अहले बैत से बुग्ज़ रखने वालों का अंजाम.

कायनात के खालिक व मालिक ने मुहम्मद-ए-अरबी ﷺ के खानदान यानी ‘अहले बैत’ को उम्मत के लिए हिदायत का मरकज़, रहमत का ज़रिया और नजात का परवाना बनाया है,

जो खुशनसीब इन मुकद्दस हस्तियों से मोहब्बत और अकीदत का रिश्ता जोड़ता है, वो दुनिया और आखिरत की कामयाबी पा लेता है, लेकिन इसके बरअक्स, जो बदबख्त अहले बैत से बुग्ज़(नफरत), कीना और मुखालिफत की राह चुनता है, उसके लिए शरीयत के आईने में सिर्फ तबाही, जहन्नम और शैतानी गिरोह में शुमार होने की वईद सुनाई गई है।

अहले बैत से बुग्ज़ रखने वालों का अंजाम.👇

कुरआन व अहादिस के दलालइ इस बात पर गवाह हैं कि आले-रसूल ﷺ से अदावत रखना ईमान का नहीं बल्कि कुफ्र और निफाक का रास्ता है।

हजरत अबू सईद खुदरी رضي الله عنه से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने कसम खाकर इरशाद फ़रमाया:
उस जात की कसम जिसके कब्जे में मेरी जान है! जो आदमी हम अहले बैत से बुग्ज रखेगा, अल्लाह ﷻ उसे जहन्नम में दाखिल करेगा।”
📕सिलसिला अहादिस ए सहीह, जिल्द: 5, सफहा: 643, हदीस नं: 2488)

ये फरमान किसी मामूली इंसान का नहीं, बल्कि खातिमुल अंबिया ﷺ का है, अहले बैत से बुग्ज़ रखना दरअस्ल उस जात-ए-मुबारक से बुग्ज़ रखना है, जिससे अल्लाह के नबी ﷺ को सबसे ज्यादा मोहब्बत थी, जो शख्स नबी के घराने से अदावत रखेगा, उसके लिए जहन्नम के सिवा कोई ठिकाना नहीं हो सकता।

मुखालिफत करने वाले शैतान की जमाअत से हैं.👇

अहले बैत की शख्सियतें उम्मत के लिए नजात की कश्ती और हिदायत के मीनार हैं। जिस तरह समंदर में सफर करने वालों के लिए तारे रहनुमाई करते हैं, उसी तरह अहले बैत इस उम्मत को गुमराही और इख्तिलाफ से बचाने का जरिया हैं।

हजरत अब्दुल्ला बिन अब्बास رضي الله عنه से मरवी है कि रसूलल्लाह ﷺ ने इरशाद फ़रमाया:
“सितारे जमीन वालों के लिए डूबने से बचाव (का सबब) है और मेरे अहले बैत मेरी उम्मत को इख्तिलाफ से बचाने का सबब है, अरब का कोई कबीला अगर उनकी मुखालिफत करेगा तो वो शैतान की जमाअत करार पाएगा।”
📕अल मुस्तद्रक हाकिम, जिल्द: 4, हदीस नं: 4715

इस हदीस में साफ पैगाम है कि अहले बैत की मुखालिफत करने वाला कोई मामूली खतावार नहीं, बल्कि वो सीधे तौर पर शैतान की जमाअत (पार्टी) में शामिल हो जाता है।

जो जबान या कलम आले-रसूल की शान में गुस्ताखी करती है या उनकी मुखालिफत की आग भड़काती है, वो शैतानी एजेंडे पर काम कर रही होती है।

आज के दौर में कुछ फिरके और नासमझ लोग अपनी सियासत और नफरत की आग बुझाने के लिए अहले बैत के मकाम को कम करने या उनसे अदावत रखने की जुर्रत करते हैं, ऐसे तमाम लोगों को ये जान लेना चाहिए कि अहले बैत से दुश्मनी का अंजाम सिर्फ और सिर्फ जहन्नमी बनना है।

अहले बैत की मोहब्बत ईमान की शर्त है और उनसे अदावत जहन्नम की टिकट। अल्लाह तआला हमें अहले बैत की सच्ची मोहब्बत, अदब और इताअत नसीब फरमाए और उनके दुश्मनों के रास्ते से हमारी हिफाजत फरमाए। आमीन!

तालिब-ए-दुआ

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