हज़रत शैख़ सदरुद्दीन रहमतुल्लाह अ’लैह

हज़रत शैख़ सदरुद्दीन रहमतुल्लाह अ’लैह हज़रत शैख़ बहाउद्दीन ज़करिया के फ़रज़ंद-ए-अर्जुमंद थे और वालिद-ए-बुज़ुर्ग़वार ही की सोहबत में अ’क़ली-ओ-रूहानी ता’लीम पाई।इसी ता’लीम की बदौलत अपने ज़माना में सर-हल्क़ा-ए-औलिया समझे जाते थे।

वालिद-ए-बुज़ुर्गवार के विसाल के बा’द जब रुश्द-ओ-हिदायत की मसनद पर मुतमक्किन हुए तो तर्का में सात लाख नक़्द मिले। मगर ये सारी रक़म एक ही रोज़ में फ़ुक़रा-ओ-मसाकीन में तक़्सीम करा दी और अपने लिए एक दिरम भी न रखा। किसी ने अ’र्ज़ की कि आपके वालिद-ए-बुज़ुर्गवार अपने ख़ज़ाने में नक़्द-ओ-जिंस जम्अ’ रखते थे और उसको थोड़ा थोड़ा सर्फ़ करना पसंद करते थे।आपका अ’मल भी उन्हीं की रविश के मुताबिक़ होना चाहिए था।शैख़ सदरुद्दीन रहमतुल्लाह अ’लैह ने इर्शाद फ़रमाया कि हज़रत बाबा दुनिया पर ग़ालिब थे, इसलिए दौलत उनके पास जम्अ’ हो जाती तो उनको अ’लाइक़-ए-दुनिया का कोई ख़तरा लाहिक़ न होता, और वो दौलत को थोड़ा थोड़ा ख़र्च करते थे। मगर मुझ में ये वस्फ़ नहीं, इसलिए अंदेशा रहता है कि दुनिया के माल के सबब दुनिया के फ़रेब में मुब्तला न हो जाऊँ,इसलिए मैं ने सारी दौलत अ’लाहिदा कर दी।

मगर इस फ़य्याज़ी और जूद-ओ-सख़ा के बावजूद उनके यहाँ दौलत की फ़रावानी रहती थी।एक बार शैख़ रुक्नुद्दीन फ़िरदौसी देहली से मुल्तान तशरीफ़ ले गए तो हज़रत शैख़ सदरुद्दीन से भी मिलने आए।उस वक़्त उनके यहाँ उ’लमा और फ़ुक़रा की बड़ी ता’दाद मौजूद थी।शैख़ रुक्नुद्दीन फ़िरदौसी का बयान है कि खाने का वक़्त आया, तो ऐसा पुर-तकल्लुफ़ दस्तरख़्वान बिछाया गया, जैसा बादशाहों के यहाँ हुआ करता है।ख़ुद शैख़ सदरुद्दीन रहमतुल्लाह अ’लैह के सामने तरह-तरह के खाने और हल्वे थे। शैख़ रोज़े से थे मगर तबर्रुकन-ओ-तयम्मुनन खाने में शरीक हो गए, और शैख़ सदरुद्दीन के क़रीब ही दस्दरख़्वान पर बैठे।शैख़ रुक्नुद्दीन ने अपने मेज़बान की ख़ातिर रोज़ा तो इफ़्तार कर लिया,मगर सोचने लगे कि सिर्फ़ इफ़्तार ही पर इक्तिफ़ा किया जाए या कुछ खाया जाए।शैख़ सदरुद्दीन ने अपने नूर-ए-बातिन से उनकी इस कश्मश को महसूस कर के फ़रमाया कि जो शख़्श हरारत-ए-बातिन से तआ’म को नूर बना कर हक़ तक पहुँचा सके उसके लिए तक़्लील-ए-तआ’म की पाबंदी लाज़िम नहीं।

चूँ कि लुक़्मः मी-शवद बर तू कुहन
तन म-ज़न हर चंद ब-तवानी ब-ख़ूर

मेहमानों की ख़ातिर शैख़ दस्तरख़्वान पर हाथ न रोकते थे कि उनके हाथ रोक लेने से मेहमान कहीं तकलीफ़ में भूके न रह जाएं।