कर्बला के पांचवें शहीद हज़रते खज़ला इब्ने उमर अल-शीबानी

🔰कर्बला के पांचवें शहीद हज़रते खज़ला इब्ने उमर अल-शीबानी

आप इमामे हुसैन अलै० के वफ़ादरों में थे। आप इमामे हुसैन अलै० पर कुरबान होने को तय्यार रहते थे। आले मोहम्मद की ख़िदमत में जान कुरबान करने में खुशी महसूस करते थे। सुबहे आतूर जो दुश्मन की तरफ से कयामत खेज़ हमला हुआ था जनाबे ख़ज़ला इसी में शहीद हो गये थे।

कर्बला के छठवें शहीद हज़रते कासित बिन ज़ुहैर अल-तग़लबी अलैहिस्सलाम

💠 कर्बला के छठवें शहीद हज़रते कासित बिन ज़ुहैर अल-तग़लबी अलैहिस्सलाम

आप का पूरा नाम कासित इब्ने ज़ुहैर इब्ने हारिस तग़लबी है। आप हज़रत अमीरूल मोमिनीन के असहाब में से थे। इन की बहादुरी के कारनामे मशहूर हैं। जंगे जमल व सिफ़्फ़ीन और नहरवान में आपने पूरी जाँबाज़ी की है और बड़ी बे-जिगरी से लड़े हैं। आप को जब ये मालूम हुआ कि र्ज़न्दे रसूल इमाम हुसैन अलै० करबला में पहुँच गये है तो आप रात के वक़्त कूड़े से रवाना हो कर वारिदे करबला हुऐ और आप ने सुबहे आशूर इमाम हुसैन अलै० पर जान दे दी।

कर्बला सातवें शहीद हज़रते करदूस बिन जु़हैर-अल-तगलबी)

💠कर्बला सातवें शहीद हज़रते करदूस बिन जु़हैर-अल-तगलबी)

आप का नाम कदूस इब्ने जुहैर हरस अल-तगुलबी था आप को कर्श भी कहते थे। आप सित इब्ने जुहैर के हकीकी भाई थे और असहाबे अमीरुल मोमिनीन में आप का शुमार था। आप के एक भाई और थे जिनका नाम मस्कृत इब्ने जुहैर था। यह भी सहाबी-ए-अमीरुल मोमिनीन थे। एक रिवायत की बिना पर ये तीन भाई एक साथ ब-वक़्ते शब करबला पहुँचे थे और यौमे आशूर एक ही साथ शहीद हुऐ थे।

कर्बला के आठवें शहीद हज़रते कनाना इब्ने अतीक अल-तग़लबी

♦️कर्बला के आठवें शहीद हज़रते कनाना इब्ने अतीक अल-तग़लबी

आप कूफ़े के मशहूर पहलवानों में थे नबर्द आज़माई आप का वतीरह था। बड़ी बे-जिगरी से लड़ते थे। आप इबादत गुज़ारी में भी बे-नज़ीर थे क्रिअते कुरआन में भी ख़ास शोहरत के मालिक थे करबला में इमाम हुसैन की ख़िदमत में हाज़िर होकर यौमे आशूरा शहीद हुऐ।
📝72 तारे, अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम

कर्बला के नौवें शहीद हज़रते उमर इब्ने सबीकह अल सनबई

कर्बला के नौवें शहीद हज़रते उमर इब्ने सबीकह अल सनबई

आप का पूरा नाम उमर इब्ने सबीकह इब्ने कैस इब्ने सअलबता सनबई था। आप निहायत शुजा और अज़ीम शह सवार थे। इब्ने साद की कोशिशो से इमाम हुसैन अलै० के मुकाबले के लिये कूफ़े से करबला आये थे। लेकिन सही हालात से ब-ख़बर होने के बाद आप ने मक़सदे इब्ने साद व इब्ने ज़्याद पर लानत कर दी और लश्कर को खैरबाद कह कर इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत में हाज़िर हो गये और सुबहे आशूर शहीद हो कर राही-ए-जन्नत हुये।