
तुम्हारा कोई शहर दूसरे शहर से अच्छा नहीं है। तुम्हारे लिए सब से अच्छा शहर वो है जो तुम्हारा बोझ उठाए (अर्थात जहाँ तुम्हारा रोज़गार हो)।
मौला ईमाम अली अलैहिसलाम

तुम्हारा कोई शहर दूसरे शहर से अच्छा नहीं है। तुम्हारे लिए सब से अच्छा शहर वो है जो तुम्हारा बोझ उठाए (अर्थात जहाँ तुम्हारा रोज़गार हो)।
मौला ईमाम अली अलैहिसलाम
Have a WordPress.com account? Log in now.
