माविया  शराबी था..सही सनद से साबित

🔥माविया  शराबी था..सही सनद से साबित.🔥
✍️ इस पोस्ट में दो बातें साबित होगीं कि
1) माविया शराबी था
2) माविया के शराबी होने वाली हदीस से इंकार करने के लिए नासबियों की तरफ़ से पेश किए जाने वाले गलत तावीलों का मुकम्मल जवाब ।

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आइए देखते हैं माविया के शराबी होने पर दलील और नासबियों के ऐतराजात का जवाब (सनद मांगने वाले खास ध्यान दें) 👇

1) इमाम शमसुद्दीन ज़हबी ने “सियर अलामिन नुबला” के जिल्द नंबर 5 में सफा नंबर 52 पर लिखा है-
ابن بريدة قال : دخلت أنا وأبي على معاوية ، فأجلسنا على الفراش ، ثم أكلنا ، ثم شرب معاوية فناول أبي ، ثم قال : ما شربته منذ حرمه رسول الله ﷺ ، ثم قال معاوية : كنتُ أجمل شباب قريش ، وأجوده ثغراً ، وماشيء كنت أجد له لذة وأنا شاب . أجده غير اللبن….
अब्दुल्ला बिन बुरैदा ने कहा कि मैं और मेरे बाप माविया के पास गयें, उसने हम [सबको] फर्श पर बिठाया। इसके बाद खाना लाया गया और हमने खाना खाया इसके बाद शराब लाई गई, माविया ने शराब पी और मेरे बाप को [पीने के लिए] पकड़ाई। मेरे बाप ने कहा कि जबसे रसूल सल्ल० ने शराब को हराम किया तबसे फिर हमने कभी [शराब] ना पी….
इसकी सनद को इसी सफे पर हसन करार दिया गया है।
आप खुद भी देखें, लिंक 👇
https://archive.org/details/siar_noblaa/05/page/n51/mode/1up?view=theater

2) इमामों के इमाम यानि इमाम अहमद बिन हंबल ने मुस्नद अहमद बिन हंबल के जिल्द नंबर 10 में सफा नंबर 661 पर हदीस नं 23329 में रिवायत नकल किया है-
حدثنا زيد بن الحباب حدثني حسين حدثنا عبد الله بن بريدة قال دخلت أنا وأبي على معاوية فأجلسنا على الفرش ثم أتينا بالطعام فأكلنا ثم أتينا بالشراب فشرب معاوية ثم ناول أبي ثم قال ما شربته منذ حرمه رسول الله صلى الله عليه وسلم قال معاوية كنت أجمل شباب قريش وأجوده ثغرا وما شيء كنت أجد له لذة كما كنت أجده وأنا شاب غير اللبن أو إنسان حسن الحديث يحدثني..
हिंदी तर्जुमा- “अब्दुल्ला बिन बुरैदह रजिअल्लाह अन्हु कहते हैं कि एट मर्तबा मैं और मेरे वालिद माविया के पास गयें, उन्होंने [यानि माविया ने] हमें बिस्तर पर बैठाया फिर खाना पेश किया जो हमनें खाया फिर पीने के लिए शराब लायी गयी जिसे पहले माविया ने पिया फिर मेरे वालिद को इसका [यानि शराब का] बर्तन पकड़ा दिया तो वो [यानि मेरे वालिद] कहने लगे कि जबसे नबी करीम सल्ल० ने इसकी मनाही फरमायी है [तबसे] मैंने इसे नहीं पिया फिर माविया ने फरमाया कि मैं कुरैश का खूबसूरत-तरीन नौजवान था और सबसे ज्यादा अच्छे दांतों वाला था [और] मुझे दूध व अच्छी बातें करने वाले इंसानों के अलावा इस [यानि शराब] से बढ़कर किसी चीज में ज़ायका नहीं महसूस होती है।”
आप खुद भी इसे उर्दू तर्जुमा के साथ अरबी मतन पर गौर करके पढ़ें, देखें सफा 661 पर, लिंक 👇
https://archive.org/details/MusnadAhmadIbnHambalTarjamahByShaykhMuhammadZafarIqbal/MusnadAhmadIbnHanbal10of14/page/n641/mode/1up?view=theater

यही मुस्नद अहमद बिन हंबल जो कि असल अरबी में है, इसके जिल्द नं 38 में सफा नं 25 से 26 पर हदीस नं 22941 में यही हदीस है और इस हदीस की तहकीक में “सनद कूवी” यानि इस हदीस की सनद मजबूत और सही है।

आप भी देखें, लिंक 👇
https://archive.org/details/MusnadImamAhmedShaker/ahmd_38/page/n23/mode/1up?view=theater
हिंदुस्तान (दिल्ली) में आदाबी दुनिया से छपा हुआ जो मुस्नद अहमद बिन हंबल है उसके जिल्द नं 9 में सफा नं 197 पर हदीस नं 429 में यह हदीस मौजूद है।
इस हदीस की सेहत के बारे में ऊपर देखा होगा कि इसकी सनद कूवी और हसन दर्जे की है।

3) इमाम हैसमी ने मजमुअल जवाएद में जिल्द 5 के सफा 37 पर हदीस नं 8022 के तहत यही रिवायत लिखकर इसकी सनद को सही कहा है।
देखें 👇
https://archive.org/details/09-73929_202107/05_73925/page/n36/mode/1up?view=theater
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नासबी लोग इमाम अहमद बिन हंबल मानते हैं मगर माविया के इस जुर्म को बचाने के लिए मुसन्नफ इब्ने अबी शैबा के एक हदीस का सहारा लेते हैं जिसमें मुस्नद अहमद की यही हदीस इसी सनद के साथ है मगर उसमें शराब पीने का जिक्र नहीं मिलता..👇
حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ الْحُبَابِ، عَنْ حُسَيْنِ بْنِ وَاقِدٍ قَالَ: حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ بُرَيْدَةَ قَالَ: قَالَ: دَخَلْتُ أَنَا وَأَبِي عَلَى مُعَاوِيَةَ، فَأَجْلَسَ أَبِي عَلَى السَّرِيرِ وَأَتَى بِالطَّعَامِ فَأَطْعَمَنَا، وَأَتَى بِشَرَابٍ فَشَرِبَ، فَقَالَ مُعَاوِيَةُ: «مَا شَيْءٌ كُنْتُ أَسْتَلِذُّهُ وَأَنَا شَابٌّ فَآخُذُهُ الْيَوْمَ إِلَّا اللَّبَنَ، فَإِنِّي آخُذُهُ كَمَا كُنْتُ آخُذُهُ قَبْلَ الْيَوْمِ» وَالْحَدِيثُ الْحَسَنُ.
फिर इब्ने अबी शैबा की इस हदीस को लेकर नासबी काफी खुश होते हैं कि हम अपने मक़सद में कामयाब हो गए जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं क्योंकि आज के नासबियों की तरह इब्ने अबी शैबा ने भी सहाबा के जुर्मों पर पर्दा डालने की भरपूर कोशिश की है और इब्ने अबी शैबा ने कई जगहों पर जब किसी सहाबी के जुर्म का इकरार किया तो जुर्म करने वाले सहाबी का नाम छुपा लिया और फिर अगर सहाबी का नाम जाहिर किया तो उस हदीस में उसके जुर्म को छुपा दिया… इसलिए इब्ने अबी शैबा का यह हदीस इस बात का सबूत नहीं है कि माविया शराबी नहीं था।
इस बात की दलील भी हम इसी मुसन्नफ इब्ने अबी शैबा से देते हैं कि इसके छठी जिल्द के सफा नं 72 पर हदीस नंबर 19799 में है-
حدثنا عيسى بن يونس ، عن الأعمش ، عن إبراهيم ، عن علقمة ، قال : غزونا أرض الروم ومعنا حذيفة وعلينا رجل من قريش فشرب الخمر فأردنا أن تحده فقال حذيفة : تحدون أميركم وقد دنوم من عدوكم فيطمعون فيكم , فقال : لأشربئها وإن كانت محرمة ولاشرين على رغم من رغم.
यानि रावी का बयान है कि हम हजरत हुजैफा के साथ रोम की सरजमीं पर जिहाद किया, उस वक्त हमारा अमीर [जिहाद का कमांडर] एक कुरैशी था जिसने शराब पिया तो हमने चाहा कि इसपर हद जारी करें तो हज़रत हुजैफा ने कहा कि क्या तुम अपने अमीर पर हद जारी करोगे वो भी तब जब हम दुश्मन के करीब हैं और ये सब देखकर दुश्मन हमपर टूट पड़ेगा तो ये सब सुनकर जिहाद के अमीर ने कहा कि मैं शराब पीऊंगा चाहे ये हराम ही क्युं ना हो और भले ही लोगों को बुरा लगे।

आप खुद भी इसका उर्दू तर्जुमा देख सकते हैं, लिंक 👇
https://archive.org/details/MusannafIbnEAbiShaibahVol113688339098ByFactofislamsms.wordpress.comOfShakilOn919825036786/Musannaf-Ibn-e-Abi-Shaibah-Vol-06%20%2819649-23879%29By%20Factofislamsms.wordpress.com%20Of%20Shakil%20On%20%2B%2091%209825036786/page/n73/mode/1up?view=theater
मुसन्नफ इब्ने अबी शैबा की इस हदीस से साफ जाहिर है कि जिहाद के दौरान मुसलमानों का अमीर शराब पीता था और जब लोगों ने मना किया तो ना माना और कहा कि मैं शराब पीता रहूंगा भले किसी को बुरा ही क्युं ना लगे… लेकिन इस हदीस में यह नहीं बताया गया कि जिहाद के दौरान शराब पीने वाला कौन शख्स था.? जुर्म करने वाले मुजरिम के बारे में नाम ना बताकर सिर्फ इतना बताया गया कि वो कुरैश खानदान से ताल्लुक रखने वाला था और जिहाद में मुसलमानों का अमीर था..-जाहिर है कि वो जो भी था वह कलमा पढ़ने वाला मुसलमान ही था वरना कोई काफ़िर तो मुसलमानों के जिहादी लश्कर का अमीर तो होगा नहीं जिसमें हजरत हुजैफा रजिअल्लाह अन्हु जैसे सहाबिए रसूल मौजूद हो..!!
इसी सनद के साथ इसी हदीस को इमाम सईद बिन मंसूर ने ‘सुनन सईद बिन मंसूर’ में लिखा और उस कुरैशी अमीर का नाम ‘वलीद बिन उक़बा’ बताया…👇
حدثنا سعيد قال : نا عيسى بن يونس عن الأعمش عن إبراهيم عن علقمة قال : كنا في جيش في أرض الروم ومعنا حذيفة بن اليمان ، وعلينا الوليد بن عقبة ، فشرب الخمر فأردنا ان نحده ، قال حذيفة : أتحدون اميركم ؟ وقد دنوتم من عدوكم فيطمعون فيكم ، فبلغه فقال لأشربن وإن كانت محرمة ولأشربن على رغم من رغم.
देखें जिल्द 2, सफा 197, हदीस नं 2501.
लिंक 👇
https://archive.org/details/FP76509/02_76510/page/n196/mode/1up?view=theater

तफ्सील से देखें 👇
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इमाम हसन अलैहिस्सलाम से मुतल्लिक़ 👇🏻 👇🏻 👇🏻
इमाम हसन अलैहिस्सलाम कि वफात को माविया के दरबारी मुसीबत नहीं समझते थे👇🏻👇🏻👇🏻
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इमाम हसन अलैहिस्सलाम को माविया ने जहर दिलवाया 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
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हदीस ए सुलह इमाम हसन से माविया कि कोई फजीलत साबित नहीं होती 👇🏻👇🏻👇🏻
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सुलह इमाम हसन क्यों और कैसे हुआ 👇🏻👇🏻👇🏻
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अहकामुल कु़ुरान
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सुलह इमाम हसन अलैहिस्सलाम से मुतल्लिक़ पिछली पोस्ट
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गुनियातुत तालिबीन में आई मुआविया कि फजीलत का जवाब 👇🏻👇🏻👇🏻
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नहाजुल बलागा में मुआविया का रद्द 👇🏻👇🏻👇🏻
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माविया का शुमार तुलका में 👇🏻👇🏻👇🏻
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अगर कातिब ए वही भी तो भी मुर्तद ओ गु़ुमराह हो सकता है 👇🏻
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माविया का  कातिब ए वही होना साबित नहीं 👇🏻👇🏻👇🏻
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मुआविया की फजीलत में कोई हदीस साबित नहीं  दोनो पोस्ट 👇🏻👇🏻👇🏻
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हिंदा के बारे में पोस्ट लिंक 👇🏻 👇🏻
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अबू सूफियान के बारे में पोस्ट एक और दो लिंक👇🏻👇🏻👇🏻
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खानदान ए बनू उमैय्या के बारे में एक से तीन पोस्ट लिंक 👇🏻 👇🏻 👇🏻
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