Hadeeth दैलमी फी अल फिरदोस 03/142 रकम 2723

हज़रत उमर फारुख र.अ. फरमाते है कि हुज़ूर ए पाक सल्ललाहो अलेह वा आलेही वस्सलम ने इरशाद फ़रमाया
हज़रत अली इब्ने अबुतालिब अ.स. की मुहब्बत आग से आज़ादी की सनद है
📚दैलमी फी अल फिरदोस 03/142 रकम 2723

नबी और अली

*नबी और अली*

*दोनों की परवरिश अबु तालीब ने की*
*एक मुस्तफा बने।*
*एक मुर्तजा बने।*

*नबी रिसालत,*
*अली इमामत,*

*नबी हिक्मत,*
*अली बाबे हिक्मत,*

*नबी अदालत,*
*अली वकालत,,*

*नबी सखावत,*
*अली विरासत*,

*नबी रसुलूल्लाह*
*अली असदुल्लाह,*

*नबी हबीबल्लाह*
*अली वलीअल्लाह,*

*नबी हाफीज़*
*अली मुहाफ़िज,*

*नबी कुरआन*
*अली जुबान,*

*नबी इब्तेदा*
*अली इन्तहा,*

*नबी शहर*
*अली दरवाजा,*

*नबी मुस्तफा*
*अली मुर्तजा,*

*नबी मालिक ओ मुख्तार*
*अली हैदर ए कर्रार*

*नबी मेहबूब ए खुदा*
*अली शेरे खुदा*

*फरमान ए मोहम्मद ऐ मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम..*

*अली मेरा भाई*
*अली मेरा खुन*
*अली मेरा गोश्त*
*अली मेरा नुर*
*अली मुझ से है, मैं अली से हुं।*
*जिस का मैं मौला, मेरे बाद अली भी उस का मौला।*

*हम को अली की हद नही मिलती*
*और लोग केहते हैं के हम अली को हद से ज्यादा मानते है… ताज्जुब है !*

❣️❣️ *या अली मदद* ❣️❣️