Ghazwa-E-Uhad

*🌹 यौमे शहादत* 🌹

*सहाबी ए रसूल ﷺ, सय्यदुश शोहदा हजरत अमीर हमज़ा और 69 सहाबी ए रसूल ﷺ*

*रिदवानुल्लाहि त’आला अलैहिम अजमइन*

*15 शव्वाल उल मुकर्रम*

*जंगे उहद*

जंगे उहद में सत्तर (70) सहाबए किराम रदियल्लाहो त’आला अन्हुम ने जामे शहादत नोश फरमाया जिनमें *(4) चार मुहाजिर और छियासठ (66) अन्सार थे* तीस की ता’दाद में कुफ्फार भी निहायत जिल्लत के साथ कत्ल हुए!

*📚(मदारिज उल नवुब्बत, जिल्द-2, सफाह-133, किताब सिरते मुस्तफा, सफाह-282)*

इसी जंग में *सैयदना_अमीर_हमज़ा_रदियल्लाहो_अन्हो* भी शहीद हुए

🖊सय्यदुश शोहदा का लक़ब सहाबीए रसूल और हुज़ूर के चचा हज़रते अमीर हमज़ा रदियल्लाहो अन्हो का हैं…जिसका माअना होता है शहीदों का सरदार…

📝 आप हुज़ूर अलैहिस्सलातो वस्सलाम के चचा थे…और हुज़ूर पर जान छिड़कते थे..हुज़ूर किसी की शहादत पर इतना नही रोये जितना आपकी शहादत पर रोये थे… आप बेहद बहादुर और ताकतवर थे.. तन्हा शिकार किया करते थे उन्हें धोखे से शहीद किया गया…

आपकी शहादत इतनी दर्दनाक थी कि हिन्दा नामक ओरत जो बाद में मुसलमान हो गई थी उसने आपका सीना चाक करके आपका कलेजा चबाया था…आपके कान,नाक,होंट,नाक मुबारक को काट कर उसका हार बनाकर पहना था…

जिनके शहीद होने पर हुज़ूर अलैहिस्लाम ने फ़रमाया था कि आज ये शहीद नही हुवे बल्कि मेरी क़मर टूट गई है…

🖌📚:-
*(किताब सिरतुल मुस्तफ़ा , 262)*


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