
क़ुरआन-ए-मजीद:
لَقَدْ جَآءَكُمْ رَسُوْلٌ مِّنْ اَنْفُسِكُمْ – (अत-तौबा, 128)
तरजुमा: बेशक तशरीफ लाया है तुम्हारे पास एक रसूल ﷺ तुम्हीं में से।
(हज़रत अब्दुल्लाह इब्न अब्बास रज़ि० फरमाते हैं कि: इस आयत में “अन्फुसिकुम” का लफ़्ज़ आला और उम्दा नसब से मुराद है। यानी रसूल ﷺ बनी -हाशिम से हैं जोकि अरबों का आला नसब है। (तफ़सीर-दुर्रे-मन्सूर, सूरह तौबा, आयत 128-129))
क़ौम में अल्लाह तआला की नज़रों में सबसे अफ़ज़ल क़ौम बनी-हाशिम है। (तफ़सीर-क़ुर्तुबी, सूरह तौबा, आयत 128)
जाबिर इब्न अब्दुल्लाह रज़ि० से मर्वी है कि अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की औलाद में इस्माईल अलैहिस्सलाम की औलाद को मख़सूस फ़रमाया। इस्माईल अलैहिस्सलाम की औलाद में बनू कनाना को, बनू कनाना में क़ुरैश को, क़ुरैश में बनू हाशिम को और बनू हाशिम में रसूलुल्लाह ﷺ को मख़सूस फ़रमाया। (सहीह मुस्लिम, किताबुल फ़ज़ाइल, हदीस नं. 2276)
हज़रत इब्न अब्बास रज़ि० फरमाते हैं कि: अल्लाह तआला ने रसूल ﷺ के लिये “अल-मुजम्मल”, “अल-मुज़म्मल”, “अल-मुतवक्किल”, “अल-मुतहम्मल”, “अल-मुज्तबा” और “रऊफ़-रहीम” नाम रखे। (दुर्रे-मन्सूर, सूरह तौबा, आयत 128-129)
और एक और क़ुरआनी आयत का मजमून ये है कि आप ﷺ सब से ज़्यादा अर्फ़ और अफ़ज़ल हैं। (सहीह बुख़ारी, किताबुत तफ़सीर, जिल्द 2, सफ़ा 311)
Note : अल्लाह तबारक व-तअला ने ईब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की औलाद मेसे इस्माइल (अलैहिस्सलाम) को चुना और हजरते इस्माइल की औलाद मेसे बनु-कनान को चुना और उनकी औलाद मेसे कुरैश को चुना और उनकी औलाद मेसे बनु-हाशिम को चुना और बनु-हाशिम मे अपने प्यारे महबूब हुज़ूर मुहम्मद रसूलुल्लाह ﷺ को भेजा, “यानी” अल्लाह तबारक व-तअला ने अफ़ज़लियत का मैय्यार खानदान ही को बनाया तो हम उसी खानदान को अफ़ज़ल कहे तो शिया या तफजीली केसे हो गए.??

