19 Ramzan

#अय्याम_ए_ग़म____शब_ए_ज़रबत

#मस्जिद_ए_कूफा –: इमाम अली (अ.स.) की आँखों मे आँसू देख कर किसी ने पूछा .. मौला आप क्यूँ रो रहे हैं ?
क्यूँ आप इब्ने मुलजिम को देखते ही ग़म ज़दा हो जाते हैं ?

इमाम अली (अ.स.) ने फ़रमाया मै इब्ने मुलजिम की हयात चाहता हूँ मगर ये मेरी मौत चाहता है ..

मौला आप मौत से डरते हैं ?

मै मौत से नहीं डरता मगर ईद क़रीब है ..
मेरे बच्चे परदेस मे हैं …
उनकी माँ फ़ातेमा ज़हरा (स.अ.) भी नहीं हैं …
मेरी शहादत की ख़बर से इन बच्चों पे क्या गुज़रेगी …

#_19__रमज़ान_की_शब —: इमाम अली (अ.स.) मुज़तरिब हैं …
रात के आख़िरी पहेर मौला अपनी बेटी के पास जाते हैं …
ज़ैनब (स.अ.) सो रहीं हैं ..
मौला बैठ जाते हैं …
चाहते हैं के ज़ैनब (स.अ.) को उठाये मगर नही उठा पाते हैं …..
इमाम अली (अ.स.) की आँखों के अश्क ज़ैनब (स.अ.) के रुखसार पे गिरते हैं ज़ैनब (स.अ.) घबरा के उठती हैं …
अमीरुल मोमेनीन कूफे के अमीर इमाम अली (अ.स.) आज रो रहे हैं …
बेटी बेचैन हो कर बाप से पूछती है ..
क्या हुआ बाबा क्यूँ रो रहे हैं ??

बाबा ने बेटी के सर पे शफकत से हाथ फेरा ..
प्यार किया ..
बहोत प्यार किया ..
दिलासा दिया ..
बाबा ने बेटी को अपनी शहादत की ख़बर सुनायी ..
कर्बला से शाम तक के सारे वाकेयात सुनाये ..
बेटी तुम्हें फिर कूफे आना है ..
असीर हो कर ..
हाथों मे रसन होगी शाम का बाज़ार होगा ..
रिदाये छिन चुकी होंगी …
बरहना सर होगी …
ज़ैनब (स.अ.) रोती जाती हैं …
बेटी मेरे बाद तुम्हें सानीये हैदर बन्ना है .. इमामत बचानी है …
इमामत को सहारा देना है ..

19 रमज़ान फज्र की आज़न से पहले मौला अली अ.स. बार-बार आसमान की तरफ देख कर अल्लाह से कह रहे हैं वादे वाला वक्त आ गया हैं जिस का वादा था …

सोये हुये कातिल को उठा कर नमाज़ ए फज्र अदा करने लगे ..
इमाम अली (अ.स.) सजदे मे थे इब्ने मुलजिम ने कारी ज़र्ब मारी

अल्लाह हो अकबर
कयामत गुज़र गयी

“Rabb-e-Kaaba ki Qasam Mai Kamyab Hogaya!”

19 Ramzan ki wo raat thi, Tahajjid ka waqt tha aur ye wo jagah thi jahan ibne muljim lanati (jisko Aaqa SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne puri insaniyat me se 2 badbakht tareen insano me se ek karar diya tha) usne laeen ne is Muqaam par Ameer ul Momineen Maula-e-Kainat Sayyeduna Maula Ali al Murtaza KarramAllahu Wajhahul Kareem ke Sar-e-Aqdas pe zehar pe dubi talwar se waar kiya. Is waar ke zakham aur zehar ke asar se 21 Ramzan ko Maula Ali Alaihissalam is duniya e faani se parda farma gaye.

Jab us laeen ki talwar Aapke Sar-e-Aqdas pe lagi, Aapki Zubaan-e-Pak se Alfaz nikle “Rabb-e-Kaaba ki Qasam Mai Kamyab Hogaya!” 19 Ramzan ki raat ko isliye “Shab-e-Zarbat” kehte hai…..

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ज़रबत के बाद हसनैन शरीफैन (अस) और उन के चाहने वालों के नाम हज़रत अली (अस) की वसीयत

ज़रबत के बाद हसनैन शरीफैन (अस) और उन के चाहने वालों के नाम हज़रत अली (अस) की वसीयत:
ضربت کے بعد حسنینؑ شریفین اور ان کے چاہنےوالوں کے نام حضرت علی علیہ السلامؑ کی وصیت:

اُوْصِیْکُمَا بِتَقْوَی اللّٰہِ۔
मैं तुम दोनों को खुदा से डरते रहने की वसीयत करता हूं
میں تم دونوں کو خدا سے ڈرتے رہنے کی وصیت کرتا ہوں۔

وَاِنْ لَا تَبْغِیَاالدُّنْیَا وَاِنْ بَغَتْکُمَا۔
और दुनिया कि तरफ माएल ना होना खुवाह वह तुम्हारी तरफ माएल हो
اور دنیا کی طرف مائل نہ ہونا خواہ وہ تمہاری طرف مائل ہو۔

وَلَا تَأَسَفًا عَلیٰ شَیْ ءٍ مِنْھَا زُوِیَ عَنْکُمَا۔
और दुनिया कि जो चीज़ तुम से रोक ली जाए तो उस पर अफसोस ना करना
اور دنیا کی جو چیز تم سے روک لی جائے اس پر افسوس نہ کرنا۔

وَقُوْلَا بِالْحَقِّ۔
और जो भी कहना हक़ के लिए कहना
اور جو بھی کہنا حق کے لئے کہنا۔

وَاعْمَلَا لِلْاَجْرِ۔
और जो कुछ करना सवाब के लिए करना
اور جو کچھ کرنا ثواب کے لئے کرنا۔

وَکُوْنَا لِلظَالِمِ خَصْمًا وَلِلمَظْلُوْمِ عَوْنًا۔
और ज़ालिम के दुश्मन और मज़लूम के मददगार रहना
اور ظالم کے دشمن اور مظلوم کے مددگار رہنا۔

اُوْصِیْکُمَا وَجَمِیْعَ وَلَدِیْ وَاَھْلِیْ وَمَنْ بَلَغَہُ کِتَابِیْ بِتَقْوَی اللّٰہِ وَنَظْمِ اَمْرِکُمْ۔
मैं तुम दोनों को, अपनी दूसरी औलादों को, अपने कुनबे के लोगों को और जिन लोगों तक मेरी यह बात पहुंचे उन सब को यह वसीयत करता हूं के अल्लाह से डरते रहना और अपने उमूर को मुनज़्ज़म रखना
میں تم دونوں کو، اپنی دوسری اولادوں کو، اپنے کنبے کے افرادکواور جن لوگوں تک میرایہ نوشتہ پہنچے، اُن سب کو وصیت کرتا ہوں کہ اللہ سے ڈرتے رہنا اور اپنے امور کو منظم رکھنا۔

وَصَلَاحِ ذَاتِ بَیْنِکُمْ۔ فَاِنِّیْ سَمِعْتُ جَدَّکُمَاصَلَّی اللّٰہُ عَلَیْہِ وَاٰلِہٖ یَقُوْلُ:صَلَاحُ ذَاتِ الْبَیْنِ اَفْضَلُ مِنْ عَامَۃِ الصَّلٰوۃِ وَالصِّیَامِ۔
और बाहमी ताअल्लुकात को सुलझाए रखना, कीयुं की मैं ने तुम्हारे नाना रसूल अल्लाह (स अ व अ व) को फरमाते सुना है के: “आपस की कशिदगियूं को मिटाना आम नमाज़ रोज़े से अफ़ज़ल है
اورباہمی تعلقات کو سلجھائے رکھنا، کیونکہ میں نے تمہارے نانا رسول اللہ صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم کو فرماتے سنا ہے کہ:آپس کی کشیدگیوں کومٹانا عام نماز روزے سے افضل ہے۔

وَاللّٰہَ اللّٰہَ فِیْ الْاَیْتَامِ، فَلاَ تُغِبُّوْاأَفْوَاہَہُمْ وَلَا یَضِیْعُوْا بِحَضْرَتِکُمْ۔
देखो! यतीमों के बारे में अल्लाह से डरते रहना उन पर फाक़े की नौबत ना आए और तुम्हारे होते होए वह बर्बाद ना हों
دیکھو! یتیموں کے بارے میں اللہ سے ڈرتے رہناان پر فاقے کی نوبت نہ آئے اور تمہارے ہوتے ہوئے وہ برباد نہ ہوں۔

وَاللّٰہَ اللّٰہَ فِیْ جِیْرَانِکُمْ، فَاِنَّھُمْ وَصِیَّۃُ نَبِیِّکُمْ، مَازَالَ یُوْصِیْ بِھِمْ، حَتَّی ظََنَنَّا أَنَّہُ سَیُوَرِّثُھُمْ۔
देखो! अपने हम्सायों के बारे में खुदा से डरते रहना, कियूंकी इन के बारे में तुम्हारे नबी (स अल व आल व) ने बराबर हिदायत कि है आप (स अल व आल व) इन के बारे में इस क़दर ताक़ीद फरमाते थे कि हमें यह गुमान होने लगा था कि आप (स अल व आल व) उन्हें भी वर्सा दिलाएंगे
دیکھو! اپنے ہمسایوں کے بارے میں خدا سے ڈرتے رہنا، کیونکہ ان کے بارے میں تمہارے نبیؐ نے برابر ہدایت کی ہےآپ ؐان کے بارے میں اس قدر تاکید فرماتے تھے کہ ہمیں یہ گمان ہونے لگا تھا کہ آپ ؐاُنھیں بھی ورثہ دلائیں گے۔

وَاللّٰہَ اللّٰہَ فِیْ الْقُرْاٰنِ، لَا یَسْبِقُکُمْ بِالْعَمَلِ بِہٖ غَیْرُکُمْ۔
और क़ुरान के बारे में अल्लाह से डरते रहना, कहीं ऐसा ना हो के दूसरे इस पर अमल करने में तुम पर सबक़त ले जाएं
اور قرآن کے بارے میں اللہ سے ڈرتے رہنا، کہیں ایسا نہ ہو کہ دوسرے اس پر عمل کرنے میں تم پر سبقت لے جائیں۔

وَاللّٰہَ اللّٰہَ فِیْ الصَّلوٰۃِ، فَاِنَّھَاعَمُودُ دِیْنِکُمْ۔
नमाज़ के बारे में अल्लाह से डरना कियुंकी वह तुम्हारे दीन का सतून है
نماز کے بارے میں اللہ سے ڈرنا کیونکہ وہ تمہارے دین کا ستون ہے۔

وَاللّٰہَ اللّٰہَ فِیْ بیْتِ رَبِّکُمْ، لَا تُخْلُوْہُ مَابَقِیْتُمْ۔
और अपने रब के घर के बारे में खुदा से डरते रहना, जीते जी इसे खाली ना छोड़ना
اور اپنے رب کے گھر کے بارے میں خدا سے ڈرتے رہنا، جیتے جی اسے خالی نہ چھوڑنا۔

فَاِنَّہُ اِنْ تُرِکَ لَمْ تُناظَرُوْا۔
कियुंकी अगर यह खाली छोड़ दिया गया तू फिर (अज़ाब से) मोहलत ना पाओगे
کیونکہ اگریہ خالی چھوڑ دیا گیا توپھر (عذاب سے) مہلت نہ پاؤ گے۔

وَاللّٰہَ اللّٰہَ فِی الْجِہَادِ بِاَمْوَالِکُمْ وَاَنْفُسِکُمْ وَاَلْسِنَتِکُمْ فِیْ سَبِیْلِ اللّہِ۔
अपने अमवाल, जान और ज़बान से राहे खुदा में जिहाद के सिलसिले में खुदा से डरते रहना
اپنے اموال، جان اور زبان سے راہِ خدا میں جہاد کے سلسلے میں خدا سے ڈرتے رہنا۔

وَعَلَیْکُمْ بِالتَّوَاصُلِ وَالتَّبَاذُلِ، وَاِیَّاکُمْ وَالتَّدَابُرَوَالتَّقَاطُعَ۔
तुम पर लाज़िम है के एक दूसरे से मेल मिलाप रखना और एक दूसरे की एआनत करना, खबरदार एक दूसरे से क़्त ए ताऑल्लुक से परहेज़ करना
تم پر لازم ہے کہ ایک دوسرے سے میل ملاپ رکھناا ور ایک دوسرے کی اعانت کرناخبردار ایک دوسرے سے قطع تعلق سے پرہیز کرنا۔

لَا تَتْْرُکُواالْاَمْرَ بِالْمَعْرُوْفِ وَالنَّہْیَ عَنِ الْمُنْکَرِ، فَیُوَلَّیٰ عَلَیْکُمْ شِرَارُکُمْ، ثُمَّ تَدْعُوْنَ فَلَا یُسْتَجَابُ لَکُمْ۔
देखो अमरे बिल मारूफ और नहीं अनिल मुंकर को तर्क ना करना, वरना बद किरदार तुम पर मुसल्लत हो जाएंगे और फ़िर अगर तुम दुआ मांगो गे तो वह क़बूल ना होगी
دیکھو!امربالمعروف اور نہی عن المنکرکو ترک نہ کرنا، ورنہ بد کردار تم پر مسلّط ہوجائیں گے اور پھر اگر تم دعا مانگوگے تو وہ قبول نہ ہوگی۔

یَا بَنِیْ عَبْدِالْمُطَّلِبِ! لَا اُلْفِیَنَّکُمْ تَخُوْضُوْنَ دِمَآءَ الْمُسْلِمِیْنَ، خَوْضًا تَقُوْلُوْنَ: قُتِلَ اَمِیْرُالْمُؤْمِنِیْنَ۔
ऐ अब्दुल मुत्तलिब के बेटो! ऐसा ना हो के तुम, “अमीरूल मोमेनीन क़त्ल होगए, अमीरूल मोमेनीन क़त्ल होगए”, के नारे लगाते होए मुसलमानों के खून से होली खेलने लग जाओ
اے عبدالمطلب کے بیٹو! ایسا نہ ہو کہ تم، امیرالمو منین قتل ہوگئے، امیر المومنین قتل ہوگئے کے نعرے لگاتے ہوئے مسلمانوں کے خون سے ہولی کھیلنے لگو۔

أَلاَ لاَ تَقْتُلُنَّ بِیْ اِلَّا قَاتِلِیْ۔
देखो! मेरे बदले में सिर्फ मेरा क़ातिल ही क़त्ल किया जाए
دیکھو! میرے بدلے میں صرف میرا قاتل ہی قتل کیاجائے۔

اُنْظُرُوْااِذَاأَ نَامُتُّ مِنْ ضَرْبَتِہِ ہٰذِہٖ، فَاضْرِبُوْہُ ضَرْبَۃً بِضَرْبَۃٍ، وَلَا تُمَثِّلُ بِالرَّجُلِ، فَاِنِّیْ سَمِعْتُ رَسُوْلَ اللّٰہُ (صَلّی اللّٰہ عَلیْہِ وَآلِہِ وَسَلَّمَ) یَقُوْلُ: ”
اِیَّاکُمْ وَالْمُثْلَۃَ وَلَوْبِالْکَلْبِ الْعَقُوْرِ۔
देखो! अगर मैं इस ज़रब से मर जाऊं, तो तुम इस एक ज़रब के बदले में इसे एक ही ज़रब लगाना, और इस शख्स के हाथ पैर ना काटना, कियुंकी मैं ने रसूल अल्लाह (स अ व अ व) को फरमाते सुना है के: खबरदार किसी के हाथ पैर ना काटना, खूवाह वह काटने वाला कुत्ता ही कियुं ना हो.
دیکھو! اگر میں اس ضرب سے مر جاؤں، تو تم اس ایک ضرب کے بدلے میں اسے ایک ہی ضرب لگانا، اور اس شخص کے ہاتھ پیرنہ کاٹنا، کیونکہ میں نے رسول اللہ(صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم) کو فرماتے سنا ہے کہ: خبردار کسی کے ہاتھ پیر نہ کاٹنا، خواہ وہ ٹنے والا کتّا ہی کیوں نہ ہو۔
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Hadeeth Unlogo ka kya hoga jo

“Unlogo ka kya hoga jo Ali ki Shaan me gustakhi karte hain!”

Hazrat Ibne Buraida Apne Walid se ek taweel riwayat me byan karte hain ke Huzoor Nabi-e-Akram SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam ne farmaya:
“Unlogo ka kya hoga jo Ali ki Shaan me gustakhi karte hain! (Jaan lo) jo Ali ki gustakhi karta hai wo Meri gustakhi karta hai aur jo Ali se juda hua wo Mujhse juda hogaya. Beshak Ali Mujhse hai aur Mai Ali se hun, Uski Takhleeq Meri Mitti se hui hai aur Meri Takhleeq Ibrahim ki Mitti se, aur Mai Ibrahim se Afzal Hun. Hum me se baaz, baaz ki aulad hain, Allah Ta’ala ye saari baate Sunne aur Jaan ne Wala hai.—–Wo Mere baad tum sabka Wali hai. (Buraida bayan karte hain ke) Maine kaha: Ya RasoolAllah! Kuch waqt inayat farmaen aur Apna Haath badhaaen, Mai Tajdeed-e-Islam ki Baiyat karna chahta hun, (aur) Mai Aap SallAllahu Alaihi wa Aalihi wa Sallam se juda na hua yahan tak ke maine Islam par (dobara) baiyat karli.”
Is Hadees ko Imam Tabrani ne Mujam al Awsat me riwayat kiya hai.

Tabrani, Mujam al Awsat, 6/1

Hadeeth इब्ने माजा, किताबुल तिजारत, हद्दीस- 2155, जिल्द-3, सफहा-14

अमीरुल मुअमिनीन हज़रते उमर رَضِیَ اللّٰهُ تَعَالٰی عَنْہने कहा कि मैं ने *रसुल’अल्लाह(ﷺ) सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम*
को येह फ़रमाते हुए सुना कि
जो खाने की चीज़ों की ज़खीरा अन्दोजी (स्टॉक) कर के मुसल्मानों को
तक्लीफ़ देगा अल्लाह तआला उस को *कोढ़ की बीमारी और मुफ़्लिसी में मुब्तला कर देगा।*

*(इब्ने माजा, किताबुल तिजारत, हद्दीस- 2155, जिल्द-3, सफहा-14)*

_नमरूद_

*_नमरूद_*
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*_नसारा का एक फिरका है जिसका नाम सायबा है उसी क़बीले के बादशाहों का लक़ब नमरूद है,अब तक 6 ऐसे बादशाह गुज़रे हैं जिनका लक़ब नमरूद हुआ_*

*_1. नमरूद बिन कुंआन बिन हाम बिन नूह,यही हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम के ज़माने का नमरूद है_*

*_2. नमरूद बिन कोश बिन कुंआन_*

*_3. नमरूद बिन संजार बिन ग़रूर बिन कोश बिन कुंआन_*

*_4. नमरूद बिन माश बिन कुंआन_*

*_5. नमरूद बिन सारोग़ बिन अरग़ू बिन मालिख_*

*_6. नमरूद बिन कुंआन बिन मसास बिन नुक़्ता_*

*📕 उम्दतुल क़ारी,जिल्द 1,सफह 93*
*📕 हयातुल हैवान,जिल्द 1,सफह 98*

*_अब तक 4 ऐसे बादशाह गुज़रे हैं जिन्होंने पूरी दुनिया पर हुक़ूमत की है 2 मोमिन हज़रत सिकंदर ज़ुलक़रनैन और हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम और 2 काफ़िर नमरूद और बख्ते नस्र,और अनक़रीब पांचवे बादशाह हज़रत इमाम मेंहदी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु होंगे जो पूरी दुनिया पर हुक़ूमत करेंगे_*

*📕 अलइतक़ान,जिल्द 2,सफह 178*

*_नमरूद ने 400 साल हुक़ूमत की,नमरूद के पास कुछ तिलिस्माती चीजें थी जिसकी बिना पर उसने खुदाई का दावा किया_*

*_! तांबे का एक बुत था,जब भी कोई चोर या जासूस शहर में दाखिल होता तो उस बुत से आवाज़ आती जिससे वो पकड़ा जाता_*

*_! एक नक़्क़ारा था,जब किसी की कोई चीज़ ग़ुम हो जाती तो उस पर चोब मारा जाता तो वो गुमशुदा चीज़ का पता बताती_*

*_! एक आईना था,अगर कोई शख्स ग़ुम हो जाता तो उसमे नज़र आ जाता कि इस वक़्त कहां पर है_*

*_! एक दरख़्त था,जिसके साए में लोग बैठते और उसका साया बढ़ता जाता यहां तक कि 1 लाख लोग बैठ जाते थे मगर जैसे ही 1 लाख से 1 भी ज़्यादा होता तो साया हट जाता और सब धूप में आ जाते_*

*_! एक हौज़ था,जिससे मुकदमे का फैसला होता युं कि मुद्दई और मुद्दआ अलैह दोनों को उस हौज़ में उतारा जाता जो सच्चा होता उसके नाफ़ से नीचे पानी रहता और झूठा उसमे डुबकी खाता_*

*📕 तफ़सीरे नईमी,जिल्द 1,सफह 677*

*_नमरूद ने शहरे बाबुल में एक इमारत बनवाई जिसकी ऊंचाई 15000 फिट थी,उसने ये इमारत आसमान वालों से लड़ने के लिए बनवाई थी,मौला ने एक ऐसी हवा चलायी कि पूरी इमारत ज़मीन पर आ गयी और उसकी दहशत से लोग 73 ज़बान बोलने लगे उससे पहले तक सिर्फ एक ज़बान सुरयानी ही बोली जाती थी_*

*📕 तफ़सीरे खज़ायेनुल इर्फ़ान,पारा 14,रुकू 10*

*_नमरूद ने हज़रत इब्राहीम खलीलुल्लाह को आग में डालने के लिए जो आग जलवाई थी उसकी लपटें कई सौ फीट ऊपर तक जाती थी उसी आग की तपिश से एक मच्छर के पर व पैर जल गए,इस मच्छर ने रब की बारगाह में दुआ की तो मौला ने फरमाया कि ग़म ना कर मैं तेरे ज़रिये ही नमरूद को हलाक़ करवाऊंगा,ये मच्छर एक दिन नमरूद की नाक के जरिए उसके दिमाग में घुस गया और अंदर ही अंदर काटना शुरू किया,उस तक़लीफ से मौत हज़ार दर्जे बेहतर थी,जब वो काटता तो नमरूद अपने सर पर चप्पलों से मारा करता,दीवार में सर मारता और इसी तरह तड़प तड़प कर मरा_*

*📕 तफ़सीरे नईमी,जिल्द 3,सफह 68*
*📕 मलफूज़ाते निज़ामुद्दीन औलिया,स 162*