
मेरे बाद मेरी उम्मत मेरी अहल-ए-बैत को क़त्ल करेगी
अरबी मत्न + तर्जुमा हिन्दी लिपि में:
हदीस:
अख़बरनी मुहम्मद बिनुल मुअम्मल बिनुल हसन, हद्दसना अल-फज़ल बिन मुहम्मद, सना नु’ऐम बिन हम्माद, सना अल-वलीद बिन मुस्लिम, अन अबी राफ़ि’ इस्माईल बिन राफ़ि’, अन अबी नज़रा, क़ाल: क़ाल अबू सईद अल-ख़ुदरी रज़ि. अल्लाहु अन्हु, क़ाल रसूलुल्लाहि सल्लाहु अलैहि व सल्लम:
*”इन्न अह्ल बैती सयलक़ौना मिन बअदी उम्मती क़त्लन व तश्रीदन, व इन्न अशद्द क़ौमिना लना बुग्ज़न बनू उमय्या, व बनू अल-मुग़ीरह, व बनू मख़ज़ूम”*
“हाज़ा हदीसुन सहीहुल इस्नादि, व लम युखरिजाहु”
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तर्जुमा हिन्दी लिपि में:
हज़रत अबू सईद ख़ुदरी रज़ि. अल्लाहु अन्हु फरमाते हैं
कि रसूलुल्लाह ﷺने इरशाद फरमाया:
“मेरे बाद मेरी उम्मत मेरी अहल-ए-बैत को क़त्ल करेगी और भगा-भगा कर मारेगी।
और मेरी उम्मत में सबसे ज़्यादा बुग्ज़ रखने वाले लोग बनू उमय्या, बनू मुग़ीरह और बनू मख़ज़ूम होंगे।”
हवाला: मुस्तदरक हाकिम: 8500
इमाम हाकिम फरमाते हैं: “ये हदीस सहीहुल इस्नाद है, लेकिन इमाम बुखारी और इमाम मुस्लिम ने इसे नक़ल नहीं किया”
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खुलासा:
इस हदीस में नबी ﷺ ने पहले ही बता दिया था कि अहल-ए-बैत पर ज़ुल्म होगा और कुछ क़बीले उनसे सबसे ज़्यादा अदावत रखेंगे।
अल्लाह हम सबको अहल-ए-बैत की सच्ची मोहब्बत नसीब फरमाए। आमीन

