को बख़्शिश का बहाना बना दे आमीन! हूज़ूर पुर नूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया, “कोई शख्स उस वक़्त तक कामिल मोमिन नही होता, जब तक मै उसको उसकी जान से ज़्यादा प्यारा न हो जाऊँ और मेरी ज़ात सब मख़लूक से ज़्यादा पसंदीदा और महबूब न हो जाये” और फरमाया जो मुझसे तवस्सुल की तमन्ना रखता हो और वोह चाहता हो कि क़यामत के दिन उसे मेरी शफ़ाअत नसीब हो, उसे चाहिये कि वो मेरी अहले बैत की न्याज़मंदी करे उनको ख़ुश रखे (बहयक़ी,देल्मी) और फिर फ़रमाया –जो मेरे इन अहले बैत से लड़ाई करेगा मै उससे लड़ूंगा और जो इनसे सुलह करेगा मै उससे सुलह करूंगा! (तिरमज़ी,इब्ने माजा,हबान,हाकिम)

फ़िर फ़रमाया फ़ातिमा मेरा जुज़ है, जो इन्हे नागवार होगा, वोह मुझे भी नागवार है, जो इन्हे पसन्द होगा वोह मुझे भी पसन्द होगा याद रखो क़यामत के दिन मेरे नसब, हसब, और रिश्तेदारी के सिवा बाक़ी तमाम लोगों के नसब बेफ़ाएदा हो जाएंगे! (रवाह,अहमद,हाकिम) अल्लाह तआला ने हुज़ूर सैय्यदे आलम रसूले अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की शहज़ादियों को जो इज़्ज़त व रिफ़अत अता फ़रमाई है वोह इन्ही का हिस्सा है!

 

हज़रत हुज़ैफ़ा रज़िअल्लाह तआला अन्हु से मरवी है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया – बेशक मेरे पास एक फ़रिश्ता आया जो आज रात से पहले कभी ज़मीन पर नही उतरा, उसने अल्लाह तआला से इजाज़त मांगी कि वोह मुझको सलाम करे ,और खुशख़बरी दे कि फ़ातिमा जन्नती औरतो की सरदार है और हसन व हुसैन नौजवानाने जन्नत के सरदार है! (रवाहुल,तिरमज़ी)

 

इब्ने उमैर बयान फ़रमाते है कि मै अपनी फूफी साहेबा के साथ हज़रत सैय्यदा आएशा सिद्दीक़ा रज़िअल्लाह ताला अन्हा के खिदमत अक़दस मे हाज़िर हुआ, मैने उम्मुल मोमिनीन से अर्ज़ किया कि फ़रमाईये के रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम सब इन्सानो मे से ज़्यादा किससे मोहब्बत फ़रमाते है , तो उन्होने फ़रमाया फ़ातिमा से, मैने अर्ज़ किया कि मर्दो मे महबूब कौन था, फ़रमाया के उनके शौहर अली रज़िअल्लाह ताला अन्हु! (तिरमज़ी शरीफ़)

मरवी है कि एक मर्तबा रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने ज़मीन पर चार ख़त खीचे और फ़रमाया, तुम जानते हो ये क्या है? सबने अर्ज़ किया कि अल्लाह तआला और उसका रसूल ज़्यादा वाक़िफ़ है, तो फ़रमाया फ़ातिमा बिंत मोहम्मद, खदीजा बिंत खुवैलद, मरियम बिंत इमरान, और आसिया बिंत मज़ाहिम (ज़ौजा फ़िरऔन) इन औरतों को जन्नत की सब औरतों पर फ़ज़िलत हासिल है! (अलइस्तेयाब)

सैय्यदा आएशा सिद्दीक़ा रज़िअल्लाह तआला अन्हा से मरवी है कि एक दिन हुज़ूर पुर नूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम तशरीफ़ फ़र्मा थे कि इतने मे हज़रत हसन रज़िअल्लाह तआला अन्हु आए तो आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने इन्हे अपने चादर मुबारक मे छुपा लिया, फिर हज़रत हुसैन रज़िअल्लाह तआला अन्हु आए तो इनको भी चादर मे दाखिल कर लिया फिर हज़रत फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा आईं तो इन्हे भी चादर मे दाख़िल कर लिया फिर हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु आएँ तो इनको भी चादर मे दाख़िल कर लिया और ये आऐते करीमा पढ़ी  إِنَّمَا يُرِيدُ اللَّهُ لِيُذْهِبَ عَنْكُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَيْتِ وَيُطَهِّرَكُمْ تَطْهِيرًا

इसमे शक नही कि अल्लाह तआला चाहता है की तुम से नापाकी दूर फ़रमादे (ऐ मेरे अहले बैत) तुमको ख़ूब ख़ूब पाक और सुथरा बना दे! (सही मुस्लिम शरीफ़)

जब रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम किसी सफ़र या जंग से वापस आते तो सबसे पहले मस्जिद तशरीफ़ ले जाते और दो रिकअत नमाज़ अदा फ़रमाते, फिर हज़रत सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा के घर तशरीफ़ ले जाते, फिर उम्माहातुल मोमिनीन के हुजराते मुबारक मे जलवाअफ़रोज़ होते!

हज़रत सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा हर अन्दाज़ मे, मसलन खाने पीने बोल चाल गर्ज़ के हर काम मे रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की पूरी पूरी तक़लीद फ़रमाती थीं!

हज़रत आएशा रज़िअल्लाह तआला अन्हा फ़रमाती हैं कि मैने फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा से ज़्यादा हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से मुशाबहे किसी को नही देखा, जब हज़रत सैय्यदा फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा अपने वालिद ज़ीवक़ार के ख़िदमत मे हाज़िर होंती तो अल्लाह तआला के रसूल मक़बूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम खड़े हो जाते और अपनी लख़्ते जिगर कि पेशानी को चूमते और उनको अपनी जगह पर बैठा देते, और यही तरीक़ा और अमल हज़रत ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा का भी था! (अल-इस्तेयाब अबु दाऊद)

हज़रत तय्यबा ताहिरा सैय्यदा फ़तिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा की मुबारक ज़िन्दगी का तमाम तर हिस्सा ज़ोहदो कनाअत पर बसर हुआ, सब्र तहाम्मुल, ज़ोहदो बुर्दबारी दुनयावी परेशानी और तकलीफ़ हस्ते हस्ते बर्दाश्त कर लेना आपको अपने वालिदे ज़ीशान से विरासत मे मिला था!

आप सैय्यदा रज़िअल्लाह ताला अन्हा खुद ही अपने घर का सारा काम काज सर-अन्जाम देती, चक्की पीसना, कपड़े धोना, घर मे झाड़ू देना, बच्चो को सभांलना खाना तैयार करना, पानी भरना ये सब फ़राएज़ ख़ानगी मे शामिल था!

फ़तूहात की क़सरत थी, रब्बे कायनात कि अता से रसूले रहमत सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम माल और ज़र के खज़ाने लुटा रहे थे, मगर इसमे अहले बैत नबवी के लिये कुछ भी नही था, अगर कभी इस बारे मे अर्ज़ किया भी तो रसूले करीम रऊफ़ुर्रहीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम किसी दूसरे तरीक़े से तसकीन व तशफ़्फ़ी फ़रमा देते, कभी वाज़ो नसीहत फ़रमाते हुए दुनिया के बेसबाती का ज़िक्र कर के कोई वज़ीफ़ा इरशाद फ़रमा देते!

अइम्मा हदीस फ़रमाते है कि चक्की पीस पीस कर जनाबे सैय्यदा रज़िअल्लाह तआला अन्हा के नरम व नाज़ुक हाथों पर छाले और गडढे पड़ गये थे, चूल्हा फूकते फूकते रुख़े ज़ेबा मुत्ग़ैयर हो जाते, धुँए से आँखे सुर्ख़ हो जाती थी एक दिन हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने फ़रमाया ऐ फ़ातिमा आज कल दरबारे नबवी मे बहुत से क़ैदी आए हुए है, और आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ग़ुलाम और कनीज़ तक़सीम फ़रमा रहे है, तुम भी जाओ एक ख़ादिम या ख़ादमा मांगलो, हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु के हुक्म पर जनाब सैय्यदा ख़ैरुन्निसा रज़िअल्लाह तआला अन्हा दरबारे अक़दस मे हाज़िरे खिदमत हुई, हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने अपने लख़्ते जिगर से आने का सबब पूछा, तो आपने फ़रमाया के बस ज़ियारत और सलाम के लिये हाज़िर हुई हूँ, शर्म और हया के सबब असल मक़सद न बयान कर सकी, ऐसे ही ख़ाली हाथ वापस लौट आईं और हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु से सारा हाल बयान कर दिया, फिर दोनो मिया बीवी बारगाहे अक़दस मे हाज़िर हुए, और हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने अर्ज़ किया, या रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम पानी भर भर कर सीना दर्द करने लगा है, हज़रत फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा ने भी अर्ज़ किया, चक्की पीसते पीसते हाथों पर छाले पड़ गये है, हुज़ूर के बारगाह मे बहुत से क़ैदी आए हुए है, करम फ़रमाईये कि इनमे से कोई हमे भी अता कर दीजिये, हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया अल्लाह तआला की क़सम मै तुम्हे कोई ख़ादिम नही दूंगा, क्या मै अहले सुफ़्फ़ह के हक़ को छोड़दूं और उनको भूल जांऊ? जो फ़करो फ़ाक़ा के वजह से एक एक रोटी को मोहताज हैं, मेरे पास कोई चीज़ नही जो इन पर सर्फ़ करुँ और उनकी इमदाद करुँ, सिवाए इन ग़ुलामों के, मै इनको फ़रोख़्त करके इनकी क़ीमत से असहाबे सुफ़्फ़ह की ज़रुरियात को पूरा करुँगा!

जब ये दोनो मिया बीवी, सब्र शुक्र अदा करके वहां से लौट आएं तो ख़ुद रसूले करीम हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम उनके काशान-ए-मुक़द्दस मे तशरीफ़ लायें और फ़रमाया कि तुम दोनो जो कुछ भी मेरे पास लेने गए थे क्या मै उससे आला चीज़ तुम्हे ना दे दूँ, उन्होंने अर्ज़ किया ज़रूर इरशाद फ़रमाएँ, तो आप हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया, हर नमाज़ के बाद दस बार सुबहानअल्लाह, वलहम्दुलिल्लाह, वल्लाह हूअकबर पढ़ा करो और सोते वक़्त सुबहानअल्लाह तैंतीस बार, अलहम्दुलिल्लाह तैंतीस बार, और अल्लाह हूअकबर चौतीस बार पढ़ लिया करो यही तुम्हारे लिये बेहतरीन ख़ादिम है, इस वज़ीफ़े को पाकर मलिकाए ख़ुल्देबरी शहज़ादिये हूरो परी, मख़्दूमाए हिम्मतो जरी, सैय्यदा, आबिदा, ज़ाहिदा, तय्यबा, ताहिरा, फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा और उनके शौहर मौलाए कायनात हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ग़ाएत दर्जा ख़ुश हो गए और शुक्र बजा लाएँ!

सैय्यदना इमाम हसन रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने फ़रमाया कि मैने अपनी वालिदा मोहतरमा को देखा कि वोह घर की मस्जिद मे मशग़ूले नमाज़ रहती यहाँ तक की सुबह हो जाती, मैने उन्हे हमेशा मुसलमानों के हक़ मे बहुत ज़्यादा दुआएँ करते हुए सुना है, उन्होंने अपने ज़ात के लिये कोई दुआ न मांगी, मैने अर्ज़ किया कि ऐ मादरे मेहरबान क्या वजह है की आप अपने लिये कोई दुआ नही मांगती, तो इरशाद फ़रमाया ऐ मेरे लाडले बेटे पहले हमसाया फिर अपना घर! (मदारिजिन्नबूवत)

 निकाह मुबारक– जब रसूले रहमत सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम मदीना मुनव्वरा मे जलवागर हुए तो कई सहाबाकिराम ने रसूले करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम से शर्फ़े निसबत हासिल करने के लिये जनाब सैय्यदा कि ख़्वास्तगारी की मगर रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उनको यही जवाब दिया कि अभी अल्लाह तआला के हुक्म का इन्तिज़ार है! एक बार हज़रत अबु बक्र सिद्दीक़ रज़िअल्लाह तआला अन्हु और हज़रत उमर फ़ारूक़ रज़िअल्लाह तआला अन्हु हज़रत अली करमअल्लाह तआला वजहुल करीम के पास तशरीफ़ ले गएँ, जबकी आप बाग़ को पानी दे रहे थे, इन दोनो हज़रात ने आप रज़िअल्लाह तआला अन्हु को सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा कि ख़्वास्तगारी की तरग़ीब दी, हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने अपने बेसरोसामानी का ज़िक्र किया, तो इन दोनो दोस्तो ने इसरार किया कि ऐ अली तुम ज़रूर जाओ मालूम होता है कि हुज़ूर नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा को आपके लिये ख़ासकर रखा है! चुनाँचे इस तरग़ीब पर हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु बारगाहे रिसालतमाब मे हाज़िर हुए, मगर शर्म कि वजह से कुछ कह नही पाएँ हमारे आक़ा व मौला दोआलम के मुख़्तार रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम निगाहे नबूवत से हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु के मंशा को समझ गयें और फ़रमाया ”ऐ अली क्या कहना चाहते हो, हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने अस्ल मक़सद अयाँ किया, तो रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम बहुत मसरूर हुए और इरशाद फ़रमाया कि ऐ अली अल्लाह तआला ने आसमानो पर तुम्हारा निकाह फ़ातिमा से फ़रमाया है, फिर फ़रमाया तुम्हारे पास हक़ महर के लिये क्या है तो हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने अर्ज़ किया कि एक ऊँट, एक तलवार और एक ज़िरह, तो सरकार दो आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने ज़िरह फ़रोख़्त करने का हुक्म दिया, चुनाँचे हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने ज़िरह फ़रोख़्त करके रक़म बारगाहे अक़दस मे पेश कर दिया, हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने उस रक़म से एक मुठ्ठी भरकर हज़रत बिलाल रज़िअल्लाहु अन्हु को दे दिया कि सैय्यदा फ़ातिमा रज़िअल्लाह ताला अन्हा के लिये इत्र और खुश्बू ले आएँ, दो मुठ्ठी भरकर हज़रत अबु बक्र रज़िअल्लाह तआला अन्हु को दिया और फ़रमाया कि घरेलू सामान ख़रीद लाओ, फिर हज़रत अम्मार बिन यासिर रज़िअल्लाह तआला अन्हु और जमाते सहाबा को बाज़ार भेजा, बहुक्म रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम जो कोई कुछ भी ख़रीदता था तो हज़रत अबु बक्र रज़िअल्लाह तआला अन्हु के मशवरह से ख़रीदता था, चुनाँचे एक पैरहन सात दरहम मे एक मकनह चार दरहम मे एक चादर सियाह मिस्री, एक कुर्सी, दो अदद तोशक, चार तकिये कि जिनमे अज़खर घास भरे हुए थे, एक पर्दा पश्म और बोरियाए सहरी, एक डोल चमड़े का, एक प्याला लकड़ी का, एक मशक़ीज़ा पानी के लिये, एक अफ़्ताबा रोग़नी, और मिट्टी के प्याले ख़रीदे गएँ जब सहाबाकिराम ने ये सामान बारगाहे अक़दस मे पेश किया, तो रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने एक एक चीज़ को दस्ते मुबारक मे लेकर मुलाहिज़ फ़रमाया और पसन्द फ़रमाया और अपने अहले बैत के लिये ख़ैरो बरकत की दुआ फ़रमाई कि ऐ अल्लाह तआला इस गिरोह को बरकत अता फ़रमा कि जिनके बरतन ज़्यादा तर मिट्टी के है-

हज़रत सैय्यदा फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा का निकाह बद्र से वापसी पर हुआ और माहे ज़ुलहिज्जा मे रुखसती हुई, और आपकी उम्र मुबारक पंद्रह साल साढ़े पाँच माह तहरीर है और हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु कि उम्र शरीफ़ इक्कीस साल की थी!

 

मन्क़ूल है कि चार लोग दुनिया मे सबसे ज़्यादा रोए है, एक हज़रत आदम अलैहिस्सलाम ख़ता सरज़द होने के सबब, दूसरे हज़रत याक़ूब अलैहिस्सलाम हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के जुदाई के बाद, तीसरी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा अपने वालिदे ज़ीशान सैय्यदुल कौनैन सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के विसाल मुबारक के बाद और चौथे हज़रत ज़ैनुल आबिदीन रज़िअल्लाह तआला अन्हु वाक़याए करबला के बाद!

हज़रत सैय्यदा आएशा सिद्दिक़ा रज़िअल्लाह तआला अन्हा फ़रमाती है कि जनाब सैय्यदा फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा अपने वालिद माजिद के विसाल के बाद कभी हंसती हुई नज़र नही आईं और यही वजह आपका विसाल हुज़ूर पुर नूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के विसाल मुबारक के तक़रीबन छ: माह बाद ही हो गया!

 

हज़रत अनस रज़िअल्लाह तआला अन्हु से मरवी है कि वोह हुज़ूर नबी अकरम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के तजवीज़ व तकफ़ीम से फ़ारिग़ हो कर सहाबाकिराम जनाब सैय्यदा रज़िअल्लाह तआला अन्हा को तसल्ली व तशफ़्फ़ी देने लगे तो उन्होने हज़रत अनस रज़िअल्लाह तआला अन्हु से पूछा, क्या तुम रसूलअल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को दफ़्न कर आए हो? आपने फ़रमाया जी हाँ दफ़्न कर आए हैं‌, तो जनाब सैय्यदा ने आह भरकर कहा, तुम्हारे दिलों ने ये कैसे गवारा किया कि तुमने मनो ख़ाक के नीचे आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम को दफ़्न कर दिया (असदुल ग़ाब)

सैय्यदा उम्मे सलमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा फ़रमाती है की जब वफ़ाते सैय्यदा का वक़्त क़रीब हुआ तो सैय्यदना अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु घर पर नही थे, हज़रत फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा ने मुझे हुक्म फ़रमया कि पानी का इंतेज़ाम करो, मै ग़ुस्ल करूंगी, मैंने उनके हुक्म कि तामील की और पानी का इंतेज़ाम कर दिया तो सैय्यदा रज़िअल्लाह तआला अन्हा ने ख़ूब अच्छी तरह ग़ुस्ल बनाया फिर साफ़ सुथरे कपडे ज़ेबतन फ़रमाया और उसके बाद बिस्तर पर क़िब्ला रुख़ होकर लेट गईं और मुझे फ़रमाया,

अब मुफ़ारक़त का वक़्त क़रीब है, मै गुस्ल कर चुकि हूँ इसलिए दोबारा ग़ुस्ल देने की ज़रूरत नही और नाही मेरा जिस्म खोला जाए, चुनांचे इसके बाद आप रज़िअल्लाह तआला अन्हा का विसाल हो गया, जब हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु तशरीफ़ लाए, तो मैने सारा वाक़या सुना दिया, उन्होंने उसी ग़ुस्ल पर इक्तेफ़ा किया और नमाज़ जनाज़ा के बाद उन्हे दफ़्न कर दिया! (तब्क़ात असाबा)

 

MAZAR SHAREEF

मज़ार मुबारक शहज़ादी-ए-आलमीन जनाब सैय्यदा फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हु (जन्नतुल बक़िया शरीफ़)

 आपकी नमाज़े जनाज़ा हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु ने पढ़ाई और लहद मुबारक मे भी हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु उतरे, इसके बाद तजहीज़ व तकफ़ीन के मराहिल से फ़ारिग़ होकर हज़रत अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु घर आएँ तो निहायत ग़म ज़दा थे शदीद परेशानी और हालते ग़म मे आपने चंद अशआर कहे जिसके माईने ये हैं-

  • मै देख रहा हूँ कि दुनिया की बकसरत मुसीबतों ने मुझपर हमला कर दिया है, और ये मुसीबत चिमटी ही रहती है, जब तक मुसीबत ज़दा मौत के मुँह मे न चला जाए
  • हर दो जाँनिसार दोस्तों मे बिल आख़िर जुदाई हो जाया ही करती है और वोह ज़माना जो जुदाई के बग़ैर (यानी क़ुर्बे वस्ल का ज़माना) होता है बहुत मुख़्तसर होता है –
  • और इसमे शक नही कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के बाद सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा का दाग़े मुफ़ारक़त दे जाना इस बात की दलील है कि जॉनिसार दोस्त हमेशा हमेश नही रहा करते! (दरुल मन्सूर)

हज़रत सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा को जन्नतुल बक़िया शरीफ़ मे दफ़्न किया गया! आप सैय्यदा तय्यबा ताहिरा आबिदा ज़ाहिदा मख़्दूमा फ़ातिमा ज़हरा की हयाते मुबारका और सीरते ताहिरा पूरे रूहे ज़मीं कि औरतों के लिए एक नमूना अज़ीम है , चाहे वोह किसी भी ऐतबार से हो, चाहे शौहर के साथ वफ़ा का ऐतबार हो, चाहे पाकी के ऐतबार से हो, चाहे अज़्दवाजी ज़िन्दगी के ऐतबार से, चाहे बेटी, बहन, बीवी, माँ हर ऐतबार से आपकी हयाते मुबारक मुकम्मल तौर पर नमूना अज़ीम है! आप सैय्यदा तय्यबा ताहिरा शहज़ादिये आलमीन के बारगाह मे (मुसन्निफ़) बहुत बहुत सलाम नज़र करता है और अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से यही दुआ करता है कि वो आपके सदक़े और तुफ़ैल पूरे उम्मते मुस्लिमा को ईमान की दौलत से माला माल फ़रमाए ——- आमीन!

 

ज़हरा बाग़े नबूवत की कली हैं

हसनैन हैं फूल तो गुलदान अली हैं

ज़हरा का नही सानी दुनिया मे कोई भी

बेशक ये क़ौल है रब का, यही क़ौले नबी है

पाकी का बयाँ उनके दुनिया क्या करेगी

दुनिया को पाकी उनके सदक़े मे मिली है

मरियम तो ईसा की निसबत से हैं अफ़ज़ल

कुबरा तो इस्लाम के ख़ातिर हैं मुकम्मल

ज़हरा से अफ़ज़ल कोई और हुईं हैं

ख़ातूने जन्नत तो ज़हरा ही बनी हैं

 

                                                                              अमीर सैय्यद क़ुतुबउद्दीन क़ुत्बी

                                                                              (आक़िब)

आप सैय्यदा तय्यबा ताहिरा के बत्ने अक़दस से ख़ानदाने रिसालत का सिलसिला जारी और सारी हुआ और क़यामत तक जारी और सारी रहेगा, आप सैय्यदा की औलादे हज़रत अली के तरफ़ मन्सूब न होकर सरकार दो आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के तरफ़ मन्सूब होती है और इसमे भी रब्बे करीम की मशीयत थी, और ख़ुद रसूले पाक का क़ौले शरीफ़ा भी है कि हसन और हुसैन का जद् मै हूँ (कुछ जमाते ऐसी हैं जो सरकार दो आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की शान घटाने के लिये हर मुमकिन कोशिश करती है और आपके औलादों से बुग़्ज़ रखने के सबब हर वोह बात करती है जिसे आस बिन वाएल मरदूद ने अपनी ज़बान से निकाला और अल्लाह ने उसे तबाह और बरबाद कर दिया, अल्लाह ने आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम और आपकी औलादे मुबारका की शान मे सूरह क़ौसर का नुज़ूल फ़रमाया! उस बदबख़्त ने आपके औलादे नरीना (बेटों) के वफ़ात के बाद आपको (माज़अल्लाह) अबतर यानी दुमकटा कि जिसकी नस्ल ख़त्म हो जाए कहा था! उस मरदूद और उस जैसे तमाम लोगों से मेरा यही सवाल है कि वोह ख़ुदा से लड़ने की क़ूवत रखते है, अगर रखते है तो पूछे ख़ुदा से कि उसने आदम अलैहिस्सलाम को बग़ैर माँ बाप के कैसे पैदा फ़रमाया, वोह पूछे कि उसने ईसा अलैहिस्सलाम को बग़ैर बाप के कैसे पैदा फ़रमाया, है किसी के अन्दर इतनी क़ूवत (माज़अल्लाह)! ये सब अल्लाह रब्बे कायनात की मशीयते है, जिसके आगे किसी का कोई ज़ोर नही चलता, उसने जब-जब जो-जो चाहा है वही हुआ है, उसने चाहा कि आदम अलैहिस्सलाम को अपने शाने क़ुदरत से बग़ैर माँ बाप पैदा फ़रमाए तो उसने पैदा फ़रमा दिया, उसने चाहा कि ईसा अलैहिस्सलाम को बग़ैर बाप के दुनिया मे भेजे तो उसने ऐसा किया, उसने चाहा कि दुनिया मे नस्ल का ऐतबार बेटों से चलाए तो उसने ऐसा किया, अब अगर उसने अपने महबूब सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की नस्ल चलाने के लिये सैय्यदा फ़ातिमा ज़हरा रज़िअल्लाह तआला अन्हा को चुना तो इसमे किसी को क्या परेशानी हो सकती है, बस ऐसे लोगों के लिये मेरी अल्लाह तआला से यही दुआ है कि वोह इन लोगों को हिदायत अता करे और ईमान मे पूरा पूरा दाख़िल फ़रमा दे आमीन!

 

औलाद मुबारक- हज़रत सैय्यदा तय्यबा ताहिरा फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा के तीन शहज़ादे और दो शहज़ादियाँ हुईं जिनका इस्म शरीफ़ ये है- हज़रत सैय्यदना इमाम हसन अलैहिस्सलाम, हज़रत सैय्यदना इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और हज़रत सैय्यदना मोहसिन अलैहिस्सलाम (आपका बचपन मे ही विसाल हो गया था) हज़रत सैय्यदा ज़ैनब रज़िअल्लाह तआला अन्हा और हज़रत सैय्यदा उम्मे क़ुलसूम रज़िअल्लाह तआला अन्हा!

हज़रत सैय्यदा फ़ातिमा रज़िअल्लाह तआला अन्हा को और आपके औलादों को अल्लाह ने जहन्नम से महफ़ूज़ फ़रमा दिया है जिसके मुताल्लिक़ हदीसे सहिया मौजूद है-

 

हज़रत इब्ने अब्बास रज़िअल्लाह तआला अन्हु से रिवायत है कि हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने हज़रत फ़ातिमा रज़िअल्लाह अन्हा से फ़रमाया कि अल्लाह तआला तुम्हें और तुम्हारी औलादों को जहन्नम का अज़ाब नही देगा! (हाकिम अल मुस्तदरक, तिबरानी अल मुअजमल कबीर)

 

इसी हदीस पाक के हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़िअल्लाह तआला अन्हु भी रावी हैं और वोह फ़रमाते हैं कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया की बेशक फ़ातिमा ने अपनी असमत और पाकदामनी की ऐसी हिफ़ाज़त फ़रमाया कि अल्लाह ने उसे और उसकी औलाद को आग से महफ़ूज़ फ़रमाया! (हाकिम अल मुस्तदरक, तिबरानी अल मुअजमल कबीर)

 

हज़रत सैय्यदना इमाम हसन और सैय्यदना इमाम हुसैन रज़िअल्लाह तआला अन्हुमा का ज़िक्र आपके वालिदे ज़ीशान हज़रत सैय्यदना मौला अली रज़िअल्लाह तआला अन्हु के ज़िक्र के बाद आगे होगा (इन्शाअल्लाह)!

Sayyida-E-Kaa’enaat سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Ke Faza’il-o-Manaqib In Roman Urdu

 

Muqaddamah

Sayyida-E-Kaa’enaat سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Kee Baargaah Me Allama Iqbaal Ka Manzoom Nadhrana-E-Aqidat

 مریم از   یک نسبت   عیسی        عزیز                   از      سہ    نسبت   حضرت زہرا عزیز

نور    چشم     رحمة      للعالمین                          آں  امام          اولین      و      آخریں

آں     کہ   جاں در   پیکر گیتی دمید                    روزگار            تازه     آئیں          آفرید

بانوۓ     آں   تاج دار   ہل   اتی                        مرتضی   مشکل   گشا      شیر       خدا

پادشاه     و   کلبۂ     ایوان     او                       یک حسام     و       یک زره   سامان او

مادر  آں  مرکز      پرگار     عشق                    مادر    آں       کارواں   سالار     عشق

آں   یکی    شمع     شبستان     حرم                        حافظ           جمعیت        خیرالامم

تا نشیند   آتش   پیکار   و    کیں                       پشت   پا زد     بر    سر تاج    و    نگیں

واں       دگر   مولاۓ   ابرار    جہاں                 قوت     بازوۓ           احرار      جہاں

در   نواۓ   زندگی  سوز   از     حسین               اہل   حق   حریت   آموز   از      حسین

سیرت    فرزند     ہا     از   امهات                    جوہر   صدق   و   صفا      از     امہات

مزرع تسلیم       را      حاصل        بتول                  مادراں       را اسوهٔ      کامل  بتول

بہر محتاجے دلش آں   گونہ     سوخت                با یہودے     چادر خود     را    فروخت

نوری   و   ہم     آتشی       فرمانبرش             گم   رضایش      در   رضاۓ     شوہرش

آں ادب   پروردهٔ   صبر   و   رضا                    آسیا      گردان   و     لب       قرآں سرا

گریہ     ہاۓ      او   ز بالیں   بی    نیاز              گوہر       افشاندے     بدامان      نماز

اشک او بر چید   جبریل   از   زمیں                      ہمچو  شبنم ریخت   بر  عرش   بریں

رشتۂ   آئیں   حق     زنجیر     پاست                   پاس   فرمان    جناب مصطفی    است

ورنہ     گرد     تربتش     گردید    مے              سجده     ہا        برخاک   او      پاشیدے(⚝)

1-Sayyida-E-Kaa’enaat سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Ka Gharaana Ahl-E-Bayt Hai

Fasl : 01

آل فاطمة سلام الله عليها أهل البيت

Sayyida-E-Kaa’enaat سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Ka Gharaana Ahl-E-Bayt Hai

 

01_             “Hazrat Anas Bin Malik رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Se Riwaayat Hai Ki Chhe (Maah) Tak Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ka Ma’mool Raha Ki Jab Namaaze Fajr Ke Liye Nikalte Aur Hazrat Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Ke Darwaaza Ke Paas Se Guzarte To Farmaate : Aye Ahl-E-Bayt! Namaaz Qaa’im Karo. (Aur Phir Yeh Aayate Mubaaraka Padhte: )……Aye Alh-E-Bayt! Allah Chaahta Hai Ki Tum Se (Har Tarah Kee) Aaloodgi Door Kar De Aur Tum Ko Khoob Paak-o-Saaf Kar De.”

[1_Tirmidhi Fi Al-Jami’ As-Sahih, 05/352, Raqam-3206,

2_Ahmad Bin Hanbal Fi Al-Musnad, 03/259, 285,

3_Ahmad Bin Hanbal Fi Fada’il As-Sahabah, 02/761, Raqam-1340, 1341,

4_Ibn Abi Shaybah Fi Al-Musannaf, 06/388, Raqam-32272,

5_Shybani Fi Al-Ahd Wa’l-Mathani, 05/360, Raqam-2953,

6_Abd Bin Humayd Al-Musnad,/367, Raqam-1223,

7_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 03/172, Raqam-4748,

8_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 03/56, Raqam-2671,

9_Bukhari Ne ‘Al-Kuna (Saf’h : 25, Raqam-205)’ Me Aboo Al-Hamra’ Se Hadith Riwaayat Kee Hai, Jis Me Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ke Is Amal Kee Muddat Nau (09) Maah Bayaan Kee Gayi Hai.

10_Abd Bin Humayd Ne ‘Al-Musnad (Saf’h : 173, Raqam-475)’ Me Imam Bukhari Kee Bayaan Karda Riwaayat Naql Kee Hai.

11_Ibn Hibba Ne ‘Tabaqat Al-Muhaddithin Bi-Asbahan (04/148)’ Me Hazrat Aboo Sa’iyd Khudri رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Se Marwi Is Riwaayat Me Aath Maah Ka Zik Kiya Hai.

12_Ibn Athir Fi Usd-ul-Ghabah Fi Ma’rifat-is-Sahabah, 07/218,

13_Dhahabi Fi Siyar A’lam-in-Nubala’, 02/134,

14_Mizzi Fi Tahdhib-ul-Kamal Fi Asma’-ir-Rijal, 35/250, 251,

15_Ibn Kathir Fi Tafsir Al-Qr’an Al-Azim, 03/483,

16_Suyooti Ne ‘Ad-Durr-ul-Manthoor Fi At-Tafsiri Bi-Al-Ma’thoor (05/613) Me Hazrat Aboo Sa’iyd Khudri رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Se Riwaayat Kee Hai.

17_Suyooti Ne ‘Ad-Durr-ul-Manthoor Fi At-Tafsiri Bi-Al-Ma’thoor (06/607) Ne Hazrat Aboo Al-Hamra’ Se Riwaayat Kee Hai.

18_Shawkani Fi Fat’h-ul-Qadir,/280,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/15_17, Raqam-01.]

02_             “Hazrat Aboo Sa’iyd Khudri رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Ne Allah Ta’ala Ke Is Irshaad Mubaaraka….. ﴾Aye Ahl-E-Bayt! Allah To Yehi Chaahta Hai Ki Tum Se (Har Tarah Kee) Aaloodgi Door Kar De ﴿ …. Ke Baare Me Kaha Hai Ki Yeh Aayat Mubaaraka Paanch Hastiyo’n…… Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم, Hazrat Ali, Hazrat Fatimah, Hazrat Hasan Aur Hazrat Husayn رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُم …… Ke Baare Me Naazil Huwi.”

[1_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Awsat, 03/380, Raqam-3456,

2_Tabarani Fi Al-Mu’jam-us-Saghir, 01/231, Raqam-375,

3_Ibn Hibban Fi Tabqat-ul-Muhaddithin Bi-Asbahan, 03/384,

4_Khatib Fi Tarikh Baghdad, 10/278,

5_Tabari Fi Jami’-ul-Bayan Fi Tafsir Al-Qur’an, 22/06,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/16, 17, Raqam-02.]

2-Sayyidah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Ka Gharaana Hee Ahl-E-Kisa’ Hai

Fasl : 02

آل فاطمة سلام الله عليها أهل كساء

Sayyidah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Ka Gharaana Hee Ahl-E-Kisa’ Hai

03_             “Safiyyah Bint Shaybah Riwaayat Karti Hain : Hazrat Aaishah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Bayaan Karti Hain Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Sub’h Ke Waqt Baahar Tashreef Laa’e Dar Haala’n Ki Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Aik Chaadar Odhi Huwi Thi Jis Par Siyaah Oon Se Kajaawo’n Ke Naqsh Bane Huwe They. Pas Hazrat Hasan Bin Ali رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا Aa’e To Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Unhein Us Chaadar Me Daakhil Kar Liya, Phir Hazrat Husayn رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Aa’e To Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ke Hamraah Chaadar Me Daakhil Ho Gaye, Phir Sayyidah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Aaein Aur Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Unhein Us Chaadar Me Daakhil Kar Liya, Phir Hazrat Ali كَرَّمَ للهُ تَعَالىٰ وَجْهَهُ الْكَرِيْم Aa’e To Aap Ne Unhein Bhi Chaadar Me Le Liye. Phir Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Yeh Aayat Mubaaraka Padhi : ﴾Aye Ahl-E-Bayt! Allah To Yehi Chaahta Hai Ki Tum Se (Har Tarah Kee) Aaloodgi Door Kar De Aur Tum Ko Khoob Paak-o-Saaf Kar De.﴿”

[1_Muslim Fi As-Sahih, 04/1883, Raqam-2424,

2_Ibn Abi Shaybah Fi Al-Musannaf, 06/370, Raqam-36102,

3_Ahmad Bin Hanbal Fi Fada’il As-Sahabah, 02/672, Raqam-1149,

4_Ibn Rahwayh Fi Al-Musnad, 03/678, Raqam-1271,

5_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 3/159, Raqam-4705,

6_Bayhaqi Fi As-Sunan Al-Kubra, 02/149,

7_Tabari Fi Jami’-ul-Bayan Fi Tafsir Al-Qur’an, 22/06, 07,

8_Baghawi Fi Ma’alim-ut-Tanzil, 03/529,

9_Ibn Kathir Fi Tafsir Al-Qr’an Al-Azim, 03/485,

10_Suyooti Fi Ad-Durr-ul-Manthoor Fi At-Tafsiri Bi-Al-Ma’thoor, 06/605,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/18, 19, Raqam-03.]

 

04_             “Parwarda-E-Nabi Hazrat Umar Bin Abi Salamah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Se Riwaayat Hai Ki Jab Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Par Hazrat Ummi Salamah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Ke Ghar Me Yeh Aayat Mubaaraka …… ﴾Aye Ahl-E-Bayt! Allah To Yehi Chaahta Hai Ki Tum Se (Har Tarah Kee) Aaloodgi Door Kar De Aur Tum Ko Khoob Paak-o-Saaf Kar De﴿…… Naazil Huwi ; To Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Hazrat Fatimah, Hazrat Hasan Aur Hazrat Husayn رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُم Ko Bulaaya Aur Aik Kamli Me Dhaanp Liya. Hazrat Ali كَرَّمَ للهُ تَعَالىٰ وَجْهَهُ الْكَرِيْم Huzoor صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ke Peechhe They, Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Unhein Bhi Kamli Me Dhaanp Liya, Phir Farmaya : Ilaahi! Yeh Mere Ahl-E-Bayt Hain, In Se Najaasat Door Kar Aur In Ko Khoob Paak-o-Saaf Kar De.”

[1_Tirmidhi Fi Al-Jami’ As-Sahih, 05/351, 663, Raqam-3205, 3787,

2_Ahmad Bin Hanbal Fi Al-Musnad, 06/292,

3_Ahmad Bin Hanbal Fi Fada’il As-Sahabah, 02/587, Raqam-994,

4_Bayhaqi Ne ‘As-Sunan-ul-Kubra (02/150)’ Me Yeh Hadith Zara Mukhtalif Alfaaz Ke Saath Riwaayat Kee Hai.

5_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 02/451, Raqam-3558,

6_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 03/158, Raqam-4705,

7_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Awsat, 03/54, Raqam-2662,

8_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 09/25, Raqam-8295,

9_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Awsat, 04/134, Raqam-3799,

10_Bayhaqi Fi Al-I’tiqad,/327,

11_Khatib Baghdadi Fi Tarikh Baghdad, 09/126,

12_Khatib Baghdadi Fi Muwaddihu Al-Jam’ Awhami  Wa At-Tafriq, 02/313,

13_Doolabi Fi Adh-Dhurriyah At-Tahirah,/107, 108, Raqam-201,

14_ Ibn Athir Ne ‘Usd-ul-Ghabah Fi Ma’rifat-is-Sahabah (07/218)’ Me Yeh Hadith Hazrat Ummi Salamah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Se Riwaayat Kee Hai.

15_Asqalani Fi Fat’h-ul-Bari Sharh Sahih Al-Bukhari, 07/138,

16_Asqalani Fi Al-Isabah Fi Tamyiz-is-Sahabah, 03/405,

17_Tabari Fi Jami’-ul-Bayan Fi Tafsir Al-Qur’an, 22/07,

18_Suyooti Fi Ad-Durr-ul-Manthoor Fi At-Tafsiri Bi-Al-Ma’thoor, 06/604,

19_Shawkani Fi Fat’h-ul-Qadir, 04/279,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/19, 20, Raqam-04.]

3-Sayyidah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Sab Jahaano’n Kee Sardaar Hain

Fasl : 03

فاطمة سلام الله عليها سيدة نساء العالمين

Sayyidah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Sab Jahaano’n Kee Sardaar Hain

 

05_             “Hazrat Aaishah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Se Riwaayat Hai Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Farmaya : Aye Fatima! Kya Too Nahin Chaahti Ki Too Tamaam Jahaano’n Kee Aurto’n, Meri Is Ummat Kee Tamaam Aurto’n Aur Mu’minin Kee Tamaam Aurto’n Kee Sardaar Ho!.”

[1_Hakim Ne ‘Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn (03/170, Raqam-4740)’ Me Ise Sahih Qaraar Diya Hai Jab Ki Dhahabi Ne Is Kee Taa’id Kee Hai.

2_Nasa’i Fi As-Sunan Al-Kubra, 04/251, Raqam-7078,

3_Nasa’i Fi As-Sunan Al-Kubra, 05/146, Raqam-8517,

4_Ibn Sa’d Fi At-Tabaqat Al-Kubra, 02/247, 248,

5_Ibn Sa’d Fi At-Tabaqat Al-Kubra, 08/26, 27,

6_Ibn Athir Fi Usd-ul-Ghabah Fi Ma’rifat-is-Sahabah, 07/218,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/21 Raqam-05.]

 

 

06_             “Hazrat Aaishah Siddiqah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Farmaati Hain Ki Hazrat Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Aa’in Aur Un Ka Chalna Hoobahoo Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ke Chalne Jaisa Tha. Pas Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Apne Lakhte Jigar Ko Khush Aamadeed Kaha Aur Apne Daa’in Ya Baa’in Jaanib Bitha Liya, Phir Chupke Chupke Un Se Koi Baat Kahi To Woh Rone Lagi’n, Pas Mein Ne Un Se Poochha Ki Kyoo’n Ro Rahi Hain? Phir Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Un Se Koi Baat Chupke Chupke Kahi To Woh Hans Padi’n. Pas Mein Ne Kaha Ki Aaj Kee Tarah Mein Ne Khushi Ko Gham Ke Itne Nazdeek Kabhi Nahin Dekha. Mein Ne (Hazrat Fatimat-uz-Zahra’ رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Se) Poochha : Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Kya Farmaya Tha? Unhone Jawaab Diya : Mein Rasool Allah صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ke Raaz Ko Faash Nahin Kar Sakti. Jab Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ka Wisaal Ho Gaya To Mein Ne Un Se (Us Baare Me) Phir Poochha To Unhone Jawaab Diya : Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Mujh Se Sargoshi Kee Ki Jibra’il Har Saal Mere Saath Qur’an Kareem Ka Aik Baar Daur Kiya Karte They Lekin Is Saal Do Martaba Kiya Hai, Mujhe Yaqeen Hai Ki Mera Aakhiri Waqt Aa Pahuncha Hai Aur Be Shak Mere Ghar Waalo’n Me Se Tum Ho Jo Sab Se Pehle Mujh Se Aa Milogi. Is Baat Ne Mujhe Rulaaya, Phir Aap صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Farmaya : Kya Tum Is Baat Par Raazi Nahin Ki Tum Tamaam Jannati Aurto’n Kee Sardaar Ho Ya Tamaam Musalamaan Aurto’n Kee Sardaar Ho! Pas Is Baat Par Mein Hans Padi.”

[1_Bukhari Fi As-Sahih, 03/1326, 1327, Raqam-3426, 3427,

2_Muslim Fi As-Sahih, 04/1904, Raqam-2450,

3_Ahmad Bin Hanbal Fi Al-Musnad, 06/282,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/21_23, Raqam-06.]

 

 

07_             “Hazrat Masrooq Riwaayat Karte Hain Ki Umm-ul-Mu’minin Hazrat Aaishah Siddiqah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Se Riwaayat Hai Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Sayyidah Fatimah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Se Farmaya : Aye Fatimah! Kya Too Is Baat Par Raazi Nahin Hai Ki Musalmaan Aurto’n Kee Sardaar Ho Ya Meri Is Ummat Kee Sab Aurto’n Kee Sardaar Ho!”

[1_Bukhari Fi As-Sahih, 05/2317, Raqam-5928,

2_Muslim Fi As-Sahih, 04/1905, Raqam-2450,

3_Nasa’i Fi Fada’il Al-Sahabah,/77, Raqam-263,

4_Ahmad Bin Hanbal Fi Fada’il As-Sahabah, 02/762, Raqam-1342,

5_Tayalisi Fi Al-Musnad, /196, Raqam-1373,

6_Ibn Sa’d Fi At-Tabaqat Al-Kubra, 02/247,

7_Doolabi Fi Adh-Dhurriyah At-Tahirah,/101, 102, Raqam-188,

8_Aboo Nu’aym Fi Hilyat-ul-Awliya’ Wa Tabaqat-ul-Asfiya’, 02/39, 40,

9_Dhahabi Fi Siyar A’lam-in-Nubala’, 02/130,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/23, Raqam-07.]

 

 

08_             “Hazrat Aboo Hurayrah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Se Riwaayat Hai Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Farmaya : Aasmaan Ke Aik Firishte Ne Meri Ziyaarat Nahin Kee Thi , Pas Us Ne Allah Ta’ala Se Meri Ziyaarat Kee Ijaazat Lee Aur Us Ne Mujhe Khush Khabari Sunaa’i (Ya) Mujhe Khabar Dee Ki Fatimah Meri Ummat Kee Sab Aurto’n Kee Sardaar Hain.”

[1_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 22/403, Raqam-1006,

2_Bukhari Fi At-Tarikh-ul-Kabir, 01/232, Raqam-728,

3_Haythami Ne ‘Majma’-uz-Zawa’id Wa Manba’-ul-Fawa’id (09/201)’ Me Kaha Hai Ki Ise Tabarani Ne Riwaayat Kiya Hai Aur Is Ke Rijaal Sahih Hain, Siwaa’e Muhammad Bin Marwan Dhuhali Ke, Use Ibn Hayyan Ne Thiqah Qaraar Diya Hai.

4_Dhahabi Fi Siyar A’lam An-Nubula’, 02/127,

5_Mizzi Fi Tahdhib-ul-Kamal, 26/391,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/23, 24, Raqam-08.]

4 -Sayyidah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Jannati Aurto’n Kee Aur Aap Ke Shahzaade Jannati Jawaano’n Ke Sardaar Hain

Fasl : 04

فاطمة سلام الله عليها سيدة نساء أهل الجنة و ابناها سيدا شباب أهل الجنة

Sayyidah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Jannati Aurto’n Kee Aur Aap Ke Shahzaade Jannati Jawaano’n Ke Sardaar Hain

 

09_             “Hazrat Hudhayfah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Bayaan Karte Hain Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Farmaya : Aik Firishta Jo Is Raat Se Pehle Kabhi Zameen Par Na Utra Tha, Us Ne Apne Parwardigaar Se Ijaazat Maangi Ki Mujhe Salaam Kar Ne Haazir Ho Aur Mujhe Yeh Khush Khabari De : Fatimah Ahl-E-Jannat Kee Tamaam Aurto’n Kee Sardaar Hai Aur Hasan Wa Husayn Jannat Ke Tamaam Jawaano’n Ke Sardaar Hain.”

[1_Tirmidhi Fi Al-Jami’ As-Sahih, 05/660, Raqam-3871,

2_Nasa’i Fi As-Sunan Al-Kubra, 05/80, 95, Raqam-8298, 8365,

3_Nasa’i Fi Fada’il Al-Sahabah,/58, 76, Raqam-193, 260,

4_Ahmad Bin Hanbal Fi Al-Musnad, 05/391,

5_Ahmad Bin Hanbal Fi Fada’il As-Sahabah, 02/788, Raqam-1406,

6_Ibn Abi Shaybah Fi Al-Musannaf, 06/388, Raqam-32271,

7_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 03/164, Raqam-4721, 4722,

8_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 22/402, Raqam-1005,

9_Bayhaqi Fi Al-I’tiqad,/328,

10_Aboo Nu’aym Fi Hilyat-ul-Awliya’ Wa Tabaqat-ul-Asfiya’, 04/190,

11-Muhibb Tabari Fi Dhakha’ir-ul-‘Uqba Fi Manaqibi Dhawi-‘l-Qurba,/224,

12_Dhahabi Fi Siyar A’lam-in-Nubala’, 03/123, 252,

13_Asqalani Fi Fat’h-ul-Bari Sharh Sahih Al-Bukhari, 06/471,

14_Suyooti Fi Tadrib-ur-Rawi Fi Sharh Taqrib Al-Nawawi, 02/156, 464,

15_Suyooti Fi Al-Khasa’is Al-Kubra, 02/156, 464,

16_Imam Bukhari Ne ‘As-Sahih (03/1360, Kitab Al-Manaqib)’ Me Qaraabate Rasool صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ke Manaaqib Ka Baab Baandhte Huwe Sayyidah Fatimah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Ke Hawaale Se Kaha : وقال النبي صلى الله تعالى عليه واله وسلم : فاطمة سيدة نساء أهل الجنة(Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Farmaya : Fatimah Ahle Jannat Kee Aurto’n Kee Sardaar Hain).

17_Imam Bukhari Ne Sayyidah Fatimah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Ke Manaaqib Ke Hawaale Se Yehi Unwaan ‘As-Sahih (03/1374)’ Me Do Baara Baandha Hai.

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/25, 26, Raqam-09.]

 

 

10_             “Hazrat Ali كَرَّمَ للهُ تَعَالىٰ وَجْهَهُ الْكَرِيْم Se Marwi Hai Ki Rasool Allah صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Sayyidah Fatimah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Se Farmaya : Kya Tumhein Is Baat Par Khushi Nahin Ki Ahle Jannat Kee Tamaam Aurto’n Kee Sardaar Ho Aur Tere Dono’n Bete Jannat Ke Tamaam Jawaano’n Ke.”

[1_Haythami Fi Majma’-uz-Zawa’id Wa Manba’-ul-Fawa’id, 09/201,

2_Bazzar Fi Al-Musnad, 03/102, Raqam-885,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/26, Raqam-10.]

 

 

11_             “Hazrat Abdullah Bin Abbas رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا Farmate Hain Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Zameen Par Chaar (04) Lakeerein Kheenchi’n, Aur Farmaya : Tum Jaante Ho Yeh Kya Hai? Sahaba-E-Kiram رِضْوَانُ اللهِ تَعَالىٰ عَلَيْهِمْ اَجْمَعِيْن Ne Arz Kiya : Allah Aur Us Ke Rasool صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Behtar Jaante Hain. Phir Rasool Allah صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Farmaya : Ahle Jannat Kee Tamaam Aurto’n Me Se Afzal Tareen (Chaar) Hain : Khadijah Bint Khuwaylid, Fatimah Bint Muhammad, Fir’awn Kee Biwi Aasiyah Bint Muzahim Aur Maryam Bint Imran رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُنَّ اَجْمَعِيْنَ.”

[1_Ahmad Bin Hanbal Fi Al-Musnad, 01/293, 316,

2_Nasa’i Fi As-Sunan Al-Kubra, 05/93, 94, Raqam-8355, 8364,

3_Nasa’i Fi Fada’il Al-Sahabah,/74, 76, Raqam-250, 259,

4_Ibn Hibban Fi As-Sahih, 15/470, Raqam-7010,

5_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 02/539, Raqam-3836,

6_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 03/174, 205, Raqam-4754, 4852,

7_Ahmad Bin Hanbal Fi Fada’il As-Sahabah, 02/760, 761, Raqam-1339,

8_Aboo Ya’la Fi Al-Musnad, 05/110, Raqam-2722,

9_Shaybani Fi Al-Ahad Wa’l-Mathani, 05/364, Raqam-2962,

10_Abd Bin Humayd Fi Al-Musnad, 01/205, Raqam-597,

11_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 11/336, Raqam-11928,

12_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 22/407, Raqam-1019,

13_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 23/07, Raqam-01, 02,

14_Bayhaqi Fi Al-I’tiqad,/329,

15_Ibn Abd-il-Barr Fi Al-Isti’ab Fi Ma’rifat Al-As’hab, 04/1821, 1822,

16_Nawawi Fi Tahdhib-ul-Asma’ Wa Al-Lughat, 02/608,

17_Dhahabi Ne ‘Siyar A’lam-in-Nubala’ (02/124)’ Me Ise Hazrat Abdullah Bin Abbas رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا Se Marfoo’ Hadith Qaraar Diya Hai.

18_Haythami Ne ‘Majma’-uz-Zawa’id Wa Manba’-ul-Fawa’id (09/223)’ Me Kaha Hai Ki Ise Ahmad, Aboo Ya’la Aur Tabarani Ne Riwaayat Kiya Hai, Aur Un Kee Bayaan Karda Riwayat Ke Rijaal Sahih Hain.

19_Asqalani Fi Fat’h-ul-Bari Sharh Sahih Al-Bukhari, 06/447,

20_Asqalani Fi Al-Isabah Fi Tamyiz-is-Sahabah, 08/55,

21_Husayni Fi Al-Bayan Wa’t-Ta’rif, 01/123, Raqam-316,

22_Manawi Fi Fayd-ul-Qadir Sharh Al-Jami’ As-Saghir, 02/53,

23_Qurtubi Fi Al-Jami’ Li-Ahkam Al-Qur’an (Tafsir Al-Qurtubi), 04/83,

24_Ibn Kathir Fi Tafsir Al-Qr’an Al-Azim, 04/394,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/27, 28, Raqam-11.]

 

 

12_             “Hazrat Salih رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Riwaayat Karte Hain Ki Umm-il-Mu’minin Hazrat Aaishah Siddiqah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Ne Sayyidah Fatimah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Se Kaha : Kya Mein Tumhein Khush Khabari Na Sunaau’n! (Woh Yeh Ki) Mein Ne Khud RasoolAllah صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ko Yeh Farmaate Huwe Suna : Ahle Jannat Kee Aurto’n Kee Sardaar Sirf Chaar Khawaatin Hain : Maryam Bint Imran, Fatimah Bint RasoolAllah صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم, Khadijah Bint Khuwaylid Aur Fir’awn Kee Biwi Aasiyah.”

[1_Ahmad Bin Hanbal Fi Fada’il As-Sahabah, 02/760, Raqam-1336,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/28, Raqam-12.]

5-Allah Ta’ala Ne Fatimah Aur Aale Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهِمْ Par Jahannam Kee Aag Haraam Kar Dee

Fasl : 05

حرم الله فاطمة سلام الله عليها و ذريتها على النار

Allah Ta’ala Ne Fatimah Aur Aale Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهِمْ Par Jahannam Kee Aag Haraam Kar Dee

 

13_             “Hazrat Abdullah Bin Abbas رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا Se Riwayat Hai Ki Huzoor صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Hazrat Fatimah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Se Farmaya : Allah Ta’ala Tumhein Aur Tumhari Aulaad Ko Aag Ka Azaab Nahin Dega.”

[1_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 11/210, Raqam-11685,

2_Haythami Ne ‘Majma’-uz-Zawa’id Wa Manba’-ul-Fawa’id (09/202)’ Me Kaha Hai Ki Ise Tabarani Ne Riwaayat Kiya Hai Aur Is Ke Rijaal Thiqah Hain.

3_Sakhawi Fi ‘Istijlabu Irtiqa’-il-Ghurafi Bi-Hubbi Aqriba’ Ar-Rasooli SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa-Aalihi Wa-Sallam Wa Dhaw-ish-Sharaf, /117,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/29, Raqam-13.]

 

 

14_             “Hazrat Abdullah Bin Mas’ood رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا Se Riwayat Hai Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Farmaya : Be Shak Fatimah Ne Apni Ismat Wa Paak Daamani Kee Aisi Hifaazat Kee Hai Ki Allah Ta’ala Ne Use Aur Us Kee Aulaad Ko Aag Se Mahfooz Farma Diya Hai.”

[1_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir, 22/407, Raqam-1018,

2_Bazzar Fi Al-Musnad, 05/223, Raqam-1829,

3_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 03/165, Raqam-4726,

4_Aboo Nu’aym Fi Hilyat-ul-Awliya’ Wa Tabaqat-ul-Asfiya’, 04/188,

5_Sakhawi Fi Istijlabu Irtiqa’-il-Ghurafi Bi-Hubbi Aqriba’ Ar-Rasooli SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa-Aalihi Wa-Sallam Wa Dhaw-ish-Sharaf, 01/115, 116,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/29, 30, Raqam-14.]

 

 

15_             “Hazrat Jabir Bin Abdullah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا Se Riwayat Hai Ki Rasool Allah صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ne Farmaya : Meri Beti Ka Naam Fatimah Is Liye Rakkha Gaya Hai Ki Allah Ta’ala Ne Use Aur Us Se Mahabbat Rakhne Waalo’n Ko Dozakh Se Alag Thalag Kar Diya Hai.”

[1_Daylami Fi Musnad-ul-Firdaws, 01/346, Raqam-1385,

2_Hindi Ne ‘Kanz-ul-‘Ummal Fi Sunan Al-Aqwal Wa-Al-Af’al (12/109, Raqam-34227)’ Me Kaha Hai Ki Ise Daylami Ne Hazrat Aboo Hurayrah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Se Riwaayat Kiya Hai.

3_Sakhawi Ne ‘Istijlabu Irtiqa’-il-Ghurafi Bi-Hubbi Aqriba’ Ar-Rasooli SallAllahu Ta’ala ‘Alayhi Wa-Aalihi Wa-Sallam Wa Dhaw-ish-Sharaf (Saf’h : 96)’ Me Kaha Hai Ki Ise Daylami Ne Hazrat Aboo Hurayrah Se Riwaayat Kiya Hai.

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/30, Raqam-15.]

6-Sayyidah Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Kee Waalida Afzal-un-Nisa’ Hain

Fasl : 06

أم فاطمة سلام الله عليهما أفضل النساء

Sayyidah Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Kee Waalida Afzal-un-Nisa’ Hain

 

16_             “Hazrat Abdullah Bin Ja’far Riwaayat Karte Hain Ki Mein Ne Hazrat Ali كَرَّمَ للهُ تَعَالىٰ وَجْهَهُ الْكَرِيْم Se Suna Woh Farma Rahe They Ki Mein Ne Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Ko Yeh Farmaate Huwe Suna : (Apne Zamaana Kee Aurto’n Me) Sab Se Afzal Khadijah Bint Khuwaylid Hain, Aur (Apne Zamaana Kee Aurto’n Me) Sab Se Afzal Maryam Bint Imran Hain.”

[1_Tirmidhi Fi Al-Jami’ As-Sahih, 05/702, Raqam-3877,

2_Ahmad Bin Hanbal Fi Al-Musnad, 01/116, 132,

3_Aboo Ya’la Fi Al-Musnad, 01/455,

4_Ahmad Bin Hanbal Fi Fada’il As-Sahabah, 02/852, Raqam-1580,

5_Ibn Abd-il-Barr Fi Al-Isti’ab Fi Ma’rifat Al-As’hab, 04/1823,

6_Dhahabi Fi Siyar A’lam-in-Nubala’, 02/113,

7_Asqalani Fi Fat’h-ul-Bari Sharh Sahih Al-Bukhari, 06/447,

8_Asqalani Fi Fat’h-ul-Bari Sharh Sahih Al-Bukhari, 07/107,

9_Asqalani Fi Al-Isabah Fi Tamyiz-is-Sahabah, 07/602,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/31, Raqam-16.]

 

 

17_             “Hazrat Abdullah Bin Ja’far رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Riwaayat Karte Hain Ki Mein Ne Hazrat Ali كَرَّمَ للهُ تَعَالىٰ وَجْهَهُ الْكَرِيْم Ko Koofah Me Yeh Farmaate Huwe Suna : Maryam Bint Imran Aur Khadijah Bint Khuwaylid Zameen-o-Aasmaan Me Sab Aurto’n Se Behtar Hain.”

 

“(Raawi) Aboo Kurayb Kehte Hain Ki Waki’ Ne (Yeh Hadith Bayaan Karte Huwe) Zameen-o-Aasmaan Kee Taraf Ishaara Kiya.” 

[1_Muslim Fi As-Sahih, 04/1886, Raqam-2430,

2_Bukhari Fi As-Sahih, 03/1265, 1388, Raqam-3249, 3604,

3_Nasa’i Fi As-Sunan Al-Kubra, 05/39, Raqam-8354,

4_ Ahmad Bin Hanbal Fi Al-Musnad, 01/84, 143,

5_Abd-ur-Razzaq Fi Al-Musannaf, 07/492, Raqam-14006,

6_Ibn Abi Shaybah Fi Al-Musannaf, 06/390, Raqam-32289,

7_Bazzar Fi Al-Musnad, 02/115,  Raqam-468,

8_Aboo Ya’la Fi Al-Musnad, 01/399, Raqam-522,

9_Nasa’i Fi Fada’il As-Sahabah,/74, Raqam-249,

10_Ahmad Bin Hanbal Fi Fada’il As-Sahabah, 02/847, 852, Raqam-1563, 1579, 1583,

11_Shaybani Fi Al-Ahad Wa’l-Mathani, 05/380, Raqam-2985,

12_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 02/539, Raqam-3837,

13_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 03/203, 657, Raqam-4847, 6419,

14_Bayhaqi Fi As-Sunan Al-Kubra, 06/367,

15_Tabarani Fi Al-Mu’jam-ul-Kabir,/18, 23, Raqam-04,

16_Mahamili Fi Amali,/188, Raqam-164,

17_Doolabi Fi Adh-Dhurriyah At-Tahirah,/37, Raqam-28,

18_Ibn Abd-il-Barr Fi Al-Isti’ab Fi Ma’rifat Al-As’hab, 04/1824,

19_Ibn Jawzi Fi Sifat-us-Safwah, 02/03,

       Wazaahat : In Ahaadith Ka Mutadhakkara Baala Fasl 03 Aur 04 Ahaadith Se Koi Ta’aaruz Nahin Hai Kyoo’n Ki In Kee Fazeelat Zamaani Hai, Ya’ni Un Ke Apne Apne Zamaano’n Me Khawaatine Aalam Me Se Koi Un Ke Hum Palla Na Thi. Magar Sayyida-E-Kaa’enaat سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Kee Afzaliyyat Umoomi Aur Mutlaq Hai, Jo Sab Se Jahaano’n Aur Zamaano’n Ko Muhit Hai.

 

Baqaul Allama Iqbal :

مریم          از           یک             نسبت          عیسی              عزیز   

از        سہ             نسبت     حض       زہرا                عزیز

نور                چشم               رحمة                      للعالمین

آں                 امام                 اولین          و           آخریں

بانوۓ                    آں           تاج دار              ہل              اتی

مرتضی        مشکل          گشا              شیر             خدا

مادر               آں            مرکز              پرگار                عشق

مادر             آں          کارواں                 سالار             عشق

در         نواۓ          زندگی          سوز        از         حسین

اہل       حق           حریت           آموز        از         حسین

مزرع          تسلیم            را             حاصل           بتول

مادراں         را      اسوهٔ                     کامل              بتول

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/31_33, Raqam-17.]

7-Farmane Rasool صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم …….. Fatimah! Mere Maa’n Baap Tujh Par Qurbaan

Fasl : 07

قول الرسول صلى الله تعالى عليه وآله وسلم….. فداك أبى وأمى يا فاطمة!

Farmane Rasool صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم …….. Fatimah! Mere Maa’n Baap Tujh Par Qurbaan

 

18_             “Hazrat Abdullah Bin Umar رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُمَا Se Riwayat Hai Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Jab Safar Ka Iraada Farmate To Apne Ahl-o-Ayaal Me Se Sab Ke Baa’d Jis Se Guftagu Kar Ke Safar Par Rawaana Hote Woh Sayyidah Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Hoti’n, Aur Safar Se Waapasi Par Sab Se Pehle Jis Ke Paas Tashrif Laate Woh Bhi Hazrat Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Hoti’n, Aur Yeh Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Sayyidah Fatimah سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا Se Farmate : (Fatimah!)  Mere Maa’n Baap Tujh Par Qurbaan Ho’n.”

[1_Hakim Fi Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn, 03/170, Raqam-4740,

2_Ibn Hibban Fi As-Sahih, 02/470, 471, Raqam-696,

3_Haythami Fi Mawarid Al-Zam’an Ila Zawa’id Ibn Habban,/631, Raqam-2540,

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/34, Raqam-18.]

 

 

19_             “Hazrat Umar Bin Khattab رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهُ Se (Bhi) Marwi Hai Ki Huzoor Nabiyye Akram صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّم Sayyidah Fatimah رَضِىَ اللهُ تَعَالىٰ عَنْهَا Se Farmaate They : (Fatimah!) Mere Maa’n Baap Tujh Par Qurbaan Ho’n.”

[Shawkani Ne ‘Darr-us-Sahabah Fi Manaqib-il-Qarabah Wa’s-Sahabah (Saf’h : 279)’ Me Kaha Hai Ki Ise Hakim Ne ‘Al-Mustadrak ‘Ala Sahihayn’ Me Riwaayat Kiya Hai.

Ad-Durrat-ul-Bayda’ Fi Manaqibi Fatimat-uz-Zahra’ سَلاَمُ اللهِ عَلَيْهَا,/34, Raqam-19.]

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