कर्बला के ग्यारहवें शहीद हज़रते गामिर इब्ने मुस्लिम अबदी

कर्बला के ग्यारहवें शहीद हज़रते गामिर इब्ने मुस्लिम अबदी

आप हज़रत अमीरूल मोमिनीन अलै० के शिया और बसरा के रहने वाले थे आप का पूरा नाम गामिर इब्नेमुस्लिम अबदी अल-मतरी था आप मक्का-ए-मोअज़्ज़मा में इमाम हुसैन अलै० के साथ हो गये थे और त-दमे आख़िर साथ ही रहे आप के हम राह आप का गुलाम सालिम भी था ज़ियारत नाहिया की बिना पर सालिम भी आप ही के हमराह आशूर के दिन शहीद हुआ।

कर्बला के बारहवें शहीद हज़रते सैफ इब्ने मालिक अबदी

कर्बला के बारहवें शहीद हज़रते सैफ इब्ने मालिक अबदी

आप का पूरा नाम सैफ इब्ने मालिक अबदी-अल-नमीरी अल-बसरी था। आप हज़रत अली अलै० के ख़ास शियों में से थे। इमाम हुसैन अलै० की नुसरत के लिये मारिया के मकान में जो ख़ुफ़िया इजतेमा हुआ करता था। उसमें आप भी शामिल हुआ करते थे। आपने मक्के में इमाम हुसैन की बैअत इख़तेयार की थी और आप त-दमें आखिर साथ रहे यौमे आशूरा शहीद हो गये।

कर्बला के तेराहवें शहीद हज़रते अब्दुर-रहमान अल-अरजब

कर्बला के तेराहवें शहीद हज़रते अब्दुर-रहमान अल-अरजब

आप मशहूर ताबई और बड़े शुजा व बहादुर थे। आप क़बीला बनी हमदान की शाख बनी अरजब के चश्मों चराग थे। आप का पूरा नाम अब्दुर्र रहमान इब्ने अब्दुल्लाह अल-कज़न इब्ने अरजब इब्ने मालिक इब्ने माविया इब्ने सअब इब्ने रोमान इब्ने बकीर-अल-हमदानी-अल-अरजबी था। आप उन वफूद के एक मेम्बर थे जो इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत में अर्जियाँ लेकर कूफ़े से मक्का -ए-मोअज़्ज़मा गये थे। पहले वफ्द में अब्दुल्लाह इब्ने सबाअ और अब्दुल्लाह दाल थे। और दुसरे में कैस और यही अब्दुर्र रहमान गये थे। उन के हमराह पचाँस अर्जियाँ थी ये वफद बाँरह माहे सयाम को मक्क-ए-मोअज़्ज़मा पहुँचा था।

मोअर्रखीन का कहना है कि जब इमाम हुसैन अलै० ने मुस्लिम इब्ने अकील को ब-कस्दे कूफा रवाना किया तो उनके हमराह उन्ही अब्दुर्र रहमान को भी कैस और अम्माराः के साथ कर दिया था।
अब्दुर्र रहमान हज़रत मुस्लिम को कूफा पहुँचा कर फिर मक्का-ए-मोअज़्ज़मा पहुँचे और इमाम हुसैन अलै० की मुस्तक्लि बैअत इख़्तेयार कर ली और हज़रत के साथ-साथ करबला आये और यौमे आशूरा शहीद हुऐ।

📝72 तारे, अल्लामा नजमुल हसन करारवी सा0 मरहूम

कर्बला के चौदहवें शहीद हज़रते मुजमाअ इब्ने अब्दुल्लाह अल-आन्दी

कर्बला के चौदहवें शहीद हज़रते मुजमाअ इब्ने अब्दुल्लाह अल-आन्दी

आपका पूरा नाम मजमाअ इब्ने अब्दुल्लाह इब्ने मजमा इब्ने मालिक इब्ने आयास इब्ने अब्द मनात इब्ने अबीदुल्लाह इब्ने सअद अल-अशीरा अल-मज़हजी कही आन्दी था। आप किबला मज़हज एक नुमाया मर्द थे आपके वालिद अब्दुल्लाह इब्ने मुजमाअ सहाबी-ए-रसूल थे और अहदे रिसालत में अच्छी हैसियत के मालिक थे। लोगो की निगाह में आपकी बड़ी इज़्ज़त थी। खुद मुजमाअ का शुमार ताबईन में था और आप को अमीरूल मोमिनीन के साहाबी होने का शरफ हासिल था। मकाम अज़ीब हजानात में जिन लोगो को हुर्र ने इमाम हुसैन अ० के साथ होने से रोका था।

उन में आप भी थे। आप ही से इमाम हुसैन अलै० ने अहले कूफा के हालात अजीब में दरयाफ्त फ्रमाये थे और उन्ही अब्दुल्लाह ने अर्ज की थी कि, मौला ! कूफे के जितने रईस-ओ-सरदार है सब को इब्ने ज़्याद ने डरा धमका कर और रूपये देकर आप के खिलाफ कर दिया है सब आप से लड़ने को तय्यार है। और ऐ मौला ! यही हाल गुरबा का भी है उन के दिल अगर चें आपके साथ है लेकिन उनकी तलवारें आपकी हिमायत में नही है। फिर आपने अपने कासिदे कैस इब्ने मसहर के मुताल्लिक फ्रमाया कि मैंने अहले कूफा के नाम उन के ज़रिये से आख़िरी ख़त इरसाल किया है। मुजमाअ ने आबदीदा हो कर जवाब दिया मौला ! उन्हें हसीन बिन नमीर ने गिरफ्तार कर के इब्ने ज़्याद के सामने पेश कर दिया था और वह हुक्मे इब्ने ज़्याद से शहीद कर दिये गये। अल-ग़ज़ जनाबे मुजमाअ इब्ने अब्दुल्लाह इमाम हुसैन अलै० के साथ रहे और यौमे आशूरा जंगे मगलूबा में शहीद हो गयें। कुछ रिवायतों की बिना पर आपके बेटे आएज़ इब्ने मुजमाअ भी आप के हमराह आये थे और आप ही के साथ शहीद हुए। मेरी तहकीक के मुताबिक मुजमाअ और उन के चन्द साथी मसलन उमर इब्ने खालिद जनादः वगैरा उस वक़्त कूफ़े से निकल कर करबला पहुँचे थे, जब जनाबे मुस्लिम को शहीद कर दिया गया था।

कर्बला के पंद्रहवें शहीद हज़रते हयान इब्ने हारिस अल-सलमानी

कर्बला के पंद्रहवें शहीद हज़रते हयान इब्ने हारिस अल-सलमानी

आप कबीला-ए-अज़्द के चश्मो चराग़ थे आपके दिल में आले मोहम्मद स० की मोहब्बत का अज़ीमुश्शान समन्दर मौजज़न था। इमाम हुसैन अलै० की ख़िदमत को अपना फ्रीज़ा जानते थे। जिस वक्त से आप इमाम हुसैन अलै० कि ख़िदमत में पहुँचे ख़ादिमो की तरह ख़िदमत गुज़ारी करते रहे और तक़रीबन हर मौके पर अपने फ्रीज़ा-ऐ-ख़िदमत अदा किया और सुबह आशूरा जंगे मगलूबा में शहीद हुऐ।