
हजरत अब्दुल हक मोहद्दीसे देहेलवी رضي الله عنه अपनी किताब (मदारीज उल नुबुव्वत) मे तहरीर फरमाते है की:
हजरत अब्दुल मुत्तलिब رضي الله عنه के बाद हजरत अबू तालिब رضي الله عنه जो हुजूर ﷺ के हकीकी चाचा थे, हुजूर ﷺ के अहदे किफालत में लाए गए अगर चे जुबैर बिन अब्दुल मुत्तलिब رضي الله عنه भी हुज़ूर ﷺ के हकीकी चाचा थे लेकिन हजरत अबदुल्लाह رضي الله عنه और हजरत अबू तालिब رضي الله عنه के दरमियान मुहब्बत बहुत ज्यादा थी, हजरत अब्दुल मुत्तलिब رضي الله عنه उन्हें वसीयत फरमा गए थे के हुजूर ﷺ की मुहाफिजत खूब अच्छी तरह करना उस वक्त हुजूर ﷺ की उम्र मुबारक आंठ8 साल की थी, नो9 दस10 और छे6 साल भी कहा गया है, एक रिवायत मै ये है के हुजूर ﷺ को उस बात का इख्तियार दिया गया था के आप ﷺ अपने चाचाओं मैसे किस की किफालत मै जाना पसंद फरमाते है तो हुजूर ﷺ ने हजरत अबू तालिब رضي الله عنه की किफालत पसंद फ़रमाई थी, हजरत अबू तालिब رضي الله عنه ने हुजूर ﷺ की किफालत व मुहाफिज़त जहूरे नुबुव्वत से पहले और उसके बाद खूब अच्छी तरह अंजाम दी, वो हुजूर ﷺ के बगैर खाना तक ना खाते और हुजूर ﷺ का बिस्तर मुबारक अपने दायने पहलू मै बिछाते घर के अंदर और बाहर हुजूर ﷺ को अपने हमराह रखते|
मदारिज उल नुबुव्वत जिल्द: 2 सफाह नं: 42
तसनीफ: हजरत अब्दुल हक मोहद्दीसे देहेलवी رضي الله عنه
हज़रत अबूतालीब (रजिअल्लाह तआला अन्हो) की हुज़ूर-ए-अक़दस मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ से बेपनाह अकीदत और मोहब्बत वाक्या.👇
हज़रत साईम चिश्ती (रहमतुल्लाह अलैहे) ने अपनी किताब उसनुल मुतालिब फि निजाते अबि तालिब के पेज नं: 68 एक रिवायत बयान की है के :
हजरत अबू तालिब رضي الله عنه नबी पाक ﷺ को आगोश मै लिए बगैर ना सोते और ना ही आपﷺ को लिए बगैर घर से बाहर निकलते, ऐसी मोहब्बत अबू तालिब رضي الله عنه अपनी औलाद से भी ना करते थे,
नबी पाक ﷺ ने फरमाया: जब तक मेरे चाचा अबू तालिब رضي الله عنه हयात रहे मुझे काफिर की तरफ से कोई अजियत नही पोहंची
इमाम इब्ने हजर अस्कलानी رضي الله عنه ने ‘अल इसाबा फी तम्यीजुस्सहाबा’ की आठवीं जिल्द में सफा नंबर 498 पर रकम नंबर 10175 के तहत सहाबा किराम की फेहरिस्त में हजरत अबू तालिब رضي الله عنه का नाम शामिल किया है और जो खिदमात रसूलल्लाह ﷺ के लिया हज़रत अबू तालिब رضي الله عنه ने की वो भी तहरीर फ़रमाई, और साथ ही साथ हज़रत अबू तालिब رضي الله عنه के अशार जो रसूलल्लाह ﷺ की शाने पाक मै लिखे है वो भी तहरीर फरमाए:
और जब अब्दुल मुत्तलिब رضي الله عنه का विसाल हुआ तो उन्होंने मोहम्मद ﷺ के मूतालिक अबू तालिब رضي الله عنه को वसीयत की, पास उन्होंने आप ﷺ की कीफालत की, और आप ﷺ की अच्छी तरबियत की आप ﷺ को अपने साथ शाम का सफर किया, उस वक्त आप ﷺ नौजवान थे, और जब आप ﷺ मबअउश(नबूवत का ऐलान) हुए तो वोह आप ﷺ की नुसरत व ताइद मै उठ खड़े हुवे, और आप ﷺ के दुस्मनो से आप ﷺ का दिफाअ किया, और आप ﷺ की बहोत ज्यादा तारीफे की, जिसमै से हजरत अबू तालिब رضي الله عنه का ये कोल भी है जब हजरत अबू तालिब رضي الله عنه ने अहले मक्का के लिए बारिश की दुआ की तो उन्हें बारिश से सेराब किया गया,
तो हजरत अबू तालिब رضي الله عنه ने कहा:
वोह रोशन जबीं जिसके चेहरा कुरैश के वसिले से बारिश तलब की जाती है यतीमो का फरियाद रस और बेवाओं की ढाल है |
और उसने अपने नाम से उसका नाम मस्तक किया ताके आप ﷺ को अजमत अता करे,पास अर्श का मालिक महमूद है और ये मोहम्मद ﷺ है |
अल इसाबा फी तम्यीजुस्सहाबा जिल्द: 8 सफाह नं: 498 रकम नं: 10175
صَلَّىٰ اللَّهُ عَلَىٰ حَبِيبِهِ مُحَمَّدٍ وَآلِهِ وَسَلَّمَ

