
Nahjul Balagha khutbah 51 to 54 | Mufti Fazal Hamdard






5. मुंज़िर बिन सावी के नाम पत्र
नबी सल्ल० ने एक पत्र मंज़िर बिन सावी, बहरैन के हाकिम के पास लिखकर उसे भी इस्लाम की दावत दी और इस पत्र को हज़रत अला बिन हज़रमी रज़ि० के हाथों रवाना फ़रमाया। जवाब में मुंज़िर ने रसूलुल्लाह सल्ल० को लिखा-
‘ऐ अल्लाह के रसूल ! मैंने आपका पत्र बहरैन वालों को पढ़कर सुना दिया । कुछ लोगों ने इस्लाम को मुहब्बत और पाकीज़गी की नज़र से देखा और उसे स्वीकार कर लिया और कुछ ने पसन्द नहीं किया और मेरी ज़मीन में यहूदी और मजूसी भी हैं, इसलिए आप इस बारे में अपना फ़रमान जारी कीजिए। इसके जवाब में रसूलुल्लाह सल्ल० ने यह पत्र लिखा-
‘बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
मुहम्मद रसूलुल्लाह की ओर से मुंज़िर बिन तुम पर सलाम हो। मैं तुम्हारी ओर अल्लाह की प्रशंसा करता हूं जिसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं और मैं गवाही देता हूं कि मुहम्मद उसके बन्दे और रसूल हैं।
सावी की तरफ़
इसके बाद मैं तुम्हें अल्लाह की याद दिलाता हूं। याद रहे कि जो व्यक्ति भलाई करेगा और भला चाहेगा, वह अपने ही लिए भलाई करेगा और जो व्यक्ति मेरे दूतों की इताअत और उनके हुक्म की पैरवी करे, उसने मेरी इताअत की और जो उनके साथ भला चाहे, उसने मेरा भला चाहा और मेरे दूतों ने तुम्हारी अच्छी तारीफ़ की है और मैंने तुम्हारी क़ौम के बारे में तुम्हारी सिफ़ारिश मान ली है, इसलिए मुसलमान जिस हाल पर ईमान लाए हैं उन्हें उस पर छोड़ दो और मैंने ख़ताकारों को माफ़ कर दिया है, इसलिए उनसे कुबूल कर लो और जब तक तुम सुधार का रास्ता अपनाए रहोगे, हम तुम्हें तुम्हारे काम से अलग न करेंगे और जो
1. देखिए ज़ादुल मआद 2/122, टिप्पणी तलफ़ीहुल फ़हूम पृ० 29
यहूदी या मजूसी मत पर कायम रहे, उस पर जिज़या है।
6. हौज़ा बिन अली, साहिबे यमामा के नाम पत्र
नबी सल्ल० ने हौज़ा बिन अली यमामा के हाकिम के नाम नीचे लिखा पत्र लिखा-
‘बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
मुहम्मद रसूलुल्लाह की ओर से हौज़ा बिन अली की तरफ़
उस आदमी पर सलाम जो हिदायत की पैरवी करे। तुम्हें मालूम होना चाहिए कि मेरा दीन ऊंटों और घोड़ों की पहुंच की आखिरी हद तक ग़ालिब आकर रहेगा, इसलिए इस्लाम लाओ, सालिम (सुरक्षित) रहोगे और तुम्हारे मातहत जो कुछ है, उसे तुम्हारे लिए बरक़रार रखूंगा।’
इस पत्र को पहुंचाने के लिए क़ासिद की हैसियत से सुलैत बिन अम्र आमिरी का चुनाव किया गया, हज़रत सुलैत इस मुहर लगे हुए पत्र को लेकर हौज़ा के पास तशरीफ़ ले गए, तो उसने आपको मेहमान बनाया और मुबारकबाद दी। हज़रत सुलैत ने उसे पत्र पढ़कर सुनाया तो उसने दर्मियानी क़िस्म का जवाब दिया और नबी सल्ल० की सेवा में यह लिखा-
आप जिस चीज़ की दावत देते हैं, उसके बेहतर और अच्छा होने का क्या पूछना और अरब पर मेरा रौब बैठा हुआ है, इसलिए कुछ कारपरदाज़ी मेरे ज़िम्मे करें। मैं आपकी पैरवी करूंगा। उसने हज़रत सुलैत को उपहार भी दिए। उन्हें हिज्र का बना हुआ कपड़ा दिया ।
हज़रत सुलैत ये उपहार लेकर नबी सल्ल० की खिदमत में वापस आए और सारी बातें सुनाई। नबी सल्ल० ने उसका पत्र लेकर फ़रमाया, अगर वह ज़मीन का एक टुकड़ा भी मुझसे तलब करेगा, तो मैं उसे न दूंगा। वह खुद भी तबाह होगा और जो कुछ उसके हाथ में है, वह भी तबाह होगा ।
फिर जब अल्लाह के रसूल सल्ल० मक्का जीतने के बाद वापस तशरीफ़ लाए, तो हज़रत जिब्रील अलै० ने यह ख़बर दी कि हौज़ा का देहान्त हो चुका है। नबी सल्ल० ने फ़रमाया, सुनो, यमामा में एक झूठा आदमी ज़ाहिर होने वाला
1. ज़ादुल मआद 3/61, 62 यह पत्र निकट अतीत में मिला है और डाक्टर हमीदुल्लाह साहब ने इसका फोटा छापा है। ज़ादुल मआद का लिखा और इस फोटो के लिखे में सिर्फ़ एक शब्द का अन्तर है, (यानी फोटो में) ला इला-ह इल्ला हु-व के बजाए ला इला-ह ग़ैरुह है।
है, जो मेरे बाद क़त्ल किया जाएगा। एक कहने वाले ने कहा, ऐ अल्लाह के रसूल ! उसे कौन क़त्ल करेगा ? आपने फ़रमाया, तुम और तुम्हारे साथी, और सचमुच ऐसा ही हुआ। ‘
7. हारिस बिन अबी शिम्र ग़स्सानी, दमिश्क़ के हाकिम के नाम पत्र नबी सल्ल० ने उसके पास नीचे लिखा पत्र भेजा। बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम मुहम्मद रसूलुल्लाह की ओर से हारिस बिन अबी शिम्र की ओर उस आदमी पर सलाम जो हिदायत की पैरवी करे और ईमान लाए और तस्दीक़ करे और मैं तुम्हें दावत देता हूं कि अल्लाह पर ईमान लाओ जो तंहा है और जिसका कोई शरीक नहीं और तुम्हारे लिए तुम्हारी बादशाही बाक़ी रहेगी।
यह पत्र क़बीला असद बिन खुज़ैमा से ताल्लुक रखने वाले एक सहाबी हज़रत शुजाअ बिन वब के हाथों रवाना किया गया। जब उन्होंने यह पत्र हारिस के हवाले किया, तो उसने कहा, ‘मुझसे मेरी बादशाही कौन छीन सकता है ? मैं उस पर धावा बोलने ही वाला हूं।’ और वह इस्लाम न लाया,2 बल्कि क़ैसर से अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के खिलाफ लड़ाई की इजाज़त चाही, मगर उसने उसको उसके इरादे से बाज़ रखा, फिर हारिस ने शुजाअ बिन वहब को उपहार और खर्चा देकर अच्छाई के साथ वापस कर दिया।