ग़रीब नवाज़ की आखरी 4 नायाब नसीहतें अपने मुरीद क़ुतुबुद्दीन रह0

ग़रीब नवाज़ की आखरी 4 नायाब नसीहतें
अपने मुरीद क़ुतुबुद्दीन रह0

ख्वाज़ा गरीब नवाज रह0 का दुनियावी आख़री वक्त क़रीब था। आपने अपने सबसे ख़ास #ख़लीफ़ा और प्यारे मुरीद #क़ुतुबुद्दीन_बख़्तियार_काकी रह0 को दिल्ली से बुलवाया।

#अजमेर में हुजरे के सामने आपने महफ़िल रखी।
शेख अली संजरी हाज़िर थे। गरीब नवाज ने फ़रमाया हम कुतुब को ख़िलाफ़त देते है और #दिल्ली के लिए क़याम की तजवीज़ करते है।

फरमान के बाद….
गरीब नवाज ने अपने मुरीद और ख़लीफ़ा-ऐ-खास क़ुतुबुद्दीन काकी रह0 को ख़ास #नसीहत फ़रमाई कि –
“ऐ क़ुतुब !
4 बातें बड़ी खूबियों वाली है।
उन पर अमल करना बाइसे ख़ैर और बरक़त हैं। “

पहली बात 👉 ऐसी फ़कीरी/दुर्वेशी करो जिसमें अमीरी ज़ाहिर हो यानि कोई भी तालिब तुम्हारे दर से खाली हाथ ना लौटे

दूसरी बात भूखों का पेट भरना यानि लंगर कायम करो।
कोई सवाली तुमसे खाने की हाजत करे तो हर मुमकिन उसे पूरा करो

तीसरी बात यह है कि ग़म की हालत में भी ख़ुशी का इज़हार करो ।
मतलब #अल्लाह जिस हाल में भी रख्खे खुश रहना।

चौथी बात यह हैं कि अगर कोई दुश्मनी से पेश आए तो जवाब में दोस्ती का मुज़ाहरा करो ।
सुभान अल्लाह…..💐💐💐💐

दोस्तों गरीब नवाज रह0 की ये नायाब बेशकीमती नसीहतें ‘दलीलुल आरीफिन’ और ‘दिल्ली के 22 ख्वाज़ा’ #किताब में पेज नम्बर 39 पर लिखी हुई है जिसे मैंने खुद पढ़ा है।

दोस्तों गौरतलब हैं कि गरीब नवाज की लंगर वाली नसीहत उनके तमाम खलीफाओं ने ताउम्र निभाई।
जैसे ख्वाजा गरीब नवाज तो गरीबों को नवाज़ने वाले है ही उनका #लंगरखाना तो आज भी बेशुमार मिस्कीनों का पेट भरने के काम आ रहा है साथ में क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार रह0 ने भी #काक (रोटी) देकर काकी खिताब पाया।

कुतुब शाह के खलीफा #बाबा_फरीद का लंगर तो बाबरकत औऱ मशहूर था जिसमें साबिर पिया भी हिस्सा लेते थे। बाबा फरीद के लंगर से मुतास्सिर होकर #गुरुनानक ने भी लंगर की परंपरा शुरू की जो गुरुद्वारों में आज भी कायम है।

बाबा फरीद के ख़लीफ़ा हजरत #निजामुद्दीन औलिया का लंगरखाना तो दिल्ली में शाही लंगरखाने को भी मात देता था। इनके लँगरखाने में रोज़ाना कई मन नमक इस्तेमाल होता था।

मैं हक़ीर भी इन नसीहतों पर अमल करने की कोशिश करता हूँ और अल्लाह से दुआ करता हूँ कि इन नसीहतों पर अमल करने की मुझमें सलाहिय्यत कायम रखे ।
अल्लाह मुझे और आपको भी नसीहत पर अमल करने की तौफीक अता करे।
हक़ मोईन या मोईन
*Radi’Allahu Ta’Ala Anhu*

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