
कर्बला के 46वें शहीद हज़रते उमर इब्ने खालिद-अल-सीदादी
आपका पूरा नाम उमर इब्ने खालिद अल-असदी था और आप की कुन्नियत अबू खालिद थी। आप मकाम सहरा के रहने वाले थे और कूफ़े के शुरफा में से थे। आप को मोहब्बते अहलेबैत में कमाल हासिल था। हज़रते मुस्लिम इब्नै अकील की पूरी हिमायत की थी और शहादते हज़रते मुस्लिम के बाद आपने मजबूरन रू-पोशी इख़्तेयार की थी। आप को जब मालूम हुआ कि इमामे हुसैन अलै० मक्का से कूफा पहुँच रहे हैं तो आप गैर मारूफ रास्तो से रवाना होकर मंजिले अजीब ‘हजानात” में हाज़िरे ख़िदमत हो गये और कवला पहुँच कर यौमे आशूरा उरूसे शहादत से हम किनार हो गये। अबद मुक़फ़ का ब्यान है कि ये इब्ने ख़ालिद जंग करते-करते सख़्त घेरे में आ गये तो इमामे हुसैन अलै० ने हज़रते अब्बास को उनकी मद्द के लिये भेजा था आप ने पूरी मद्द की आख़िर में आप शहीद हो गये। (ज़िक्र-अल-अब्बास सफा न० 223)

