
किसी का ज़र्फ़ देखना होतो उसे इज्जत दो, फितरत देखना हो तो उसे आज़ादी दो, नियत देखनी हो तो उसे कर्ज दो, खसलत देखनी हो तो उसके साथ खाना खाओ, सब्र देखना हो तो उस पर तनक़ीद कर के देख लो, खुलूस देखना हो तो उससे मशवरा कर लो
फरमान ए मौला अली अलैहिस्लाम

किसी का ज़र्फ़ देखना होतो उसे इज्जत दो, फितरत देखना हो तो उसे आज़ादी दो, नियत देखनी हो तो उसे कर्ज दो, खसलत देखनी हो तो उसके साथ खाना खाओ, सब्र देखना हो तो उस पर तनक़ीद कर के देख लो, खुलूस देखना हो तो उससे मशवरा कर लो
फरमान ए मौला अली अलैहिस्लाम
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