इमाम हसन अलैहिस्सलाम को माविया ने ज़हर दिलवाया

🔥 इमाम हसन अलैहिस्सलाम को माविया ने ज़हर दिलवाया..🔥

✍️ इमाम उल मुवर्रिखीन अबुल हसन बिन हुसैन बिन अली अल मसूदी रह० [मतवफ्फह 346 हिजरी] ने ‘मरूजुज़्जहब’ में सफा नं 363 पर लिखा है कि-
‘हजरत हसन रजिअल्लाह अन्हु को उनकी बीवी जअदह बिन असअश बिन कैश किंदी ने जहर दिया था, और उसे माविया ने इस काम पर उकसाया था। माविया ने उससे कहा था कि अगर उसने यह काम कर दिया तो वह [माविया] उसे एक लाख दिरहम देने के अलावा अपने बेटे यजीद से उसकी शादी कर देंगे,- जब जआदह ने माविया के मिशन के मुताबिक जनाब हसन रजिअल्लाह अन्हु को ज़हर देकर मार डाला तो माविया ने उसे वादे के तहत एक लाख दिरहम तो भेज दिए लेकिन इसके साथ यह भी कहलवाया-
‘हमें यजीद की जिंदगी अज़ीज़ है अगर इसके साथ तेरी शादी कर दी गई तो तेरे हाथों इसकी जान भी जा सकती है।’
 
तारीख ए अबुल फिदा के सफा नंबर 164 पर भी है कि ‘इमाम हसन की वफात की वजह वो जहर है जिसको उसकी बीवी जआदह ने माविया के कहने पर दिया था…और जब माविया को खबर मिला कि इमाम हसन फौत हो गये हैं तो सजदा-ए-शुक्र में गिर पड़ा और खुश हुआ।’

बरेलवी मसलक के मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना शफी ओकाड़वी ने ‘यजीद पलीद और इमाम पाक’ में सफा नं 188 पर यही बात लिखा है।

मुफ्ती गुलाम रसूल नक्सबंदी (दारुल उलूम कादिरिया जीलानिया, लंदन) ने ‘इमाम हसन और खिलाफत ए राशिदा’ में सफा नं 185 से 186 पर और फिर सफा नं 190 से 191 पर लिखा है कि ‘इमाम हसन को माविया ने जहर दिलवाया था।
देखें 👇
https://archive.org/details/ImamEHassanAurKhilafatERashida/page/n183/mode/1up?view=theater

हयात उल हैवान की पहली जिल्द में सफा नं 172 पर इमाम इब्ने खल्कान के हवाले से है कि जब माविया ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम की वफात की खबर सुना तो इसके दरबार में बुलंद आवाज में तक्बीर की गूंज सुनाई दी और माविया ने कहा आज मेरे दिल को राहत हुआ है फिर सफा 173 पर लिखते हैं कि इमाम हसन की वफात जहर से हुआ 👇
https://archive.org/details/HayatUlHaywan/HAYAAT_UL_HAIWAAN_VOL_1/page/n173/mode/1up?view=theater

सफा 66 पर इमाम खल्कान की इस पूरी इबारत को देखें फिर हैयात उल हैवान के तर्जुमा देखें 👇
https://archive.org/details/2_20220803_20220803_0640/page/n65/mode/1up?view=theater

इमाम शमशुद्दीन ज़हबी ने सियर अलामिन नुबला (3/274) में, इमाम बलाज़री ने अनशाब उल अशराफ (1/389) में, इमाम अहमद नकरी हनफी ने ‘किताब दस्तूर उल उलेमा व जामेह उल उलूम फी इस्तलिहात ए अल फुनून (4/50)’ में, इमाम इब्ने अल वरदी ने तारीख ए इब्ने वरदी (1/158) में,इमाम जमख्सरी ने रबी उल अबरार में, इमाम अशफ्हानी ने मकातिलित्तालीबीन (1/13 व 20) में, इमाम इब्ने आशम शाफाई ने किताब अल फतूह (4/319) में, इमाम अब्दुल बर्र ने अल इस्तियाब (1/389) में, इमाम सिब्ते इब्ने ज़ौजी ने तजकिरातुल ख्वास में, इमाम इब्ने कसीर दमिश्की ने ‘अल बिदाया वन निहाया’ में, इमाम इब्ने जरीर तबरी ने तारीख ए तबरी में, इमाम तबरानी ने मुअज्जमल कबीर (3/71, रकम 2694) में, अल्लामा नूरुद्दीन ज़ामी ने शवाहिद उन नबूवत में लिखा है कि माविया के उकसाने पर जआदह बिन असअश ने अपने शौहर इमाम हसन अलैहिस्सलाम को ज़हर दिया था।
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इमाम हसन के जनाजे पर बनी उमय्या ने तीर चलवाए और इख्तिलाफ हुआ 👇
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Ahlebait Rehmat ki Chabiyan hai

Ham #Ahlebait Rehmat ki Chabiyan hai

Hazrat #Abdullah ibne #Abbas RA se Riwayat hai ke #Rasulullahﷺ ne Irshad Farmaya : Ham #Ahlebait (عليه السلام)  Rehmat ki Chabiyan hai aur #Risalat ka Mourad ( Source ) hai aur #Farishton ki Aamd o Raft ka Mahal aur Ilm ki Kaan ( Mine) hai.

Page no:-  51-9
Fraid ul Simtain fi Fazayil al Murtaza wal Batool wal Sibtain by Imam ibrahim bin muhammad al jwaini  r.a ( Arabi )

Writer :- Shaikh e Khurasan, Mohaddis e Kabeer, Ibrahim bin Muhammad bin Al Maveed Abi Bakr Jovaini 822 Hijri

Noor us Saqalain ( Urdu Translation )
Translator:- Allama Safdar Raza Qadri

गदीर के मुनकिर को हज़रत अली अलैहिस्सलाम की बद्दुआ है*

*गदीर के मुनकिर को हज़रत अली अलैहिस्सलाम की बद्दुआ है*✋

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*अब्दुर्रहमान बिन अबी लैला से मरवी है,वो कहते हैं-में रहबा में सैयदना अली अलैहिस्सलाम के पास मोजूद था,उन्होंने कहा : में हर उस आदमी को अल्लाह का वास्ता देकर कहता हूं जो “गदीर ए खूम” वाले दिन रसूल अल्लाह स्वल्लालहो अलयहे वा आलेही वा सल्लम के पास मोजूद था और आप अलेहिस्सलाम को ये फरमाते हुए सुना, वो खड़ा हो जाए, ये बात सुनकर बारह आदमी खड़े हो गए, सब ने कहा: हमने नबी करीम स्वल्लाहो अलयहे वा आलेही वा सल्लम को देखा और ये फरमाते हुए सुना : जबकि हुज़ूर पाक अलयहिस्सलाम ने हज़रत अली का हाथ भी पकड़ा हुआ था के “में जिस जिस का भी मौला(आका वा सरपरस्त) हूं उन सबका मौला (आका वा सरपरस्त) ये अली भी है”  ए अल्लाह जो इस अली से दुश्मनी रखे तू भी उस से दुश्मनी रख,जो अली की मदद करे तू भी उसकी मदद कर और जो अली को छोड़ जाए तू भी उसे छोड़ दे! सिर्फ़ तीन आदमी नही उठे,तो सैयदना अली अलैहिस्सलाम ने उन तीनों पर बद्दुआ की और उन तीनों को उनकी बद्दुआ लग भी गई।*

(मुस्नद अहमद रिवायत न 12307)

ख़ुदा की हुज्जत

हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं,  रसूले ख़ुदा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: मैंﷺ और अलीؑ खल्क़ पर ख़ुदाﷻ की हुज्जत हैं।

📚 तारीख़ मदीनत दमिश्क़ : सफाह 309
हिबतुल्लाह बिन अब्दुल्लाह अल-शाफ़िई
अल-मारूफ़ इब्न असाकिर (499 हिजरी – 571 हिजरी)

रसूल अल्लाह saws की वफात पर हज़रत अबु बकर ने मर्सिया(गम की मजलिस) पढ़ा

*रसूल अल्लाह saws की वफात पर हज़रत अबु बकर ने मर्सिया(गम की मजलिस) पढ़ा*➡️

*अहलेसुन्नत किताब Musnad Ahmed Hadees # 11041*

۔ (۱۱۰۴۱)۔ عَنْ عَائِشَۃَ، أَنَّ أَبَا بَکْرٍ دَخَلَ عَلَی النَّبِیِّ ‌صلی ‌اللہ ‌علیہ ‌وآلہ ‌وسلم بَعْدَ وَفَاتِہِ فَوَضَعَ فَمَہُ بَیْنَ عَیْنَیْہِ، وَوَضَعَ یَدَیْہِ عَلَی صُدْغَیْہِ، وَقَالَ وَا نَبِیَّاہْ، وَا خَلِیلَاہْ، وَا صَفِیَّاہْ۔ (مسند احمد: ۲۴۵۳۰)

सय्यदा आयशा रज़ियल्लाहु अन्हू से मरवी है कि नबी करीम स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम की वफ़ात के बाद हज़रत अबूबकर रज़ियल्लाहु अन्हू आप अलैहिस्सलाम के पास आए और अपना मुँह आप अलैहिस्सलाम की दोनों आँखों के दरमियान और अपने हाथ आप अलैहिस्सलाम की कनपटियों पर रखे और कहा: *हाय मेरे नबी ! हाय मेरे ख़लील !हाय अल्लाह के मुन्तख़ब नबी!😭*

👆इस रिवायत में रसूलअल्लाह स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम की वफ़ात का ज़िक्र है कि जब आप की वफ़ात की ख़बर हज़रत अबूबकर को पहुँची तो हज़रत अबूबकर हुज़ूर पाक के जिस्म मुबारक के पास आये और अपने हाथों से *हुज़ूर के चेहरा ए मुबारक को पकड़ कर जिस तरह से मय्यत के करीबी लोग हाय हाय बोल कर गम मनाते हुए मरने वाले की बातें याद कर कर के मर्सिया पढ़ते हैं उस ही अंदाज़ में बोलने लगे के हाय मेरे ख़लील ! हाय मेरे नबी ! हाय अल्लाह के मुन्तख़ब नबी।वगैरह।*

अब अगर मरसिए पर और मय्यत के गम में रोने पर किसी को फतवा देना है तो सबसे पहले हज़रत अबुबकर का अमल भी ध्यान में रखना 🙏