जब रोम के बादशाह ने सहाबा को अल्लाह के रसूल (ﷺ) की तस्वीर दिखाई

**ईमान अफ़रोज़ वाक़िया: जब रोम के बादशाह ने सहाबा को अल्लाह के रसूल (ﷺ) की तस्वीर दिखाई!**
इरादे पक्के हों और ईमान सच्चा, तो रब्ब-उल-आलमीन दुनिया के बड़े-बड़े बादशाहों के सामने भी अपने महबूब (ﷺ) की अज़मत का परचम बुलंद कर देता है।
इस्लामी तारीख़ (*अल्-बिदाया वन-निहाया*) का एक बेहद ख़ास और रूहानी वाक़िया है, जो हर मुसलमान के दिल को ईमान की मिठास से भर देता है।
📜 **वाक़िए का पस-मंज़र (Background)
हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ि.) के दौर-ए-ख़िलाफ़त में, सहाबी **हज़रत हिशाम बिन अल-आस (रज़ि.)** और उनके साथी को रोम (Byzantium) के बहुत बड़े बादशाह **‘हिरक़्ल’ (Heraclius)** के पास इस्लाम का पैग़ाम लेकर भेजा गया।
जब सहाबा-ए-किराम (रज़ि.) रूम के शाही दरबार में पहुँचे और इस्लाम की दावत दी, तो बादशाह ने उनका बहुत एहतराम किया। बातचीत के बाद बादशाह उन्हें महल के एक ख़ास और बेहद महफ़ूज़ कमरे में ले गया।

###  **रेशम के कपड़े और सोने का सन्दूक**
बादशाह हिरक़्ल ने एक बड़ा, सोने का सन्दूक मँगवाया। उस सन्दूक के अंदर रेशम (Silk) के अलग-अलग रंगीन टुकड़े रखे हुए थे, और हर रेशम के कपड़े पर किसी न किसी नबी (अलैहिस्सलाम) की तस्वीर (शबीह) बनी हुई थी।
बादशाह ने एक-एक करके कपड़े निकालना शुरू किया:
* 🔹 सब-पहले **हज़रत आदम (अलैहि.)** की तस्वीर दिखाई।
* 🔹 फिर **हज़रत नूह (अलैहि.)**, **हज़रत इब्राहिम (अलैहि.)**, **हज़रत मूसा (अलैहि.)**, और **हज़रत ईसा (अलैहि.)** समेत कई अंबिया-ए-किराम की तस्वीरें दिखाईं।
हर तस्वीर को देखकर सहाबा-ए-किराम हैरान रह गए कि उनका हुस्न और रौब कितना बेमिसाल था!

**आका-ए-दो जहाँ (ﷺ) की मुक़द्दस तस्वीर**
आख़िर में बादशाह ने काले रेशम का एक टुकड़ा निकाला… जिस पर एक निहायत हसीन, नूरानी और रौबदार ज़ात की तस्वीर बनी हुई थी।
जैसे ही सहाबा-ए-किराम (रज़ि.) की नज़र उस मुक़द्दस चेहरे पर पड़ी, उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े! दिल तड़प उठा और उन्होंने बिला-झिझक पुकार उठाया:
> **”अल्लाह की क़सम! ये तो हमारे आका, हमारे हबीब, हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हैं!”**
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यह सुनकर बादशाह हिरक़्ल ताज़ीम में खड़ा हो गया और उसने भी तस्दीक़ की कि हाँ, यह आख़िरी नबी की ही तस्वीर है।
###  **ये तस्वीरें बादशाह के पास कहाँ से आयीं?**
जब सहाबा ने हैरत से पूछा कि यह सन्दूक आपके पास कहाँ से आया? तो हिरक़्ल ने बताया:
> *”जब हज़रत आदम (अलैहि.) को ज़मीन पर भेजा गया था, तो अल्लाह तआला ने उन्हें आने वाले तमाम अंबिया-ए-किराम के हुलिये दिखाए थे। हज़रत आदम (अलैहि.) ने उन्हें महफ़ूज़ किया, और यह सन्दूक नस्ल-दर-नस्ल चलते हुए हज़रत इब्राहिम (अलैहि.) से होता हुआ आज रोम के शाही ख़ज़ाने तक पहुँचा है।”*
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## **सबक़ (Moral)
बादशाह हिरक़्ल को दिल से पूरा यक़ीन हो गया था कि मोहम्मद (ﷺ) ही अल्लाह के सच्चे और आख़िरी रसूल हैं, जिनकी बशारत उनकी आसमान किताबों (तौरात व इंजील) में मौजूद थी। लेकिन अपनी सल्तनत और तख़्त के डर से वह ज़ाहिरी तौर पर ईमान न ला सका।
अल्लाह तआला हमें अपने प्यारे नबी (ﷺ) से सच्ची मोहब्बत करने और उनके बताए हुए सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। (आमीन)

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