Day: May 10, 2020
Hadith to save from magic
*► PROPHET MUHAMMAD (صلى الله عليه وسلم) said:*
اقْرَءُوا سُورَةَ الْبَقَرَةِ فَإِنَّ أَخْذَهَا بَرَكَةٌ وَتَرْكَهَا حَسْرَةٌ وَلاَ تَسْتَطِيعُهَا الْبَطَلَةُ
سورہ بقرہ پڑھا کرو کیونکہ اسے حاصل کرنا باعث برکت اور اسے ترک کرنا باعث حسرت ہے اور باطل پرست ( جادوگر) اس کی طاقت نہیں رکھتے۔
Recite Surat Al-Baqarah, for
1) Reciting it regularly is a blessing and
2) Forsaking it is a loss, and
3) The magicians cannot withstand it.
(SAHIH MUSLIM Hadith #1874)
(SAHIH AL JAAMI Hadith #1165)
(SAHIH AT TARGHEEB Hadith #1463)
Dars E Hadith Day 41
मौला के वफादार घोड़े
(मौला के वफादार घोड़े )
इमाम हुसैन अ.स के घोड़े का नाम (जुलजनह )है …..
गाज़ी अब्बास अ.स के घोड़े का नाम (मुर्तज़िज़ )है ……
हज़रात अली अकबर के घोड़े का नाम
(औक़ाब ) है ….
हज़रात क़ासिम के घोड़े का नाम (मॉमून ) है ….1 – मुर्तज़िज़ सफेद रंग का घोड़ा था उसकी गर्दन लम्बी थी जब वो दुश्मन पर हमला करता तो अपनी गर्दन को ऊचा कर लेता था जिससे इसपर बैठा सवार दिखाई नही देता था …
मौला अब्बास अ.स उचे क़द की वजह से आपको मुर्तज़िज़ मिला
2 – (औक़ाब ) घोड़े की ये खासियत थी की उसके 2 पर (wings ) थे और बहुत तेज़ी से दुश्मन पर हमला करता और ओझल हो जाता था ये हमारे नबी पाक (saww ) का घोड़ा था जो करबला मै अली अकबर अ.स को मिला ….
3 – (मॉमून ) वो घोड़ा था जो दुश्मन पर हमला करता तो बगैर मारे पीछे नही हट ता था ये इमाम हसन अ.स का घोड़ा था जो हज़रात क़ासिम अ.स को मिला …
4 -ज़ुल्जनाह इमाम हुसैन अ.स का घोड़ा था इसके माथे पर सफेद रंग का टीका था जो बहुत खूबसूरत लगता था पहले ज़ुल्जनाह मौला अली अ.स के इस्तेमाल मैं आता था जो बाद मै इमाम हुसैन अ.स को मिला …..
ज़्यादा सख़ी कौन ???
↔ ज़्यादा सख़ी कौन ???
✔ भरे मजमे मे एक शख़्स ने इमामे हसन अलैहिस्सलाम से अर्ज़ किया कि- 👇
“आपके वालिद अली (अलैहिस्सलाम) ज़्यादा सख़ी थे या हातिम ?”
इमामे हसन ने फ़रमाया कि – “तू बता ” !
उस ने कहा- “ग़ुस्ताख़ी माफ़ ! हातिम ज़्यादा सख़ी था”
इमामे हसन ने मुस्कुरा कर फ़रमाया कैसे ??
उस शख़्स ने कहा- “हातिम ताई के चालीस (40) दरवाज़े थे। फ़क़ीर पहले दरवाज़े से ख़ैरात लेता और फिर दूसरे दरवाज़े पर जाता था, और हातिम उसे फिर ख़ैरात देता था। इसी तरह वो फ़क़ीर चालीस (40) दरवाज़ों से मांगता रहता था और हातिम देता रहता था।”
मौला हसन के चेहरे पर मुस्कुराहट आई और फ़रमाया “तारीफ़ कर रहा है या शिकायत” ????
उस शख़्स ने कहा -“मौला आप क्या फ़रमाते हैं ? ”
इमामे हसन ने फ़रमाया- “सुन हातिम पहले दरवाज़े से फ़क़ीर को ख़ैरात देता लेकिन फ़क़ीर की ज़रूरत बाक़ी रहती थी इसलिए वो दूसरे दरवाज़े पर आकर मांगता था, फिर तीसरे से भी और इसी तरह चालीस (40) दरवाज़ों तक उसकी जरूरत पूरी नही होती थी ।
*✔”लेकिन मेरे बाबा अली जिसे एक बार दे देते हैं उसे फिर दर-दर मांगने की ज़रूरत नही रहती”।*

