Blog

कर्बला के 22वें शहीद हज़रते जेबिल्ला इने अली अल-शोबानी

कर्बला के 22वें शहीद हज़रते जेबिल्ला इने अली अल-शोबानी

आप कूफ़े के मशहूर बहादुरों में से थे। हज़रते मुस्लिम इब्ने अकील के कूफ़े पहुँचने के बाद उनके साथ हो गये और निहायत दिलेरी से आपका साथ देते रहे हज़रत मुस्लिम की शहादत के बाद आप इमाम हुसैन की ख़िदमत में हाज़िर हुऐ और यौमे आशूरा हमला-ऐ-अव्वल में शरफे शहादत से मुशर्रफ हो गये।

कर्बला के 23वें शहीद हज़रते मसूद इब्ने हज्जाज अल तमीमी

कर्बला के 23वें शहीद हज़रते मसूद इब्ने हज्जाज अल तमीमी

आप अमीरूल मोमिनीन के ख़ास शियों में से थे और निहायत ही शुजा और बहादुर थे। उमर इब्ने साद के हमराह कूफ़े से करबला पहुँचे और यौमे आशूरा से पहले इब्ने सअद की तरफ से निकल कर हज़रत इमाम हुसैन अ० की ख़िदमत में हाज़िर हो गये और यौमे आशूर अव्वल हमले में शहीद हो कर सआदते अबदी के मालिक बन गये। ओलमा ने लिखा है कि आप के हमराह आप के र्फज़न्द अब्दुर्र-रहमान इब्ने मसऊद भी ह थे जौ साथ ही शहीद हुये।

कर्बला के 24वें शहीद हज़रते हज्जाज इने बद्र अल-तमीमी अल-सईदी

कर्बला के 24वें शहीद हज़रते हज्जाज इने बद्र अल-तमीमी अल-सईदी

जनाब हज्जाज बसरा के रहने वाले क़बीला-ए-बनी साद से थे। आप रईसे बसरा मसूद इब्ने उमर का खत लेकर इमान हुसैन अ० की ख़िदमत में हाज़िर हुऐ थे और फिर वापिस नही गये।

मोअर्ररखीन का ब्यान है कि इमाम हुसैन अलै० ने मसूद इब्ने उमर को ख़त इरसाल किया था जिस में दावते नुसरत भी थी। मसूद ने ख़त पाते ही बनी तमीम बनी हन्ज़ला इब्ने साद इब्ने आमिर को जमा करके एक ख़त के ज़रिये से कहा कि माविया के मरने के बाद से जुल्म व जौर के किले की दिवारे हिल गई है। अब ज़रूरत है कि इन्साफ और इमान की बुनियादें मज़बूत हो। मेरे अज़ीज़ो ! अगर माविया का जादू चल गया और यज़ीद की हुकूमत मुस्तक हो गई तो इस्लाम बिल्कुल ख़त्म हो जायेगा। सुनो ! ‘इमाम हुसैन फर्ज़न्दे रसूल हमें बुला रहे हैं और उनकी इमदाद हमारा फ्रीज़ा है।

आप की तवील तक़रीर के जवाब में सब ने हिमायत का दावा किया इसके बाद आपने हज्जाज सअदी के ज़रिये से इमाम हुसैन अ० की ख़िदमत में वायदा का खत भेजा हज्जाज जो पहले ही से हाज़िरे ख़िदमत होने को तय्यार था इमाम हुसैन के पास पहुँच कर वापिस न गये और यौमे आशूर हमला-ऐ-अव्वल में अपने को फर्ज़न्दे रसूल पर अपने को कुर्बान कर दिया।

कर्बला के 25वें शहीद हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने बुशरा-अल-ख़शअमी

कर्बला के 25वें शहीद हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने बुशरा-अल-ख़शअमी

आपका पूरा नाम अब्दुल्लाह इब्ने बुशर इब्ने रबीया इब्ने उमर इब्ने मग़ारा इब्ने कमर इब्ने आमिर इब्ने राएसा इब्ने मालिक इब्ने वाहेब इब्ने जलीहा इब्ने कल्ब इब्ने रबीआ इब्ने अक्रस इब्ने खलफ इब्ने अकील इब्ने असमारा अनमारी अल ख़शअमी था।

आप निहायत मशहूर बहादुर थे और अज़ीम शख़सियत के मालिक थे। आपके और आपके वालिद के तज़किरे अक्सर तारीखी जंगो में मिलते हैं।

आप पहले इब्ने साद के लश्कर में थे और उसी के साथ कूफ़े से करबला आये थे नवीं मोहर्रम से पहले इमाम हुसैन की ख़िदमत में आकर दसवीं मोहर्रम की सुबह को जंगे मगलूबा में शहीद हो गये। চাসমণি

बाज़ किताबो में आपका नाम जुहैर इब्ने बुशर मिलता है और हो सकता है कि अब्दुल्लाह और जुहैर दोनो अलग-अलग शख़्सियते रही हों।

कर्बला के 26वें शहीद हज़रते अम्मार इब्ने हिसान अलताई

कर्बला के 26वें शहीद हज़रते अम्मार इब्ने हिसान अलताई

आपका पूरा नाम-ओ-नसब ये है अम्मार इब्ने हिस्सान इब्ने शरीह इब्ने सअद इब्ने हारिस इब्ने लाम इब्ने उमर इब्ने समामा इब्ने ज़ेहेल इब्ने जज़आन इब्ने सअद इब्ने तई-अल-ताई था।

आप अरब के शुजाओ में बड़े नामी गिरामी मशहूर थे और आले मोहम्मद के ख़ास मुतीअ-ओ-मनकाद नेज़ जाँनिसार थे। आपके पदरे बुजुर्गवार हिस्सान अमीरूल मोमिनीन के ख़ास सहाबी थे। ये जंगे जमल में लड़े और जंगे सिफ्फीन में लड़ कर शहीद हुये। अम्मार इब्ने हिस्सान मक्का-ऐ-मोअज़्ज़मा में इमाम हुसैन अ० के हमराह हो कर करबला आये और सुबहे आशूर जंगे मगलूबा में शहीद हुये।

आप की सातवीं पुश्त में अब्दुल्लाह इब्ने अहमद निहायत ज़बरदस्त आलिमे दीन और रावी-ए-हदीस गुज़रे हैं ये अपने वालिद के ज़रिये से हज़रत इमाम रज़ा अलै० से रवायत करते थे। मौसूफ की कई तसानीफ हैं जिनमें ज़ायाऐ अमीरूल मोमिनीन ज़्यादा मशहूर है।