कर्बला के पंद्रहवें शहीद हज़रते हयान इब्ने हारिस अल-सलमानी

कर्बला के पंद्रहवें शहीद हज़रते हयान इब्ने हारिस अल-सलमानी

आप कबीला-ए-अज़्द के चश्मो चराग़ थे आपके दिल में आले मोहम्मद स० की मोहब्बत का अज़ीमुश्शान समन्दर मौजज़न था। इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत को अपना फ्रीज़ा जानते थे। जिस वक्त से आप इमाम हुसैन अलै० कि ख़िदमत में पहुँचे ख़ादिमो की तरह ख़िदमत गुज़ारी करते रहे और तक़रीबन हर मौके पर अपने फ्रीज़ा-ऐ-ख़िदमत अदा किया और सुबह आशूरा जंगे मगलूबा में शहीद हुऐ।

कर्बला के सोलहवें शहीद हज़रते उमर इब्ने अब्दुल्लाह अल-जुनैदी

कर्बला के सोलहवें शहीद हज़रते उमर इब्ने अब्दुल्लाह अल-जुनैदी

आप का पूरा नाम उमर इब्ने अब्दुल्लाह अल-हमदानी अल-जुनैदी था जुनैदा बाइले हमदान में से एक कबीले का नाम है। आप इमाम हुसैन अलै० से करबला में मिलें थे और जब से हाज़िरे ख़िदमत हुऐ थे हर किस्म की ख़िदमत करते रहे और यौमे आशूरा जंगे मगलूबा में शहीद हुऐ सिपहर काशानी और अल्लामा मजलिसी फाज़िल अरबली ने लिखा है कि आप जंगे मगलूबा में शहीद हुऐ है लेकिन अल्लामा समावी का ब्यान है कि आप जंग करते-करते शहीद हुऐ है और आप पर ज़ियारते नाहिया में दर्द आगीन अल्फाज़ के साथ सलाम किया गया है।

कर्बला के सत्रहवें शहीद हज़रते हलास इब्ने उमर रासबी

कर्बला के सत्रहवें शहीद हज़रते हलास इब्ने उमर रासबी

आप कूफ़े के रहने वाले और कबीला-एं-अज़्द की रासब शाख की यादगार थे। अमीरूल मोमिनीन के असहाब में आप का शुमार होता था कूफ़े से उमरे सअद के लश्करी होकर करबला पहुँचे थे और इब्ने साद के लश्कर वालों के साथ ही थे जब आप को यकीन हो गया कि इमाम हुसैन से सुलह न हो सकेगी तो आप रात के वक़्त पोशीदगी के साथ आ मिले और यौमे आशूरा शहीद हुए।

कर्बला के 18वें शहीद नोअमान इब्ने उमर रासेबी

कर्बला के 18वें शहीद नोअमान इब्ने उमर रासेबी

आप भी क़बीला-ए-अज़्द के चश्मो चराग थे। आप हलास अज़्दी के हकीकी भाई और इमाम हुसैन अलै० के जाँनिसार थे। आपको भी अमीरूल मोमिनीन के असहाब में होने का शरफ हासिल था इब्ने साद के लश्कर के साथ करबला में आकर इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत में हाज़िर हुऐ और सुबह आशूर शहीद होकर सआदत अबदी के मालिक बन गये।

कर्बला के 19वें शहीद हज़रते सवारा इब्ने अबी अमीर अल-मेहरानी

कर्बला के 19वें शहीद हज़रते सवारा इब्ने अबी अमीर अल-मेहरानी

आपका पूरा नाम सवारा इब्ने मनगम जाबिस इब्ने अबी अमीर इब्ने नैहमल हमदानी अल-हमी है। आप हमदान के रहने वाले थे। आशूर के पहले दूसरी और दसवीं के अन्दर किसी तारीख को करबला पहुँचे थे आपके नाम के साथ लफ़्ज़ “नेहमी” अपने दादा की तरफ इन्तेसाब कि वजह से लगा हुआ है बाज़ ओलमा ने नहमी को फहमी तहरीर फ्रमा है लेकिन ये मेरे नज़दीक गलत है। आप ने यौमे आशूर पहले हमले में जामे शहादत नौश फ्रमाया है।

आप के बारे में बाज़ किताबों में है कि आप हमला-ए-अव्वल में ज़ख्मी होकर गिरे तो सवार की कौम के लोगों ने उन्हे उठा लिया और इब्ने साद से इजाज़त के बाद छः माह अपने पास रखा बिल आखिर आप ने शहादत पाई।