
एक मर्तबा हज़रत शाह शम्स तबरेज़ र.ह रास्ते से गुज़र रहे थे ।
आपने देखा की एक नौजवान जुए के अड्डे पर बैठ कर जुआ खेल रहा था ।
हज़रत शाह शम्स तबरेज र.ह उसके करीब गए और उस शख़्स को देखने लगे उस नौजवान ने कहा ऐ बाबा क्या देखते हो जुआ खेलोगे क्या?
हज़रत शाह शम्स तबरेज ने कहा खेलूं तो लेकिन अगर मै जीत गया तो क्या तुम मेरी बात मानोगे?? उस शख़्स ने कहा हाँ क्यों नहीं !
तो शाह शम्स तबरेज र.ह उसके साथ बैठ गए और जुआ खेलने लगे बिल आखिर जब उस खेल में शाह शम्स तबरेज जीत गए फिर आपने फरमाया :
ऐ नौजवान मैंने कहा था कि अगर मैं जीत गया तो तुम मेरी बात मानोगे ।
उसने कहा हां बाबा बताओ क्या करना है? शाह शम्स तबरेज र.ह ने कहा :
ऐ नौजवान ज़ोर से मेरे मुंह पे थप्पड़ मरो!
उस शक्श ने कहा ऐ बाबा आप मेरे दादा बाबा की उम्र के हैं मैं आपको थप्पड़ क्यों मारूं?
शाह शम्स तबरेज र.ह ने कहा ये तुम्हारा वादा था कि जो मैं कहूं वो तुम करोगे अब तुम्हें ये करना पड़ेगा ! बिल आखिर बहुत इसरार के बाद उस नौजवान ने शाह शम्स तबरेज र.ह के मुंह पर ज़ोर से थप्पड़ मारा ।
शाह शम्स तबरेज र.ह ने थप्पड़ खाया और जाने लगे उस नौजवान ने उस जगह को छोड़ कर शाह शम्स तबरेज र.ह का पीछा किया और कहने लगा : ऐ बाबा तुम खेल जीत भी गए और अपने आपको थप्पड़ भी मरवाया मुझे ये बात समझ में नहीं आई ।
शाह शम्स तबरेज र.ह ने उससे फरमाया ऐ नौजवान जुआ खेलना अल्लाह की नाराज़गी का सबब बनता है । तभी मैंने चाहा कि मुझे इसकी दुनिया में ही सज़ा मिले तभी मैंने तुमसे थप्पड़ लगवाया ।
वो शर्मिंदा हो गया और नज़रे झुकाने लगा और शाह शम्स तबरेज र.ह आगे चलने लगे तो वो शख़्स फिर से भाग कर आपके पास आया और कहने लगा ऐ बाबा जुआ तो मै भी खेलता हूं तो सज़ा तो मुझे भी मिलनी चाहिए ।
शाह शम्स तबरेज र.ह ने कहा कि ऐ शख़्स मेरे ज़मीर ने जो मेरे लिए सज़ा तय की वो मैंने अपने आपको दिलाई अब तुम अपने ज़मीर से पूछो कि वो तुम्हारे लिए क्या सज़ा चाहता है ?
तो वो शख़्स सोचने लगा तभी शाह शम्स तबरेज र.ह ने कहा ऐ शख़्स अल्लाह बहुत मुआफ़ करने वाला है अगर तुम अपने इस अमल पर पशेमान हो तो जाओ और अपने आपसे ये वादा करलो की तुम आज के बाद ये अमल नहीं करोगे और अपने आपको तलाश करने की कोशिश करो और इल्म हासिल करने में मगन हो जाओ ।
फिर वो शख़्स सारे बुरे काम छोड़ कर इल्म हासिल करने में लग गया और अल्लाह की रहमत से एक नेक इंसान बन गया ।
ये होती है अल्लाह वालो की नसीहत जिसमे सामने वाले को ज़लील नहीं किया जाता बल्की उसके बुरे अमल पर उसे इस तरह समझाया जाता है कि वो खुद बुरे काम छोड़ कर सही रास्ता इख्तियार करले ।

