Ahlebait Rehmat ki Chabiyan hai

Ham #Ahlebait Rehmat ki Chabiyan hai

Hazrat #Abdullah ibne #Abbas RA se Riwayat hai ke #Rasulullahﷺ ne Irshad Farmaya : Ham #Ahlebait (عليه السلام)  Rehmat ki Chabiyan hai aur #Risalat ka Mourad ( Source ) hai aur #Farishton ki Aamd o Raft ka Mahal aur Ilm ki Kaan ( Mine) hai.

Page no:-  51-9
Fraid ul Simtain fi Fazayil al Murtaza wal Batool wal Sibtain by Imam ibrahim bin muhammad al jwaini  r.a ( Arabi )

Writer :- Shaikh e Khurasan, Mohaddis e Kabeer, Ibrahim bin Muhammad bin Al Maveed Abi Bakr Jovaini 822 Hijri

Noor us Saqalain ( Urdu Translation )
Translator:- Allama Safdar Raza Qadri

गदीर के मुनकिर को हज़रत अली अलैहिस्सलाम की बद्दुआ है*

*गदीर के मुनकिर को हज़रत अली अलैहिस्सलाम की बद्दुआ है*✋

ये देखिए👇


*अब्दुर्रहमान बिन अबी लैला से मरवी है,वो कहते हैं-में रहबा में सैयदना अली अलैहिस्सलाम के पास मोजूद था,उन्होंने कहा : में हर उस आदमी को अल्लाह का वास्ता देकर कहता हूं जो “गदीर ए खूम” वाले दिन रसूल अल्लाह स्वल्लालहो अलयहे वा आलेही वा सल्लम के पास मोजूद था और आप अलेहिस्सलाम को ये फरमाते हुए सुना, वो खड़ा हो जाए, ये बात सुनकर बारह आदमी खड़े हो गए, सब ने कहा: हमने नबी करीम स्वल्लाहो अलयहे वा आलेही वा सल्लम को देखा और ये फरमाते हुए सुना : जबकि हुज़ूर पाक अलयहिस्सलाम ने हज़रत अली का हाथ भी पकड़ा हुआ था के “में जिस जिस का भी मौला(आका वा सरपरस्त) हूं उन सबका मौला (आका वा सरपरस्त) ये अली भी है”  ए अल्लाह जो इस अली से दुश्मनी रखे तू भी उस से दुश्मनी रख,जो अली की मदद करे तू भी उसकी मदद कर और जो अली को छोड़ जाए तू भी उसे छोड़ दे! सिर्फ़ तीन आदमी नही उठे,तो सैयदना अली अलैहिस्सलाम ने उन तीनों पर बद्दुआ की और उन तीनों को उनकी बद्दुआ लग भी गई।*

(मुस्नद अहमद रिवायत न 12307)

ख़ुदा की हुज्जत

हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं,  रसूले ख़ुदा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया: मैंﷺ और अलीؑ खल्क़ पर ख़ुदाﷻ की हुज्जत हैं।

📚 तारीख़ मदीनत दमिश्क़ : सफाह 309
हिबतुल्लाह बिन अब्दुल्लाह अल-शाफ़िई
अल-मारूफ़ इब्न असाकिर (499 हिजरी – 571 हिजरी)

रसूल अल्लाह saws की वफात पर हज़रत अबु बकर ने मर्सिया(गम की मजलिस) पढ़ा

*रसूल अल्लाह saws की वफात पर हज़रत अबु बकर ने मर्सिया(गम की मजलिस) पढ़ा*➡️

*अहलेसुन्नत किताब Musnad Ahmed Hadees # 11041*

۔ (۱۱۰۴۱)۔ عَنْ عَائِشَۃَ، أَنَّ أَبَا بَکْرٍ دَخَلَ عَلَی النَّبِیِّ ‌صلی ‌اللہ ‌علیہ ‌وآلہ ‌وسلم بَعْدَ وَفَاتِہِ فَوَضَعَ فَمَہُ بَیْنَ عَیْنَیْہِ، وَوَضَعَ یَدَیْہِ عَلَی صُدْغَیْہِ، وَقَالَ وَا نَبِیَّاہْ، وَا خَلِیلَاہْ، وَا صَفِیَّاہْ۔ (مسند احمد: ۲۴۵۳۰)

सय्यदा आयशा रज़ियल्लाहु अन्हू से मरवी है कि नबी करीम स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम की वफ़ात के बाद हज़रत अबूबकर रज़ियल्लाहु अन्हू आप अलैहिस्सलाम के पास आए और अपना मुँह आप अलैहिस्सलाम की दोनों आँखों के दरमियान और अपने हाथ आप अलैहिस्सलाम की कनपटियों पर रखे और कहा: *हाय मेरे नबी ! हाय मेरे ख़लील !हाय अल्लाह के मुन्तख़ब नबी!😭*

👆इस रिवायत में रसूलअल्लाह स्वल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम की वफ़ात का ज़िक्र है कि जब आप की वफ़ात की ख़बर हज़रत अबूबकर को पहुँची तो हज़रत अबूबकर हुज़ूर पाक के जिस्म मुबारक के पास आये और अपने हाथों से *हुज़ूर के चेहरा ए मुबारक को पकड़ कर जिस तरह से मय्यत के करीबी लोग हाय हाय बोल कर गम मनाते हुए मरने वाले की बातें याद कर कर के मर्सिया पढ़ते हैं उस ही अंदाज़ में बोलने लगे के हाय मेरे ख़लील ! हाय मेरे नबी ! हाय अल्लाह के मुन्तख़ब नबी।वगैरह।*

अब अगर मरसिए पर और मय्यत के गम में रोने पर किसी को फतवा देना है तो सबसे पहले हज़रत अबुबकर का अमल भी ध्यान में रखना 🙏