Mu‘awiya ke nazdeek Sahaba-e-Kiram رضوان اللہ علیہم اجمعین ka wajood fitna

Mu‘awiya ke nazdeek Sahaba-e-Kiram رضوان اللہ علیہم اجمعین ka wajood fitna ka sabab tha, is liye unhein qatl kar dene mein hi ummat ki bhalai thi.

Dekhiye Imam Bayhaqi ki kitaab Dala’il an-Nubuwwah ki yeh riwayat:
Ek mauqe par jab Mu‘awiya Madina gaye aur Ummul Momineen Hazrat Aisha Siddiqah رضي اللہ عنها ke huzoor haazir hue, to Ummul Momineen ne poocha:
“Hujr bin ‘Adi jo ek jaleel-ul-qadr Sahabi the, unhein tumne kyun qatl karwaya? Kya unke qatl ke waqt tumhein Allah ka khauf nahi aaya?”
To Mu‘awiya ne jawab diya:
“Main ne unke qatl mein hi ummat ki bhalai samjhi, aur unka zinda rehna ummat mein fasad ka sabab samjha, is liye qatl karwa diya.”

(Dala’il an-Nubuwwah, Imam Bayhaqi, Bab: Ma ruwiya fi akhbar bi qatl nafar min al-muslimeen zulman bi ‘Azra…, jild 6, safha 457)

अफ़ज़ल तरीन घर



(सूरह अन-नूर, आयत 36)
जब अल्लाह तआला ने यह आयत नाज़िल फ़रमाई:
“उन घरों में जिन्हें बुलंद करने का और जिनमें अपना नाम लिए जाने का अल्लाह ने हुक्म दिया है |

“हज़रत अनस बिन मालिक और हज़रत बुरैदा रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने जब इस आयत की तिलावत फ़रमाई, तो हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु खड़े हुए और हज़रत अली व हज़रत फ़ातिमा रज़ियल्लाहु अन्हुमा के घर की तरफ इशारा करके पूछा:

‘या रसूलुल्लाह! क्या ये घर भी उन्हीं घरों में से है?’
नबी करीम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया: ‘हाँ, यह उन घरों में से अफ़ज़ल तरीन है।'”

📚: तफसीर ए दुर्रे-मन्सूर जिल्द: 5 सफाह: 143
ईमाम जलालुद्दीन सुयुति

इमाम हसन अलैहिस्सलाम को माविया ने ज़हर दिलवाया

🔥 इमाम हसन अलैहिस्सलाम को माविया ने ज़हर दिलवाया..🔥

✍️ इमाम उल मुवर्रिखीन अबुल हसन बिन हुसैन बिन अली अल मसूदी रह० [मतवफ्फह 346 हिजरी] ने ‘मरूजुज़्जहब’ में सफा नं 363 पर लिखा है कि-
‘हजरत हसन रजिअल्लाह अन्हु को उनकी बीवी जअदह बिन असअश बिन कैश किंदी ने जहर दिया था, और उसे माविया ने इस काम पर उकसाया था। माविया ने उससे कहा था कि अगर उसने यह काम कर दिया तो वह [माविया] उसे एक लाख दिरहम देने के अलावा अपने बेटे यजीद से उसकी शादी कर देंगे,- जब जआदह ने माविया के मिशन के मुताबिक जनाब हसन रजिअल्लाह अन्हु को ज़हर देकर मार डाला तो माविया ने उसे वादे के तहत एक लाख दिरहम तो भेज दिए लेकिन इसके साथ यह भी कहलवाया-
‘हमें यजीद की जिंदगी अज़ीज़ है अगर इसके साथ तेरी शादी कर दी गई तो तेरे हाथों इसकी जान भी जा सकती है।’
 
तारीख ए अबुल फिदा के सफा नंबर 164 पर भी है कि ‘इमाम हसन की वफात की वजह वो जहर है जिसको उसकी बीवी जआदह ने माविया के कहने पर दिया था…और जब माविया को खबर मिला कि इमाम हसन फौत हो गये हैं तो सजदा-ए-शुक्र में गिर पड़ा और खुश हुआ।’

बरेलवी मसलक के मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना शफी ओकाड़वी ने ‘यजीद पलीद और इमाम पाक’ में सफा नं 188 पर यही बात लिखा है।

मुफ्ती गुलाम रसूल नक्सबंदी (दारुल उलूम कादिरिया जीलानिया, लंदन) ने ‘इमाम हसन और खिलाफत ए राशिदा’ में सफा नं 185 से 186 पर और फिर सफा नं 190 से 191 पर लिखा है कि ‘इमाम हसन को माविया ने जहर दिलवाया था।
देखें 👇
https://archive.org/details/ImamEHassanAurKhilafatERashida/page/n183/mode/1up?view=theater

हयात उल हैवान की पहली जिल्द में सफा नं 172 पर इमाम इब्ने खल्कान के हवाले से है कि जब माविया ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम की वफात की खबर सुना तो इसके दरबार में बुलंद आवाज में तक्बीर की गूंज सुनाई दी और माविया ने कहा आज मेरे दिल को राहत हुआ है फिर सफा 173 पर लिखते हैं कि इमाम हसन की वफात जहर से हुआ 👇
https://archive.org/details/HayatUlHaywan/HAYAAT_UL_HAIWAAN_VOL_1/page/n173/mode/1up?view=theater

सफा 66 पर इमाम खल्कान की इस पूरी इबारत को देखें फिर हैयात उल हैवान के तर्जुमा देखें 👇
https://archive.org/details/2_20220803_20220803_0640/page/n65/mode/1up?view=theater

इमाम शमशुद्दीन ज़हबी ने सियर अलामिन नुबला (3/274) में, इमाम बलाज़री ने अनशाब उल अशराफ (1/389) में, इमाम अहमद नकरी हनफी ने ‘किताब दस्तूर उल उलेमा व जामेह उल उलूम फी इस्तलिहात ए अल फुनून (4/50)’ में, इमाम इब्ने अल वरदी ने तारीख ए इब्ने वरदी (1/158) में,इमाम जमख्सरी ने रबी उल अबरार में, इमाम अशफ्हानी ने मकातिलित्तालीबीन (1/13 व 20) में, इमाम इब्ने आशम शाफाई ने किताब अल फतूह (4/319) में, इमाम अब्दुल बर्र ने अल इस्तियाब (1/389) में, इमाम सिब्ते इब्ने ज़ौजी ने तजकिरातुल ख्वास में, इमाम इब्ने कसीर दमिश्की ने ‘अल बिदाया वन निहाया’ में, इमाम इब्ने जरीर तबरी ने तारीख ए तबरी में, इमाम तबरानी ने मुअज्जमल कबीर (3/71, रकम 2694) में, अल्लामा नूरुद्दीन ज़ामी ने शवाहिद उन नबूवत में लिखा है कि माविया के उकसाने पर जआदह बिन असअश ने अपने शौहर इमाम हसन अलैहिस्सलाम को ज़हर दिया था।
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इमाम हसन के जनाजे पर बनी उमय्या ने तीर चलवाए और इख्तिलाफ हुआ 👇
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