मौला अली फरमाते है

मौला अली फरमाते है
जो इंसान अपने ज़माने के इमाम को ना पहचाने और इस दुनिया से उठ जाए उस की मौत कुफ्र व ज़लालत की मौत है लिहाज़ा तुम पर अपने अपने वक्त के इमाम की इता अत लाज़िम है और उस से ला इल्म रहने कि भी तुम्हे माफी नहीं
नहजुल बलागह

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